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कांग्रेस के लिए लोस और विस तथा भाजपा के लिए पिछला मेयर चुनाव बुरा सपना

7 वर्ष पहले
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रायपुर। राजधानी के अगले महापौर के लिए भाजपा और कांग्रेस, दोनों के उम्मीदवार सामने आ गए और घमासान छिड़ गया है। महापौर की उम्मीदवारी घोषित होते ही इसे लेकर वार्डों में हलचल भी शुरू हो गई। इसी के साथ राजधानी के चार विधानसभा क्षेत्रों में पिछले तीन चुनावों के नतीजों का आंकलन भी शुरू कर दिया गया। पिछले महापौर चुनाव में भाजपा को राजधानी से कम वोटों से शिकस्त झेलनी पड़ी थी। उसके बाद हुए विधानसभा और फिर लोकसभा चुनावों में राजधानी के चार विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा तगड़ी लीड पर है।
कांग्रेसियों की नजर इस गड्ढे को पाटने की रणनीति पर है तो भाजपा भी इन चुनावों की जोरदार लीड के बावजूद इसलिए निश्चिंत नहीं बैठी है क्योंकि लोस, विस चुनाव की तुलना में महापौर चुनाव का नेचर ही अलग है। भाजपा ने रायपुर के महापौर के रूप में सच्चिदानंद उपासने का नाम शनिवार को सुबह 4 बजे घोषित किया था।
इसी तरह, कांग्रेस की सूची भी दोपहर करीब 1 बजे जारी हुई, जिसमें रायपुर से प्रमोद दुबे को महापौर का उम्मीदवार घोषित किया गया। इसके बाद से देर रात तक दोनों उम्मीदवारों ने किसी रणनीति पर अमल शुरू नहीं किया। दोनों ही प्रत्याशियों ने जनसंपर्क शुरू कर दिया, लेकिन असली घमासान सोमवार से शुरू होने के आसार हैं।
मेयर चुनाव में हार झेली थी भाजपा ने
राजधानी में 2009 में हुए महापौर चुनाव में हालात अभी जैसे ही हैं। उस मेयर चुनाव से ठीक पहले के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में रायपुर नगर निगम की चारों सीटों से भाजपा प्रत्याशी काफी आगे थे (विस में रायपुर उत्तर को छोड़कर)। इसके बावजूद, कांग्रेस की िरणमयी नायक ने मेयर चुनाव में भाजपा की प्रभा दुबे को 21 सौ से ज्यादा वोटों से हरा दिया था।
विस चुनाव में 44 हजार से कांग्रेस पीछे
2013 में हुए विधानसभा चुनाव में रायपुर उत्तर, पश्चिम औैर दक्षिण विधानसभा में कांग्रेसी प्रत्याशी 44435 वोटों से पीछे रहे थे। सबसे बड़ा गड्ढा बृजमोहन अग्रवाल के विधानसभा क्षेत्र रायपुर दक्षिण में 34799 का रहा। सिर्फ रायपुर ग्रामीण विधानसभा में कांग्रेस को 1861 वोटों की बढ़त थी। हालांकि इस विधानसभा क्षेत्र में नगर निगम के 70 में से केवल आठ वार्ड ही आते हैं।
लोस में भाजपा सवा लाख की लीड पर
लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी रमेश बैस को शहर के चार विधानसभा क्षेत्रों से 1 लाख 26 हजार 973 की लीड मिली थी। हालांकि राजनीतिक प्रेक्षक इस लीड को भाजपा उम्मीदवार का प्लस या कांग्रेसियों का माइनस नहीं मान रहे हैं क्योंकि इसे मोदी लहर का नतीजा मान लिया गया है। जानकारों का यह भी तर्क है कि लोस चुनाव की लीड से मेयर चुनाव की तुलना गलत होगी।