रायपुर। सालों बाद एक स्टूडेंट उसी कैंपस में बतौर मेहमान आएगा जहां कभी उसने पढाई पूरी की थी। 12 दिसंबर को एनआईटी के दीक्षांत समारोह में अतिथि के रूप में ओएनजीसी के चेयरमेन रहे सुधीर वासुदेव शिरकत करेंगे। इनके साथ प्रमुख रूप से मुंबई यूनिवर्सिटी के प्रो. एमएम शर्मा भी मौजूद रहेंगे। स्टूडेंट्स को डिग्री और मेडल इन्हीं अतिथियों के हाथों दिया जाएगा। 1975 में आज का एनआईटी, इंजीनियरिंग कॉलेज हुआ करता था, तब सुधीर वासुदेव ने यहीं से अपनी पढ़ाई पूरी की। 2005 में इंजीनियरिंग कॉलेज को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बनाया गया। एनआईटी के इतिहास में संभवत: ये पहला मौका होगा जब इसी प्रांगण में पढ़ा व्यक्ति स्टूडेंट्स को डिग्री से सम्मानित करेगा। दीक्षांत में 890 स्टूडेंट्स को डिग्री, 19 को गोल्ड मेडल और 19 को सिल्वर मेडल से सम्मानित किया जाएगा।
अब तक का सफर
सन् 1956 में रायपुर में सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू हुआ, तब यहां मायनिंग, मेट्रोलॉजिकल की ही पढ़ाई हुआ करती थी। आज यहां 14 ब्रांच हैं। तब यहां 180 स्टूडेंट थे आज करीब साढ़े 4 हजार स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। जानकारों के अनुसार उस दौर में बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी और बंगाल में हावड़ा स्थित इंजीनियरिंग कॉलेज के बाद रायपुर में ही एक मात्र इंजीनियरिंग कॉलेज था। आज देश में मौजूद 30 एनआईटी में से रायपुर एनआईटी 20वें पायदान पर है। एनआईटी रायपुर का पहला दीक्षांत समारोह सन् 2009 में हुआ था।