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नौजवानों को न सेहतमंद खाना, न खेल.. भर्ती में हो रहे फेल

9 वर्ष पहले
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रायपुर। उन्होंने सपने तो ऊंचे पाल रखे थे, पर जब उसे हकीकत में तब्दील करने की बारी आई तो फेल हो गए। सिपाही
बनने का जुनून एक ही झटके में धराशायी हो गया।
छत्तीसगढ़ में छह हजार पदों पर भर्ती के लिए अलग-अलग जिलों में अक्टूबर में शारीरिक नाप-जोख परीक्षा आयोजित की गई। नियमों के मुताबिक इतने पदों के लिए कम से कम 90 हजार उम्मीदवारों को फिजिकल टेस्ट पास करना था। लेकिन खराब सेहत और कमजोर शरीर की वजह से शारीरिक परीक्षा में शामिल एक लाख ४२ हजार में से पास हुए
सिर्फ 14,662 युवा।
अधिकांश लंबी-ऊंची कूद और गोला फेंकने में चित हो गए तो 20 फीसदी कम लंबाई के कारण मात खा गए। शहरी युवाओं की हालत तो और भी शर्मनाक रही। आंकड़े चुगली कर रहे हैं कि शहरी युवक ग्रामीण इलाकों के युवाओं के सामने फिसड्डी साबित हुए। लिखित परीक्षा 24 फरवरी को है।
हुनर वालों को थोड़ी रियायत देनी चाहिए
शारीरिक परीक्षा के प्रभारी डीएसपी सुशील डेविड ने बताया कि दौड़, लंबी कूद और गोला फेंकने में यहां के युवक-युवतियों की क्षमता घटती जा रही है। कुछ ऐसे भी थे, जो दो-तीन सेंटीमीटर के लिए लंबाई कम होने से बाहर होते गए। उनके पास कंप्यूटर की डिग्री, बेहतर मैकेनिक होने जैसे कई अच्छे हुनर भी थे। आधे से ज्यादा तो ऐसे थे, जो नेशनल खेलकूद में भाग ले चुके हैं। अगर सकारात्मक हुनर को ध्यान में रखकर थोड़ी रियायत दी जाए, तो संभवत: युवाओं की संख्या बढ़ जाएगी।
जानकारों ने बताईं ये वजहें
स्कूलों में शारीरिक गतिविधियां कम होती जा रही हैं। बच्चों की फिटनेस का ध्यान नहीं रखा जाता। उन्हें स्पोर्ट्स खेलने का भी मौका कम मिलता है।
भरपेट भोजन तो मिलता है, लेकिन पौष्टिक नहीं। इससे उनका शारीरिक विकास बेहतर ढंग से नहीं हो पा रहा।
राज्य के ज्यादातर इलाके माइंस से भरे हैं, जहां के पानी में आयरन ओर ज्यादा है। इससे भी सेहत नहीं बन पाती। पाचन और पेट की बीमारियां आम होती जा रही हैं।
देर रात तक टीवी देखना, देर से उठना, शारीरिक व्यायाम या दौड़-धूप नहीं करने से क्षमता कम होती जा रही है।
बिगड़ते रुटीन का असर
शहरी युवकों को देर तक सोने की आदत ने बिगाड़ दिया है। ये सुबह जल्दी उठकर कसरत या दौड़-भाग नहीं करते। युवक डेली रूटीन सुधार लें तो उन्हें पुलिस की नौकरी मिल सकती है।ञ्जञ्ज रामनिवास, डीजीपी
स्कूलों में ट्रेनिंग नहीं, कमजोर हैं युवक
देश के कई राज्यों व विदेशों में स्कूल से ही बच्चों को स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग दी जाती है। पर यहां ऐसा नहीं है। युवा इसलिए कमजोर हैं, क्योंकि उन्हें पौष्टिक आहार नहीं मिलता।ञ्जञ्ज बीके पोनवार, डायरेक्टर जंगलवार कॉलेज
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