रायपुर । अब पेड़-पौधे भी बोलेंगे! ट्वीट कर बताएंगे कि जहां वे हैं, वहां जमीन कैसी है, हवा-पानी और प्रकाश ठीक-ठाक मिल रहा है या नहीं। अगर नहीं मिल रहा है तो मांगेंगे। एनआईटी रायपुर के छात्र आदित्य ओम ने ऐसा डिवाइस बनाया है, जो पेड़-पौधों की बातें न सिर्फ जान सकता है, बल्कि ट्वीट करके उन्हें सबको बता भी सकता है। जिस पेड़ पर यह डिवाइस लगा हो, अगर उसमें आग लगे तो वह तुरंत अपने ओनर को ट्वीट कर मदद के लिए बुला सकता है। एनआईटी में इलेक्ट्रॉनिक्स के तृतीय वर्ष के छात्र आदित्य के इस डिवाइस की नेशनल इनोवेशन कॉनक्लेव-2014 में खासी तारीफ हुई है। यही नहीं, उसे एक लाख रुपए की सम्मान राशि भी दी गई। गौरतलब है कि आईटी डिवाइस बनाने वाली बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी ने यह कान्क्लेव किया था। इसके लिए देशभर से करीब 10 हजार इनोवेशन मिले थे। फाइनल राउंड में 20 इनोवेशंस को चुना गया। इसमें से टॉप-5 का सलेक्शन हुआ। आदित्य का डिवाइस इसमें तीसरे नंबर पर था। यही नहीं, इसे ज्यूरी पॉपुलर अवॉर्ड भी मिला। पहले नंबर पर एक कंपनी की कार रही थी जो सतह, आकाश और पानी में चल सकेगी। आईआईटी रुड़की की टीम का रिमोट सेंसिंस डिवाइस दूसरे नंबर पर रहा था। तीसरा पुरस्कार आदित्य को मिला है।
इस डिवाइस का आधार
जमशेदपुर के रहने वाले आदित्य ने बताया कि वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु को 1934 में ग्रेस्कोग्राफ नामक शोध के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था। इसी शोध ने पहली बार साबित किया था कि पेड़-पौधों में भी जीवन है। आदित्य ने बताया कि इसी सिद्धांत से यह विचार आया कि जब जीवन है, तो पेड़-पौधे अपना अनुभव भी शेयर कर सकते हैं। यहीं से डिवाइस की परिकल्पना शुरू हुई।
इनोवेशन पर होगा रिसर्च
आदित्य का डिवाइस भारत सरकार की साइंस एंड इंडस्ट्रीयल रिसर्च विभाग की संस्था प्रिज्म की मार्च में होने वाली बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। यह संस्था इनोवेशन को प्रमोट करती है। वहां मुहर लगी तो छात्र को इसपर आगे रिसर्च के लिए 40 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जा सकता है। इसके बाद तैयार डिवाइस का इस्तेमाल शुरू होगा।
इस तरह काम करेगा
आदित्य की इस डिवाइस का नाम है गैबी ट्री (बातूनी पेड़)। डिवाइस में 12 सेंसर लगे हैं। सभी एक डेटाबेस से जुड़े हैं। जब किसी पेड़ में डिवाइस लगाया जाता है तो वह सेंसर के जरिए पेड़ की गतिविधियों को इस डेटाबेस में कलेक्ट करता है। यह क्लाउड व इंटरनेट सर्वर से जुड़ा है। सेंसर पेड़ की जो भी जरूरत रिकार्ड करते हैं, वे सर्वर से कनेक्ट
ट्विटर पर भेज देते हैं। इस तरह मैसेज ट्वीट हो जाता है।
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