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डाउनलोड करेंरायपुर. विधानसभा चुनाव के बाद राज्य सरकार ने पहला बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया। इसमें 10 आईएएस अधिकारी इधर से उधर किए गए। इनमें पांच कलेक्टर हैं। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि उन कलेक्टरों पर सरकार ने सीधी कार्रवाई की, जिनके परफारमेंस की वजह से सरकार को हार झेलनी पड़ी है। उन पर भी कार्रवाई की गई है जिनके क्षेत्र में मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी का आरोप लगा और भाजपा से जुड़े मतदाताओं के नाम काटे जाने की शिकायतें काफी अधिक थीं।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बुधवार को ही कलेक्टर कांफ्रेंस ली और उसके बाद अफसरों पर कार्रवाई की गई। इस कारण इस फेरबदल को सरकार की नाराजगी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। इसमें बड़ी कार्रवाई बालोद कलेक्टर को हटाना है। बालोद जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रत्याशियों को हार मिली। ऐसा माना जा रहा है कि बालोद में सरकार के कामकाज के क्रियान्वयन में प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहा।
इसी प्रकार रायपुर और बिलासपुर में मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी का आरोप लगा। बिलासपुर के कलेक्टर ठाकुर राम सिंह को तीन साल से एक ही जगह पर रहने के चलते वैसे भी हटाना था। इस कारण बिलासपुर और रायपुर के कलेक्टर को आपस में बदल दिया गया। सरगुजा जिले में भी भाजपा को इस बार अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पाए हैं। हालांकि सरगुजा में भाजपा नेताओं की आपसी खींचतान भी रही, लेकिन प्रशासन को भी संदेश दिया गया है कि परफारमेंस नहीं दे पाने वाले अफसरों को सरकार बख्शेगी नहीं।
जशपुर कलेक्टर एलएस केन के खिलाफ अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से जमीन विवाद का एक मामला चल रहा है। उनको हाईकोर्ट से मिला स्टे खत्म हो गया है। कानूनी कार्रवाई के दायरे में केन फिर से आ गए हैं। इस कारण केन को हटाना पड़ा है। वैसे इस पूरे फेरबदल में सरकार ने परफारमेंस को ही आधार बनाकर आदेश जारी किया है। इसके जरिए प्रशासन को यह संदेश देने का प्रयास भी किया गया है कि काम नहीं वाले अधिक दिनों तक अपने पदों पर नहीं रह पाएंगे। कलेक्टर कांफ्रेंस के बाद हुई कार्रवाई को सरकार की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।
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