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राजधानी के 58 सरकारी मकानों में अफसर-कर्मियों का बेजा कब्जा

7 वर्ष पहले
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रायपुर. राजधानी के सरकारी आवासों में करीब आधा दर्जन आईएएस अफसरों व बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों ने अवैध कब्जा जमा रखा है। इनमें ज्यादातर या तो रिटायर हो चुके हैं या फिर उनका ट्रांसफर हो चुका है। राज्य सरकार अब इनसे मकान खाली करवाने जा रही है । संपदा विभाग ने 58 अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस जारी कर हफ्ते भर का अल्टीमेटम दिया है। नोटिस में कहा गया है कि हफ्ते भर में मकान खाली नहीं किए गए तो बेदखली की जाएगी।

साथ ही किराया और जुर्माने की बकाया राशि भी जमा करने को कहा गया है। ऐसा न करने पर विभागीय स्तर पर वसूली कराई जाएगी। सरकार के कड़े रुख को देखते हुए इन नोटिसों को दो दिन के भीतर बांटने के लिए भी कहा गया है। इसके लिए राजस्व विभाग से अतिरिक्त अमला भी लिया गया है।
किस वर्ग के कितने मकान
संपदा विभाग ने जिन सरकारी आवासों को खाली कराने का नोटिस दिया है, उनमें जी, एच और आई टाइप के 48 आवास हैं जबकि एफ और ई टाइप के भी 10 आवास शामिल हैं। एफ और ई टाइप के सरकारी आवासों में सिर्फ क्लास वन श्रेणी के अफसरों को रहने की पात्रता होती है जबकि जी, एच और आई टाइप के सरकारी आवासों में क्लास टू और उससे नीचे श्रेणी के कर्मचारी निवास करते हैं। करीब आधा दर्जन आवासों में आईएएस अफसरों का कब्जा है जिन्होंने ट्रांसफर होने के बाद भी इन्हें खाली नहीं किया है। इनका तर्क है कि वे नक्सली क्षेत्रों में पदस्थ हैं। इसलिए राजधानी के सरकारी आवास खाली नहीं किए हैं।
नोटिस इन्हें भी
सरकारी आवासों और बंगलों को खाली कराने की मुहिम में जुटी राज्य सरकार के कड़े रुख का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने हाल ही में पूर्व मंत्रियों और विधायकों को भी बंगले खाली करने का नोटिस थमा दिया है। इनमें पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर, लता उसेंडी, पूर्व संसदीय सचिव सिद्धनाथ पैकरा, पूर्व विधायक रेणुका सिंह आदि के नाम शामिल हैं।
किराए पर चढ़ा दिए
राजधानी के सरकारी आवासों में अवैध कब्जा जमा कर बैठे कुछ कर्मचारियों को इन्हें खाली करने का नोटिस देने के लिए राजस्व विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची तो पता चला कि उन बंगलों में किराएदार रह रहे हैं। राजस्व विभाग की टीम ने इसकी रिपोर्ट संपदा विभाग को दी है।