रायपुर. बर्थ-डे पार्टी में देर रात तक शराब परोसने के मामले में तंत्रा बार के लाइसेंस की जांच के दौरान नया खुलासा हुआ है। बार का लाइसेंस विजय गुरु के नाम पर है, लेकिन इसके लिए जमा की गई बैंक गारंटी में स्टांप पेपर किसी और के नाम से जारी हुआ है। लाइसेंस और स्टांप पेपर में अलग-अलग नाम होने की वजह से अफसर हैरान हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर ये गलती कैसे हुई?
36 सिटी सेंटर शॉपिंग मॉल में स्थित तंत्रा बार में दो माह पहले बर्थ-डे पार्टी के दौरान देर रात तक शराब परोसी जा रही थी। तेलीबांधा पुलिस ने शिकायत के बाद छापा मारकर पार्टी बंद करवाई। उसके बाद से तेलीबांधा पुलिस और आबकारी विभाग ने अलग-अलग जांच कर रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी थी। रिपोर्ट के आधार पर बार संचालक को नोटिस भी जारी की गई, लेकिन कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
रसूखदारों के बार में कार्रवाई नहीं :पब, बार या होटलों में देर रात तक आयोजित पार्टियों में शराब परोसने के मामले में आबकारी विभाग अब तक एक भी कड़ी कार्रवाई नहीं कर पाया है। हालांकि अब तक बड़े होटलों और बार में नियम तोड़ने के मामले सामने आ चुके हैं। शंकर नगर होटल में सामाजिक कार्यक्रम के बहाने शराब परोसने प्रकरण सामने आया था। इसके अलावा बड़े शॉपिंग मॉल में आधी रात तक बार खोलने की भी पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद किसी भी मामले में सख्त कदम नहीं उठाया गया। राजधानी में लगभग 70 बार हैं। इनमें से लगभग आधे राज्य के बड़े शराब ठेकेदार दूसरे नामों से चला रहे हैं।
गड़बड़ी रोकने का फंडा
आबकारी लाइसेंस जिसके नाम से जारी किया जाता है, उसी के नाम की बैंक गारंटी अनिवार्य होती है। इसके पीछे यह मकसद रहता है कि लाइसेंस की शर्तें पूरी न करने पर बैंक गारंटी जब्त कर ली जाती है। लाइसेंस किसी का और बैंक गारंटी किसी की होने से बैंक गारंटी जब्त करने में कई तरह की तकनीकी दिक्कत आ सकती है। इसी वजह से अफसर हैरान हैं।
तंत्रा बार की ओर दे दिए गए जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर उसके लाइसेंस की जांच की गई। जांच के दौरान ही पता चला कि बार का लाइसेंस जिसके नाम से जारी हुआ है और बैंक गारंटी जिसके नाम से आई है वो दोनों अलग-अलग नाम है। इसकी जांच शुरू कर दी गई है। पूरी जांच होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। आशीष श्रीवास्तव, सहायक आबकारी उपायुक्त