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सड्ढू के मकानों को डुबाने पर आमादा हैं अफसर

9 वर्ष पहले
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रायपुर. सड्ढू की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी के सैकड़ों मकानों को इस साल भी बारिश में डुबाने का पक्का इंतजाम अफसरों ने कर दिया है। पिछले साल कॉलोनी वासियों के उग्र आंदोलन के बाद हाउसिंग बोर्ड ने दावा किया था कि अगली बारिश के पहले सारी समस्या हल कर दी जाएगी।
ऐसा नहीं होने पर लोगों को मकान का पैसा लौटाने या वैकल्पिक मकान देने जैसे वादे भी किए गए थे। वादों से आगे अफसरों ने कुछ नहीं किया। समस्या के स्थायी समाधान के लिए कई विभागों के एक्सपर्ट्स को मिलाकर टास्क फोर्स भी बनी।
पर टास्क फोर्स की चार महीने पहले आई रिपोर्ट की याद भी बोर्ड को तब आई, जब प्रभावित लोगों ने इसकी कॉपी लेकर बोर्ड दफ्तरों के चक्कर लगाने शुरू किए। बारिश के पानी को नियंत्रित करने छोकरा नाला और आमासिवनी नाले को ठीक करने का सुझाव एक्सपर्ट्स ने दिया है। पर इन सुझावों पर अमल तक शुरू नहीं हो पाया है।
इरीगेशन के विशेषज्ञों का भी मत है कि तीन से चार महीने के अंदर इन दोनों नालों को तैयार करना काफी मुश्किल होगा।
पिछले साल घरों में पानी भरने से मचे बवाल के बाद हाउसिंग बोर्ड के कमिश्नर ने कलेक्टर की अध्यक्षता में इरीगेशन, रेवेन्यू व हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मिलाकर एक टास्क फोर्स बनाई थी।
इसे बाढ़ नियंत्रण के उपाय ढूंढने कहा गया था। टीम ने दो माह के अंदर ही रिपोर्ट बना डाली और इसे नवंबर 2012 को सभी संबंधित अधिकारियों को सौंप भी दिया। तीन माह बीतने के बाद भी रिपोर्ट पर अमल शुरू नहीं हो पाया है। दोनों नालों के निर्माण और अन्य उपायों पर करीब तीन करोड़ रुपए खर्च होने वाले हैं। बताया जा रहा है कि हाउसिंग बोर्ड, जिला प्रशासन व एरिगेशन विभाग तीन करोड़ रुपए के खर्च को अपने सर पर लेने से बच रहे हैं। उनकी खींचतान में बाढ़ नियंत्रण से जुड़े टास्क फोर्स के सुझाव फाइलों में दफन हो गए। बचाव की दिशा में काम करने की जगह विभाग एक-दूसरे को चिट्ठियां लिख रहे हैं।
सात चिट्ठियों का कोई जवाब नहीं
हाउसिंग बोर्ड के ईई व सड्ढू प्रोजेक्ट के प्रभारी संदीप साहू ने कहा कि प्रोजेक्ट पर खर्च होने वाली राशि के लिए संशय बना हुआ है। नहर पर मूलत: इरिगेशन विभाग काम काम करता है। जिला प्रशासन से अब तक इस बारे में स्पष्ट दिशा निर्देश जारी नहीं हुए हैं। बोर्ड ने पिछले तीन माह में सात से ज्यादा पत्र प्रशासन को लिखे हैं। एक का भी जवाब नहीं मिला। बाढ़ नियंत्रण की योजना पर अगर हाउसिंग बोर्ड ने काम किया तो खर्च यहां के लोगों को भरना होगा।
समस्या के हल वादों में उलझे
सड्ढू में घरों में पानी घुसने से बचाने के लिए तात्कालिक उपाय के तौर पर राजवाड़ा सिटी के पास बने पुलिया को तुड़वाया गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने टास्क फोर्स बनाकर समस्या को जड़ से मिटाने का प्लान बनाया। सरकारी अफसरों के वादे सिर्फ कागजों में ही सिमट कर रह गए। कालोनी के लोगों ने बताया कि अफसरों ने पूरा एक वर्ष सर्वे व नाले के आसपास मार्किग करने में ही बीता दिया। बाढ़ नियंत्रण के लिए कोई भी ठोस पहल नहीं की गई।
सिर्फ 60 फीसदी पानी रोकेगा
सड्ढू हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी से लगे छोकरा नाले में ग्रेडियंट (ढाल) कम है। ऐसे में नाले से पानी काफी धीमे बहता है। नाले में कई स्थानों पर ढाल बनानी पड़ेगी।
नाले की चौड़ाई दोनों और से 5 से 15 फीट तक बढ़ाना होगा।
नाले पर बने स्टॉप डैम को तोड़ना होगा।
आमासिवनी नाले की चौड़ाई बढ़ाने व राजवाड़ा सिटी में बने नाले को बड़ा किया जाए।
इतना सब कुछ करने के बाद कॉलोनी में घुसने वाले 60 फीसदी पानी को ही रोका जा सकेगा। 40 प्रतिशत पानी कॉलोनी में आएगा ही।
पूरे प्रोजेक्ट पर तीन करोड़ रुपए खर्च होंगे
हाउसिंग बोर्ड के आठ घरों को तोड़ना होगा। घरों को तोड़ने के लिए तो टास्क फोर्स ने जोर नहीं दिया है, लेकिन बोर्ड इन मकानों का आंवटन रद्द कर इन्हें तुड़वा रहा है।