रायपुर। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कर्मचारी और अधिकारी शासन द्वारा लागू चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से परेशान हैं। 700 कर्मचारियों में से 550 को हर महीने 500 रुपए चिकित्सा भत्ता मिलता है। कर्मचारी मेडिकल बिल रीइम्बर्समेंट का लाभ चाहते हैं जबकि विवि प्रशासन ने 50 वर्ष पूरे होने पर स्वर्ण जयंती मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी शुरू की है। इसमें प्रावधान स्पष्ट नहीं होने की वजह से महीनेभर बाद भी कर्मचारी आवेदन जमा नहीं कर रहे हैं। आवेदन फॉर्म में विशेष नोट लगाकर दबाव बनाने की भी कोशिश की जा रही है।
डीबी स्टार टीम ने पड़ताल में पाया कि पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों की सुविधा योजनाओं को लेकर अपने ही नियम चला रहा है। विश्वविद्यालय स्थापना के 50 साल पूरे होने के अवसर पर स्वर्ण जयंती कल्याण योजना के तहत मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी शुरू की गई। 14 फरवरी 2014 को कार्यपरिषद् की बैठक में इसे पास किया गया। इसके बाद विश्वविद्यालय ने अधिसूचना जारी कर सभी कर्मचारियों से आवेदन मंगवाए। इसमें किए गए प्रावधान स्पष्ट नहीं होने की वजह से आवेदन नहीं आ रहे हैं।
दरअसल कर्मचारी शासन द्वारा लागू मेडिकल रीइम्बर्समेंट की मांग कर रहे हैं। फिलहाल यहां लगभग 700 कर्मचारियों में से 550 को चिकित्सा भत्ता मिलता है तो 150 को रीइम्बर्समेंट का फायदा। शुरुआत में हर महीने कर्मचारियों को 200 रुपए चिकित्सा भत्ता मिलता था। महंगाई बढ़ने पर कर्मचारियों ने भत्ता बढ़ाने की मांग की। इसके लिए राज्य शासन को भी लिखा गया। इस पर 8 अगस्त 2012 को चिकित्सा भत्ता बढ़ाने का आदेश जारी हुआ। साथ ही कर्मचारियों को भत्ता या रीइम्बर्समेंट की सुविधा में से एक को चुनने का विकल्प दिया गया लेकिन विवि प्रशासन ने इस आदेश का पालन करने से इनकार कर दिया। कर्मचारियों को विकल्प नहीं चुनने दिया गया। अब नई पॉलिसी को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।
कर्मचारी कह रहे हैं कि नई पॉलिसी में कुछ भी स्पष्ट नहीं है। परिवार वालों को मेडिक्लेम सुविधा का लाभ मिलेगा या नहीं, इसमें जिक्र नहीं है। वहीं कर्मचारी किन अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं, इसका भी उल्लेख नहीं है। पॉलिसी लेने पर भत्ता भी नहीं मिलेगा। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें शासन द्वारा लागू मेडिकल बिल रीइम्बर्समेंट का लाभ दिया जाए। उधर कुलसचिव का कहना है कि नई पॉलिसी कर्मचारियों के हित में शुरू की गई है। सबकुछ स्पष्ट है फिर भी आवेदन नहीं आ रहे हैं।
चिकित्सा भत्ता के एवज में नई योजना
नई पॉलिसी के लिए आवेदन मंगवाने विवि प्रशासन ने आवेदन पत्र पर विशेष नोट लिखवाया है। इसमें चिकित्सा भत्ता बंद किए जाने की बात कही गई है। आवेदन में लिखा है कि चिकित्सा भत्ता के एवज में कर्मचारी कल्याण योजना के तहत चिकित्सा बीमा शुरू किया जा रहा है। अगर कर्मचारी बीमा के लिए सहमति नहीं देते हैं तो उनको गंभीर बीमारी की स्थिति में किसी प्रकार के चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति करना संभव नहीं होगा। इससे कर्मचारियों में नाराजगी है।
पॉलिसी क्लीयर नहीं होने का आरोप
विश्वविद्यालय के कर्मचारियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने स्वर्ण जयंती वर्ष में कर्मचारी कल्याण योजना के तहत जो मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी शुरू की है, वह स्पष्ट नहीं है। कर्मचारियों ने इस नई सुविधा को लेने से मना कर दिया है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन नई पॉलिसी की बजाय पुरानी चिकित्सा सुविधा के विकल्प को चुनने की सुविधा दे। नई पॉलिसी के आदेश को एक महीने से ज्यादा हो गया लेकिन कर्मचारियों को सुविधाओं की कोई जानकारी नहीं है। उनका यह भी कहना है कि पूछने पर भी जानकारी नहीं दी जाती।
दो तरह की सुविधाएं दी गई हैं
शासकीय कर्मचारियों को इलाज करवाने के लिए दो तरह की सुविधाएं दी जाती है। पहले में कर्मचारियों को हर महीने निर्धारित भत्ता दिया जाता है तो दूसरे में चिकित्सा प्रतिपूर्ति सुविधा। प्रतिपूर्ति में कर्मचारियों को बीमार पड़ने पर इलाज की सुविधा दी जाती है। वे सरकारी अस्पतालों या शासन द्वारा अधिकृत प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवा सकते हैं। इसके बाद इलाज पर खर्च की गई राशि के बिल संबंधित विभाग में जमा करवाया जाता है। बिल की जांच के बाद पैसा वापस मिल जाता है।
सभी ने लेने से मना कर दिया है
विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्वर्ण जयंती के अवसर पर मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी शुरू की है। इसके प्रावधान पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हैं। इस वजह से कर्मचारियों ने आवेदन नहीं किया। उस बीमा पॉलिसी को लेने से सभी ने मना कर दिया है। विश्वविद्यालय को इस पॉलिसी के बजाय शासन द्वारा जारी किए गए प्रतिपूर्ति के विकल्प आदेश काे लागू करना चाहिए।
श्रवण सिंह ठाकुर, अध्यक्ष, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ, रायपुर