रायपुर. किवार को सफाई सिस्टम से बाहर करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए निगम शहर में किवार की टक्कर का सफाई नेटवर्क खड़ा करने जा रहा है। निगम के पास एक हजार सफाई कर्मचारी हैं। किवार को सफाई का ठेका देने के बाद से ज्यादातर सफाई कर्मी अभी सरकारी भवनों में चौकीदार या माली का काम कर रहे हैं। उन्हें वापस बुलाकर उनके जरिये ठप सफाई व्यवस्था सुधारी जाएगी।
निगम ने इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। 300 सफाई कर्मचारियों की सेंट्रल गैंग बनाकर सफाई का प्रस्ताव तैयार किया गया है। सफाई कर्मचारियों की इस सेंट्रल गैंग को जोनवार बांटा जाएगा। जोन अध्यक्ष सीधे इस गैंग को आपरेट करेंगे। सफाई का गैंग किस तरह से काम करेगी यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन ऐसे संकेत हैं कि जोन अध्यक्ष व कमिश्नर से गंदगी की शिकायत होने पर वे सीधे टीम भेजकर सफाई करवाएंगे। इस हफ्ते गैंग के कामकाज के प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगा दी जाएगी। सफाई विभाग के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा ने बताया कि शहर में किवार कंपनी ने सालिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को फेल कर दिया है। किवार को ठेका देने के पहले जिस तरह से शहर में सफाई हो रही थी, उसी सिस्टम को दोबारा अपनाया जाएगा। किवार कंपनी के कर्मचारी वार्ड में जितने भी कर्मी भेजेंगे, उसके अतिरिक्त जरूरत पड़ने या शिकायत अपने पर नियमित कर्मचारी भेजकर सफाई कराई जाएगी। यह किवार के समानांतर सिस्टम होगा।
800 नियमित कर्मचारी दोबारा लगाए जाएंगे
किवार कंपनी ने 20 जून 2013 को काम शुरु किया। उसके बाद कुछ दिनों तक नगर निगम के नियमित कर्मचारियों को किवार कंपनी ने अपने सफाई सिस्टम में बतौर सहयोगी उपयोग किया। उसके बाद कर्मचारी खाली हो गए। उनकी ड्यूटी निगम के बड़े भवनों शहीद स्मारक, व्हाइट हाऊस व सामुदायिक भवनों के रखरखाव में लगा दी गई। इन सभी कर्मचारियों की लिस्ट बनाई जा रही है।
सब कह रहे हैं गंदगी का ढेर हो रहा है शहर
शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष विकास उपाध्याय ने बताया कि सालिड वेस्ट मैनजेमेंट सिस्टम का सबसे अहम हिस्सा डोर टू डोर कलेक्शन है। किवार कंपनी इस सिस्टम को पूरे शहर में लागू ही नहीं कर सकी। यही वजह है कि कचरा मुक्कड़ पर रखे डस्टबिन और नालियों के साथ ही सड़क पर नजर आ रहा है। घर-घर से कचरा कलेक्ट करने में किवार फेल साबित हो गई है
रिटायर स्वास्थ्य अधिकारी को संविदा
नगर निगम के रिटायर्ड स्वास्थ्य अधिकारी डा. अमृत चोपड़ा को संविदा नियुक्ति देकर बुलाया गया है। उन्हें शहर के सफाई मैनेजमेंट का खासा अनुभव है। वे करीब 10 साल स्वास्थ्य अधिकारी के तौर पर शहर के सफाई सिस्टम की कमान संभाल चुके हैं। ठप सफाई व्यवस्था को तत्काल पटरी पर लाने के लिए ही उनकी मदद ली जा रही है।
गंदगी को लेकर अब नहीं जागे तो कब जागेंगे
उत्तर विधायक श्रीचंद सुंदरानी का कहना है कि शहर संक्रमण की तरफ बढ़ रहा है। मच्छर और मक्खियां लगातार बढ़ रही हैं। सफाई नहीं की गई तो बीमारी फैलने लगेगी। लोग बीमार होने लगेंगे। असमय लोगों की मौत होने लगेगी। दलगत राजनीति से उठकर काम करना होगा। सफाई के मुद्दे पर अगर अब नही जागे तो कब जागेंगे।
सफाई पर राजनीति नहीं करने का फैसला
गंदगी से परेशान शहर को राहत पहुंचाने के लिए नगर निगम में राजनीति नहीं करने का फैसला लिया गया है। महापौर किरणमयी नायक और सभापति संजय श्रीवास्तव इस पर सहमत हैं। महापौर और सभापति की ओर से ही यह प्रस्ताव दिया गया है कि कोई न कोई ऐसा सिस्टम खड़ा करना चाहिए जिससे कि शहर को राहत मिले। वे इससे सहमत हो गए। ज्यादातर पार्षद भी राजी हैं। स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष ने बताया कि इस प्रस्ताव को पुख्ता बनाने के लिए एमआईसी की मुहर लगाई जाएगी। इसके लिए विशेष एमआईसी बुलाई जाएगी।
सफाई के मुद्दे पर अब तक हुआ है बहुत कुछ
एमआईसी में किवार का ठेका रद्द करने का प्रस्ताव लाया जा चुका है।
सीएम हाउस में खुद मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ले चुके हैं बैठक।
नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल ठेका टर्मिनेट करने का निर्देश दे चुके हैं।
गंदगी की शिकायत पर अब तक कंपनी पर 70 लाख का हो चुका है जुर्माना।
10 साल का है किवार को सफाई का ठेका।
किवार के कर्मचारी अलग-अलग छह बार वेतन न मिलने के कारण कर चुके हैं हड़ताल।