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पिकनिक स्पॉट नहीं बन पाया तांदुला

9 वर्ष पहले
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बालोद। बालोद जिले का सबसे बड़ा जलाशय हैं तांदुला जल संसाधन विभाग जीर्णोद्धार के लिए योजना तो बनाता रहा है, लेकिन इस प्राकृतिक सौंदर्य स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने कोई पहल नहीं कर पाया। बारिश के दिनों में यहां एकत्र पानी का नजारा देखने सैकड़ों सैलनियां पहुंचते हैं। लोग सपरिवार पिकनिक मनाने आते हैं। पास में ही कालेज व आईटीआई है। वहां के स्टूडेंट्स के लिए भी तांदुला पर्यटन एवं प्रकृति के अध्ययन के लिए अच्छा स्पॉट है। पेयजल, बैठक, छांव व बिजली नहीं तांदुला जलाशय क्षेत्र में मूलभूत सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं है। इससे यहां घूमने आने वाले लोगों को असुविधा झेलनी पड़ती है। यहां पहुंचने के लिए कच्ची सड़क व पगडंडी का ही सहारा ही है। पर्यटकों की मांग है कि दल्ली रोड से डेम तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क चेयर की सुविधा लेनी चाहिए। पेड़ों के नीचे चबूतरा निर्माण करना चाहिए। प्रकाश की भी व्यवस्था होनी चाहिए। इससे लोग जलाशय का नजारा सिर्फ दिन रहने तक देख सकते हैं। पर्यटक वासु गजपाल ने कहा कि बालोद जिला सहित दुर्ग जिला और भिलाई इस्पात संयंत्र को पानी देने वाला जीवनदायिनी तांदुला जलाशय को मरम्मत की जरूरत है। पर्यटक राहुल सोनवानी का कहना है कि तांदुला जलाशय से हजारों एकड़ खेत में पानी सिंचाई करने वाले इस जलाशय के पीचिंग उखड़ गए हैं। घनी झाड़ियां उग आई है। आम जनता के लिए बनाए गए कच्चे रास्तों में बारिश से पानी भर गया है। यह जलाशय हर वर्ष करोड़ों रुपए की आय शासन को देता है। फिर भी जल संसाधन विभाग द्वारा इस जलाशय की वर्षो से अनदेखी की जा रही है। जिससे तांदुला जलाशय का अस्तित्व खतरे में पड़ता दिखाई दे रहा है। मनोज साहू के अनुसार रात में यहां जाना मुश्किल होता है। जलाशय के आसपास बालोद के र्जुीपारा, सिंचाई कालोनी, देउरतराई गांव है। इसके बावजूद जलाशय तट पर हमेशा विरानी छाई रहती है। सुविधाओं की कमी के कारण लोग प्रकृति की इस अनुपम देन का लाभ नहीं उठा पाते हैं। गर्मी के दिनों में यहां हमेशा सन्नाटा पसरा रहता है। उपवन बनाने की योजना विगत वर्ष मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने बालोद प्रवास के दौरान तांदुला के आसपास हरियाली विकसित करने बालोद उपवन निर्माण कर पर्यटकों के लिए सुविधा प्रदान करने के लिए निर्देश दिए थे। नगर पालिका ने बालोद उपवन निर्माण की योजना भी बनाई थी, लेकिन आज तक योजना को क्रियान्वित नहीं किया जा सका है। प्रस्तावित योजना में हरे-भरे पौधे लगाने के साथ मोटर निर्माण परिक्रमा पथ निर्माण, पर्यटकों के लिए बैठक, पेयजल आदि की सुविधा शामिल हैं। नागरिकों को उम्मीद है कि शायद बालोद उपवन निर्माण में ही तांदुला की वीरानी दूर होगी और जिले में तांदुला सबसे अच्छे पर्यटन स्थल में शुमार होगा।

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