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नान में 28 जगह छापे, दो करोड़ से ज्यादा मिला कैश

6 वर्ष पहले
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रायपुर. नागरिक आपूर्ति निगम (नान) में गुरुवार को एंटी कंरप्शन ब्यूरो और ईओडब्लू की टीम ने छापे मारे। तकरीबन दो करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि बरामद की। रायपुर स्थित मुख्यालय के अलावा 12 शहरों के दफ्तरों व अधिकारियों- कर्मचारियों के घरों में रेड की गई। नान मुख्यालय के मैनेजर के केबिन से एक करोड़ 59 लाख जब्त मिले। एमडी नान के निजी सचिव से 20 लाख रुपए कैश जब्त किया गया।
बालोद के अफसर के यहां छापा मारकर 30 लाख रुपए नगद पकड़े गए। नान की मुहर लगने के बाद सरकार राज्य में गरीबों को चावल बांटती है। जांच एजेंसियों को शिकायत मिली थी कि घटिया क्वालिटी के चावल में ओके का ठप्पा लगाने लगाकर नान के अफसर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार कर रहे थे।
एंटी करप्शन ब्यूरो और ईओडब्लू की टीम ने एक साथ छापे मारकर इस रैकेट का पर्दाफाश किया। जांच में पता चला कि अफसरों को राइस मिलर्स तथा गेहूं, चना और शक्कर सप्लायरों से घूस के रूप में तगड़ी रकम देते हैं। यह पैसा हर महीने मुख्यालय में जमा होकर अफसरों में बंटता था।
छापे के दौरान मिली रकम के बारे में कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार के पैसे थे, जो बंटने से पहले ही पकड़े गए। हालांकि एडीजी मुकेश गुप्ता ने दावा किया कि कई गुना रकम बंट चुकी है।
एडीजी गुप्ता ने गुरुवार की शाम छापे का खुलासा किया। अफसरों ने बताया कि नान का मैनेजर एसएस भट्ट इस खेल का सबसे माहिर खिलाड़ी है।
नान एमडी के पीए गिरीश वर्मा से 20 लाख मिलना भी चौंकाने वाला है। अफसरों ने साफ किया कि नान में किसी भी तरह के कैश का कोई काम नहीं होता। ऐसी दशा में पूरा पैसा अवैध है। अफसरों से पूछताछ की जा रही है कि पैसा कहां से आया और किसका है? अफसरों ने साफ संकेत दिए है कि जिन अफसरों तक पैसे पहुंचने के सबूत मिलेंगे उनके खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई की जाएगी।
फाइलों में नोटों के बंडल
नान मैनेजर भट्ट ने नोटों के बंडल फाइलों में छिपाकर रखे थे। उसके दराज में कुछ बंडल थे। ज्यादातर पैसे उसने फाइलों में छिपाकर रखे थे। फाइलों को इस तरह कवर्ड केबिनेट में रखा गया था कि किसी को पता न चल सके। गिरीश शर्मा के बारे में बताया जा रहा है कि उसने एक थैले में पैसे रखे थे। वह पैसे लेकर ऑफिस से बाहर निकलने वाला था, उसी समय छापा पड़ा और अपनी कुर्सी से हिलने तक का मौका नहीं मिला।
पूरा स्टाफ गया छापे में
नान के दफ्तरों में छापे के लिए ईओडब्लू और एंटी करप्शन ब्यूरो के दफ्तरों में चाय पानी पिलाने की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों तक की मदद ली गई। दरअसल इतने बड़े छापे के लिए स्टाफ नहीं था। ऐसे हालात में कुछ पुलिस की मदद ली गई और बाकी कमी इस तरह पूरी की गई।
खोजबीन चली 15 दिन
नान में भ्रष्टाचार की भनक लगने के बाद ईओडब्लू और एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम पिछले 15 दिन से तहकीकात में लगी थी। इसी दौरान पता चला कि 10 तारीख तक पैसे इकट्ठे होते हैं, फिर बांटे जाते हैं। इस इनपुट के बाद छापे के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गईं। ऑपरेशन गुप्त रखा गया, केवल कुछ अफसरों को ही पूरी जानकारी थी। सरगुजा, रायगढ़, जगदलपुर और बिलासपुर में टीमों ने तीन दिन पहले ही कैंप कर लिया था।
किससे क्या मिला
>मैनेजन नान, शिव शंकर भट्ट से एक करोड़ 59 लाख
>एमडी नान का स्टेनो गिरीश शर्मा 20 लाख।
>कंप्यूटर ऑपरेटर चितराम यादव घर से मिले 36 लाख।
>जिला अधिकारी सुधीर भोले सवा 7 लाख।
>बालोद वेयर हाउस कार्पोरेशन के डीके शर्मा से 30 लाख।
28 जगह और 12 शहरों में छापे : अंबिकापुर, सूरजपुर, रायगढ़, बिलासपुर, रायपुर, महासमुंद बालोद, दुर्ग, राजनांदगांव, कांकेर, धमतरी और जगदलपुर।
बातें जो चर्चा में हैं
>लगातार शिकायतें हुईं कि सरकारी तौर पर बीपीएल को बांटे जाने वाले गेहूं, चावल, चना और शक्कर में कथित तौर पर प्रति किलो कमीशन प्रचलित है।
>पिछले महीने 2 लाख 40 हजार टन गेहूं नान ने टेंडर करके लिया। शिकायत हुई कि हर किलो पर 1.25 से 1.30 रुपए सप्लायर को देने पड़े।
>चावल कारोबारियों में चर्चा है कि वर्षों से कस्टम मिलिंग का चावल नान में 20 रु. प्रति क्विंटल का कथित कमीशन देने के बाद ही जमा हो पाता है।
>शिकायतों की जांच के आधार पर अनुमान लगाया जा रहा है कि नान में हर माह एक से डेढ़ करोड़ रुपए तक कथित तौर पर कमीशनबाजी से जमा हो रहे हैं।
- एक पूर्व एमडी के बारे में शिकायत है कि अपने कार्यकाल के दौरान चावल का कथित कमीशन नहीं मिलने पर वे इसे लेना का दबाव बना रहे हैं।