रायपुर. मेडिकल कालेज के अधीन अंबेडकर अस्पताल के सर्जरी विभाग में 12 कंसल्टेंट सर्जन हैं, लेकिन गिनती के ऑपरेशन हो रहे हैं। सर्जरी विभाग में जुलाई में 80 और अगस्त में 87 आपरेशन हुए हैं। इस तरह, दर्जनभर सर्जन मिलकर रोजाना अधिकतम तीन आपरेशन ही कर रहे हैं। इनमें भी माइनर (छोटे) आपरेशन ज्यादा है। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने इतने बड़े स्टाफ के बावजूद इतने कम आपरेशन पर सवाल उठा दिए हैं और सर्जरी में पीजी की सीट बढ़ाने से मना कर दिया है। एमसीआई ने यह जिक्र भी किया है कि मापदंडों के हिसाब से इतनी स्ट्रेंथ में हर माह 150 से 200 आपरेशन होना ही चाहिए।
मेडिकल कालेज रायपुर ने सर्जरी में पीजी की सीटें बढ़ाकर 12 करने की मांग की थी। एमसीआई ने इस प्रस्ताव के आधार पर मई में निरीक्षण किया था। निरीक्षण की हाल में आई रिपोर्ट ने खलबली मचा दी है। मामला पीजी सीटें बढ़ाने का नहीं, बल्कि एमसीआई ने सीधे सर्जरी विभाग की कार्यशैली पर ही सवालिया निशान लगा दिए हैं। जबकि अंबेडकर अस्पताल छत्तीसगढ़ ही नहीं, सीमावर्ती अन्य प्रदेशों के जिलों के लिए भी सबसे बड़ा अस्पताल है। मेडिकल कालेज के ही एक आला अफसर ने इस रिपोर्ट के बाद यहां तक कह दिया है कि आधुनिक मशीनें और तगड़े इंतजाम के बावजूद मेडिकल कालेज के अंबेडकर अस्पताल में उसी स्तर के आपरेशन हो रहे हैं, जैसे दुर्ग के जिला अस्पताल में हो जाते हैं।
बड़े स्ट्रेंथ, हलका काम
अंबेडकर अस्पताल का जनरल सर्जरी विभाग में एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर के अलावा नौ असिस्टेंट प्रोफेसर काम कर रहे हैं। जहां तक अंबेडकर अस्पताल के हर विभाग में हुए आपरेशनों की संख्या का सवाल है, अगस्त में कुल 701 ऑपरेशन हुए हैं। इनमें 453 मेजर व 248 माइनर ऑपरेशन हैं। इनमें से जनरल सर्जरी में महज 87 ऑपरेशन हुए, जबकि इस विभाग का काम ही आपरेशन करना है। इनमें भी, मेजर (बड़े) ऑपरेशन की संख्या महज 20 से 30 है। बाकी माइनर ऑपरेशन है। जुलाई में 685 ऑपरेशन हुए। इसमें जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने महज 80 ऑपरेशन किए।
एक डाक्टर, सात सर्जरी
जुलाई व अगस्त के ऑपरेशन की संख्या को देखें तो जनरल सर्जरी विभाग का एक डॉक्टर महीने में महज सात ऑपरेशन कर रहा है। जुलाई में 80 व अगस्त में 87 ऑपरेशन का औसत इतना ही आता है। इस विभाग की ओपीडी में प्रतिदिन 45 से 50 मरीज आ रहे हैं। हालांकि विभाग के डाक्टरों का कहना है कि सर्जरी के लायक जितने केसेज होते हैं, सभी का आपरेशन कर देते हैं। हो सकता है कि केस ही कम आ रहे हैं। लेकिन कुछ डॉक्टरों ने भास्कर को बताया कि कई मरीज ऐसे हैं, जिनकी सारी जांच अस्पताल में हो जाती है, इसके बाद इन्हें निजी अस्पतालों में जाने की सलाह दे दी जाती है। कुछ सर्जन मरीजों को ढूंढ़ते रहते हैं कि आखिर वह ऑपरेशन से पहले कहां चला गया? ऐसी शिकायत एचओडी डॉ. पंकज लूका के पास भी पहुंची हैं।
सिर्फ हार्निया व पाइल्स
जनरल सर्जरी विभाग में ज्यादातर हार्निया, गाल ब्लेडर, पाइल्स, पथरी व लेप्रोटॉमी यानी पेट का ऑपरेशन हो रहा है। बड़े ऑपरेशन जैसे आमाशय का कैंसर, अपेंडिक्स, यूरेथोप्लास्टी, थायराइड व फेफड़ा का ऑपरेशन नहीं के बराबर हो रहा है। जानकारों के अनुसार जो ऑपरेशन बड़े डॉक्टर कर रहे हैं, यह ऑपरेशन रेसीडेंट डॉक्टर कर सकते हैं अथवा कर रहे हैं।
एमसीआई के मापदंड
एमसीआई के अनुसार जनरल सर्जरी विभाग के सेटअप को देखते हुए 150 से 200 ऑपरेशन हर महीने होना चाहिए। जबकि यहां आधे से भी कम ऑपरेशन हो रहे हैं।
सीधी बात : डॉ. एके चंद्राकर, डीन मेडिकल कॉलेज : एमसीआई ने की तो है आपत्ति
- जनरल सर्जरी विभाग में आखिर गिनती के ऑपरेशन क्यों ?
बात सही है। एमसीआई ने भी इस पर आपत्ति कर दी है।
- इस विभाग में कंसल्टेंट व रेसीडेंट ज्यादा हैं। फिर भी ऐसा?
सर्जरी एचओडी ने शिकायत तो की है कि मरीज कम आ रहे हैं।
- आखिर कम मरीज आने के कारण क्या हैं?
एचओडी के अनुसार कैंसर के मरीज कैंसर विभाग चले जाते हैं।
- कुछ मरीजों को क्लीनिक भेजने की बात भी की जा रही है?
इसकी जानकारी नहीं है। इस संबंध में एचओडी से पूछा जाएगा।