रायपुर. उच्च शिक्षा विभाग के नए नियम ने प्रदेश के पीएचडी डिग्रीधारी सैकड़ों छात्रों को असिस्टेंट प्रोफेसर बनने से वंचित कर दिया है। सरकारी कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए निकाले गए 966 पदों के लिए नेट, सेट या स्लेट की अनिवार्यता लागू कर दी गई है। सिर्फ उन्हें ही इस नियम से छूट दी गई है, जिन्होंने यूजीसी के रेगुलेशन 2009 के अनुसार पीएचडी की। ऐसे में इससे पहले पीएचडी कर चुके सैकड़ों स्टूडेंट्स असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए अपात्र हो जाएंगे।
ऐसे छात्र अब कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। छह साल बाद शासकीय कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसके लिए पीएससी की ओर से आवेदन मंगाए गए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 9 अक्टूबर 2014 है। लेकिन शुरुआत के साथ ही यह भर्ती प्रक्रिया विवादों में पड़ गई है।
अंतिम बार 2008 में सहायक प्राध्यापकों की भर्ती हुई थी। उस समय नेट (राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा), सेट (राज्य पात्रता परीक्षा)और स्लेट (राज्य स्तरीय पात्रता परीक्षा)की अनिवार्यता नहीं थी। लेकिन इस बार जो आवेदन मंगाए गए हैं, उनके शर्तों के अनुसार यूजीसी के रेगुलेशन 2009 के अनुसार पीएचडी करने वाले को ही नेट, सेट, स्लेट की अनिवार्यता से छूट होगी। उल्लेखनीय है कि अब भी पीएचडी के लिए यही रेगुलेशन लागू है। इसमें एंट्रेस टेस्ट के साथ साक्षात्कार क्लीयर करने के बाद ही पीएचडी में दाखिला होता है। सैकड़ों पीएचडी डिग्रीधारी छात्रों ने इससे पहले पीएचडी की है, लेकिन उनमें से अधिकतर छात्रों के पास नेट, सेट या स्लेट की पात्रता नहीं है। ऐसे में वे अपात्र हो जाएंगे।
सहायक प्राध्यापकों की पात्रता के संबंध में जो भी नियम हैं वे यूजीसी के मापदंडों के अनुसार हैं।
- बीएल अग्रवाल, उच्च शिक्षा सचिव