रायपुर. प्रदेश में पीलिया, डायरिया और डेंगू से हो रही मौतों को लेकर प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने बुधवार को स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों से लेकर सीएमओ और डॉक्टरों को जमकर फटकारा। उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि मौतें नहीं रूकी तो वेतन रोक दिया जाएगा। सर्जरी नहीं कर सकते तो सर्जनों को मिलने वाला इंसेंटिव बंद कर दिया जाएगा। तबादला भी कर दिया जाएगा। प्रमुख सचिव जब अफसरों की खबर ले रहे थे तो विभाग के मंत्री अमर अग्रवाल भी मौजूद थे। बैठक सुबह साढ़े 10 बजे से शाम को साढ़े 6 बजे तक चली। इसमें उन्होंने और संचालक ने पूरे विभाग का पोस्टमार्टम कर डाला। मुख्य मुद्दा था पीलिया, डायरिया, डेंगू और मलेरिया से हो रही मौतें। इसके साथ ही विभाग को शिकायतें मिल रही थी कि कई अस्पतालों में गायनोकोलॉजिस्ट सर्जन समेत अन्य सुविधाएं होने के बावजूद सर्जरी नहीं हो रही। शेष|पेज 7
कुछ सीएमओ के यह कहने पर कि सिजेरियन केस नहीं आ रहे, डॉ. शुक्ला भड़क गए। उन्होंने कहा, "यह कैसे हो सकता है। जो सिजेरियन नहीं कर सकते, उन्हें सर्दी -खांसी का इलाज करने भेज दिया जाएगा।' शुक्ला ने सीएमओ से पूछा कि पीलिया-डायरिया किसको होता है? सीएमओ ने कहा कि सभी को। इस पर प्रमुख सचिव ने फिर पूछा कि तो सिर्फ गरीब ही क्यों मरता है? आपने कभी जानने की कोशिश की? कभी स्पाट पर गए? उन्हें कैसा खाना-पानी नसीब हो रहा है पता किया? अब आपको दफ्तरों से निकलकर ऐसे स्थानों पर जाना ही पड़ेगा। जिम्मेदारी तो तय करनी होगी। आपको बता दें कि शुक्ला खुद डॉक्टर हैं।
इन बीमारियों के लिए 15 दिनों में प्रभावित इलाकों - गांवों में जाकर सर्वे करें। वहां रहने वाले कुपोषित बच्चों, गर्भवती माताओं, लोगों को चिह्नांकित करें। एक्शन प्लान बनाएं। अगर कुपोषण और खाने की कमी है तो वो भी उल्लेख करें, ताकि शासन से बात कर संभावित इलाकों में दाल-भात केंद्र खोले जा सकें। डायरिया की बात है तो पीएचई विभाग से भी समन्वय बनाना होगा। कुछ सवालों का जवाब न देने पर प्रमुख सचिव ने उन्हें बैठक में तैयारी से आने की हिदायत भी दी। उन्होंने जिलों में 75 में से 25 ब्लड बैंक ही शुरू होने पर नाराजगी जताई और बाकी एक हफ्ते में शुरू करने की मोहलत दी। यह भी कहा कि ब्लड बैंक कागजों पर नहीं चलने चाहिए।
इनकी मौजूदगी में हुई क्लास - स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल, संचालक डॉ. कमलप्रीत सिंह, मिशन डायरेक्टर डॉ. अयाज फकीर भाई तंबोली, संभागों के ज्वाइंट डायरेक्टर, जिलों के सीएमओ और प्रमुख अधिकारी व डाक्टर।
शुक्ला के सख्त बोल
- डायरिया-पीलिया से गरीब ही क्यों मर रहा? कभी स्पॉट पर जाकर जानने की कोशिश की?
- इन बीमारियों को नहीं रोक सकते तो कम से कम इनके मरीजों को तो मरने से बचा लो।
- गायनेकोलाजिस्ट सर्जन सर्जरी नहीं करना चाहते तो लिखकर दे दें। आप को वहां तैनात कर दिया जाएगा, जहां सिर्फ सर्दी-खांसी का ही इलाज करना पड़े। सर्जन का इंसेंटिव नहीं मिलेगा।
सर्जरी नहीं कर पा रहे कई सर्जन, कांप रहे पैर : सीएमओ
बेमेतरा, रायपुर सहित कई जिलों के सीएमओ ने बताया कि सर्जन डॉक्टर सर्जरी नहीं कर पा रहे। वे कहते हैं कि ऑपरेशन करने के लिए उनमें आत्मविश्वास नहीं है। कुछ डॉक्टर कहते हैं कि उनके पैर कांपते हैं, खड़े नहीं रह सकते दर्द होता है। उम्र हो गई है। कुछ कहते हैं कि बीमार हैं। पता चला कि एक महिला सर्जन खुद में कांफिडेंस पैदा करने के लिए ट्रेनिंग के नाम पर दो महीने से होम टाउन में छुट्टी मना रही हैं। पीएस ने सीएमओ से पूछा कि कितने दिनों तक चलेगी इस डॉक्टर की ट्रेनिंग? मालूम हो कि डॉक्टरों को शासन की ओर से पहले ही ट्रेंड किया जा चुका है।