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बेतुके फैसले पर बैकफुट में सरकार, हटाई बस्तर में मोबाइल की अनिवार्यता

7 वर्ष पहले
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रायपुर। धान खरीदी के लिए किसानों के पंजीयन में आ रही समस्याओं को देखते हुए राज्य सरकार ने इसमें कुछ ढील दी है। धान बेचने वाले किसानों को मोबाइल की अनिवार्यता कुछ जिलों में समाप्त कर दी गई है। फिलहाल बस्तर संभाग के सात जिलों में किसानों का पंजीयन बिना मोबाइल नंबर के हो सकेगा। राजनांदगांव जिले के मोहला ब्लाक में भी इसकी अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

धान खरीदी में फर्जीवाड़ा रोकने और खरीदी प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए इस बार किसानों का पंजीयन कराया जा रहा है। इसके लिए बनाए गए साफ्टवेयर में किसान का मोबाइल नंबर दर्ज करना अनिवार्य है। इसके बिना किसानों का पंजीयन नहीं हो पा रहा है। दैनिक भास्कर ने 10 सितंबर के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।दरअसल साफ्टवेयर एक मोबाइल नंबर पर एक ही किसान के नाम का पंजीयन करता है। एक मोबाइल नंबर से दो लोगों का नाम दर्ज नहीं किया जा सकता। इसके कारण भी दिक्कत आ रही है। हालांकि सरकार ने अभी फिलहाल धुर नक्सल प्रभावित और आदिवासी इलाके के लिए ही नियम शिथिल किया है।

खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल की अनिवार्यता के कारण किसानों का पंजीयन नहीं हो पा रहा था। कलेक्टरों ने इसकी अनिवार्यता को हटाने के भी आग्रह किया था। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए भी कुछ कलेक्टरों ने इस पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद खाद्य विभाग ने साफ्टवेयर में इसका बदलाव किया। इसे बस्तर संभाग के धान खरीदी केंद्रों में मौजूद सभी कंप्यूटरों में अपलोड किया जा रहा है। राजनांदगांव के कलेक्टर अशोक अग्रवाल ने बताया कि उनके जिले के मानपुर-मोहला में मोबाइल की कनेक्टिविटी है ही नहीं। वहां किसानों के पास मोबाइल नहीं है। इसलिए वहां मोबाइल नंबर की अनिवार्यता खत्म करने का अनुरोध किया गया था। खाद्य विभाग के अधिकारी अब साफ्टवेयर को अपडेट करेंगे।
दो सालों में हुई बंपर खरीदी
प्रदेश में 2007 में धान खरीदी प्रणाली का कंप्यूटराइजेशन किया गया था। इसके बाद से इसे लगातार सुधार किया गया। पिछले दो सालों में धान बंपर धान खरीदी हुई। अधिकारियों को अंदेशा है कि बड़ी मात्रा में ऐसे लोग भी धान बेच देते हैं, जो किसानी नहीं करते। पड़ोसी राज्यों से वे धान लाकर बेचते हैं या फिर कई जगह कागजों में खरीदी कर ली जाती है। इसे रोकने के लिए खाद्य विभाग ने फिर से नया साफ्टवेयर तैयार किया है। इसमें किसान के नाम पर दर्ज रकबा (जमीन) के अनुसार ही खरीदी होगी, सोसाइटी के प्रबंधक चाहकर भी तय सीमा से ज्यादा धान एक किसान से नहीं खरीद पाएंगे। इससे धान खरीदी में होने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश लगने की उम्मीद जताई जा रही है।