रायपुर। कांकेर के अंतागढ़ में उपचुनाव हो गया। मतदान दल लौट रहा था। पीवी 89 से बेठिया के लिए जा रहे थे। अचानक एक विस्फोट हुआ और गोलियां चलने लगीं। मतदान दल के लोग घबरा गए। साथ चल रहे बीएसएफ के जवान फौरन चिल्लाए- जो जहां है, वहीं लेट जाए। लगभग सब लेट गए और सबके साथ एक-एक जवान गोलियां चलाते हुए लेटा रहा। सब बेहद घबराए हुए थे। अचानक कुछ जवान हंसने-हंसाने लगे। गोलियां भी चल रही थी और चुटकुले भी। मतदान दल के लोगों की धड़कन तो तेज हो ही गई थी, लेकिन चुटकुलों से हंसी भी नहीं रोक पा रहे थे।
बस ऐसे ही फायरिंग के बीच हंसते-हंसाते दल को बचा ले आए बीएसएफ के जवान। उन्हें बिठाया और फिर चाय पिलाई।
मौत जब सिर पर खड़ी हो, तो अच्छे अच्छों की हालत खराब हो जाती है। अंतागढ़ उपचुनाव से लौटते वक्त मतदान दलों पर नक्सलियों का हमला हो गया। मतदान दल में पीठासीन अधिकारी जोगेंद्र प्रसाद फरदिया, सदस्य हरि केशव डडसेना, प्रदीप साहू, लेख राम ध्रुव और उलेश्वर प्रसाद थे। जोगेन्द्र बताते हैं कि सुबह 11.45 बजे एक विस्फोट हुआ। धूल का गुबार उठने लगा और तड़ातड़ गोलियां चलने लगी। जवानों ने चिल्लाया- नक्सली हमला है। जो जहां है, वहीं लेट जाओ। सबकी धड़कने बढ़ गई। लगा, पता नहीं बचेंगे या नहीं। घर-परिवार की याद आने लगी। शायद जवानों ने हमारी हालत को समझ लिया। बस, इसके बाद एक से एक चुटकुले सुनाकर ऐसे माहौल में भी खूब हंसाया और हमारा तनाव दूर कर दिया। मन में चिंता बहुत थी, लेकिन डर खत्म सा हो गया था। एक जवान इस दौरान घायल हो गया। उसका इलाज भी साथ साथ ही चलता रहा। कुछ जवान ये भी कहते रहे कि नक्सलियों ने तो एक बम फोड़ा है। अगर आदेश आ जाए तो हम अभी पूरी दिवाली मना लें।
इसके बाद चाय-नाश्ता
केशव कहते हैं कि नक्सलियों के कब्जे वाले किसी जंगल में चाय-नाश्ते की बात हम सोच भी नहीं सकते थे। करीब आधे घंटे जमीन में लेटे रहने के बाद जब स्थिति सामान्य हुई, तो जवानों ने हमें सुरक्षित जगहों पर बैठा दिया। इसी दौरान बैकअप टीम आई और घायल जवान को बांदे के लिए रवाना किया गया। इस बीच हमारे लिए चाय-नाश्ते का इंतजाम होता रहा। मुठभेड़ और विस्फोट के बाद भी सारे लोग हंसते-हंसाते कांकेर के पीजी कालेज पहुंचे।