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रविवि के प्रोफेसरों से वसूले जाएंगे 50 लाख रु, वित्तीय अनियमितता का मामला

7 वर्ष पहले
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रायपुर. पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में वित्तीय दुरुपयोग का बड़ा मामला फूटा है। इसमें आधा दर्जन प्रोफेसरों ने मनमाने ढंग से तनख्वाह ली और रविवि प्रशासन ने भी नियमों की अनदेखी की। इन प्रोफेसरों से करीब 50 लाख रुपए वसूले जाएंगे। हाल ही में विवि ने इस मामले की फाइल उच्च शिक्षा संचालनालय को भेजी थी, जिसमें वसूली करने की अनुमति दे दी गई है। दैनिक भास्कर ने 30 सितंबर को पहले पेज पर प्रमुखता से पाठकों को जानकारी दी थी कि सरकारी विभागों, निगम, मंडलों, स्वशासी संस्थाओं में सैकड़ों कर्मचारी मनमाने ढंग से वेतन ले रहे हैं।
शासन ने इनका सही तरीके से वेतन निर्धारण कर बकाया राशि कर्मचारियों से वसूलने के निर्देश दिए हैं। अब यह पहला मामला सामने आया है, जिसमें वसूली होगी। रविवि में पिछले 11 साल से आडिट नहीं हुआ है। शासन के आदेश पर अब स्थानीय निधि संपरीक्षा की टीम 2003 से 2009-10 तक की आडिट कर रही है। आडिट दिसंबर तक पूरा करना है।
जांच के साथ पिछले दस सालों में रविवि में आर्थिक अनियमितता सामने आ रही है। पोस्ट आडिट की रेस्ट चैकिंग में गड़बड़ियां पकड़ में आई हैं। अब तक जिन 5-6 प्रोफेसरों को गलत तरीके से वेतन दिया जा रहा है, उनमें से चार की अनुशसा को कुलपति व कार्यपरिषद ने ही की है।
इनसे 6 से 8 लाख रुपए तक वसूली हो सकती है। सबसे दिलचस्प मामला आरके ब्रम्हे का है, जिन्होंने वित्त अधिकारी के अतिरिक्त प्रभार के दौरान वेतन बढ़ा लिया। आडिट की आपत्ति है कि नियमानुसार यह वेतन बढ़ोतरी की अनुशंसा कार्य परिषद में होनी थी, जिसकी अनदेखी कुलपति व रजिस्ट्रार दोनों ने की। उन पर 2010 तक 11 लाख 8 हजार 994 रुपए की वसूली निकली है। 2008 तक रविवि में रेसीडेंट आडिट की व्यवस्था थी। बाद में वित्त नियंत्रक का पद खाली हो गया। इसी पद पर ब्रम्हे को अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। बिलासपुर से रायपुर में रविवि में जिस विज्ञापन के आधार पर ब्रम्हे ने ज्वाइनिंग दी थी, उसमें वेतन संरक्षण का उल्लेख ही नहीं है। 2010 से 2014 तक का आडिट होने पर इन प्रोफेसरों से वसूल की जाने वाली रकम में और इजाफा हो सकता है। इन प्रोफेसरों को नियमों को दरकिनार कर इनक्रीमेंट दिए गए।

इस मामले में हाल ही में रविवि की वित्त समिति की बैठक में ये मामले रखे गए। हालांकि मामले की समीक्षा के बाद कोई निर्णय नहीं हुआ। यह मामला रविवि के लिए फांस बन गया है। ऑडिटर ने विभागीय जांच और स्पेशल आडिट की भी अनुशंसा की है। इसके बाद मामला पुलिस तक भी जा सकता है।

क्या कहते हैं मंत्री और कुलपति - इस मामले में उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय का कहना है कि विभाग विश्विद्यालयों की केवल आडिट रिपोर्ट विधानसभा के पटल पर रखता है। विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं के लिए कुलपति व रजिस्ट्रार जिम्मेदार होते हैं। कुलपति एसके पांडेय का कहना है कि ड्राविंग अथारिटी रजिस्ट्रार को होती है। वे इस मामले में उनसे जानकारी लेंगे। प्रोफेसर ब्रम्हे का कहना है कि वित्तीय अनियमितता नहीं हुई। मुझे वेतन संरक्षण का लाभ मिला है।
बिलासपुर विवि से रविवि में 2003 में ज्वाइन करने पर मुझे वही वेतन मिलना था जो बिलासपुर में मिलता था। लास्ट पे सर्टिफिकेट 2008 में बिलासपुर विवि ने भेजा, तब रजिस्ट्रार ने मुझे पत्र जारी किया। रजिस्ट्रार ने नियमों का पालन किया या नहीं उन्हें नहीं मालूम। रजिस्ट्रार केके चंद्राकर ने मोबाइल नहीं उठाया।