रायपुर. राज्य के सैकड़ों अधिकारियों और कर्मचारियों को सालों से गलत समयमान वेतनमान दिया जा रहा है। इसका पता चलने पर कुछ विभागों ने जहां चुप्पी साध ली, वहीं राज्य शासन अब ज्यादा दी गई रकम उनसे वसूलने वाली है। संयुक्त सचिव वित्त एसके चक्रवर्ती ने साफ तौर पर कहा है कि जिस किसी ने भी ज्यादा वेतन लिया है, उसकी रिकवरी उनके वेतन से इंस्टालमेंट के रूप में की जाएगी। वसूली की राशि सौ रुपए से लेकर 37 हजार रुपए महीने तक हो सकती है।
उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग समेत कुछ विभाग और निगम-मंडल वेतन पुनरीक्षण नियमों की गलत व्याख्या करके अपने कर्मचारियों का वेतनमान गलत तरीके से तय कर रहे हैं। अब शासन ने गलती सुधारने और रिकवरी करने का फैसला किया है। इस संबंध में वित्त विभाग ने फरमान भी जारी कर दिया। ऐन त्योहार के पहले इस तरह की कार्रवाई से कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति है। ऐसे सबसे अधिक मामले उन अपर डिविजन टीचर के हो सकते हैं जो पदोन्नत होकर व्याख्याता बने हैं।
राज्य में करीब 65 हजार सहायक शिक्षक हैं। शासन मानता है कि पहले से उन्हें इतना वेतन मिल रहा है जो क्रमोन्नति के बाद मिलना चाहिए। कर्मचारी संघ के महामंत्री चंद्रशेखर तिवारी ने इसे सहायक शिक्षकों के साथ अन्याय बताते हुए केंद्रीय वेतनमान (जो केंद्रीय स्कूलों के सहायक शिक्षकों को मिलता है) लागू करने की मांग की है।
यह है मामला
राज्य सरकार ने वेतन पुनरीक्षण के नियम 2009 में बनाए थे। इसके अनुसार किसी कर्मचारी को वेतन बैंड के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के एक साल बाद ही अगला उच्चतर बैंड दिया जाएगा। वेतन बैंड बदलने से ग्रेड वेतन परिवर्तित नहीं होगा। लेकिन वित्त विभाग के अनुसार समयमान वेतनमान का गलत निर्धारण कर इन नियमों के विपरीत कई विभाग में कर्मचारियों को वेतन दिया जा रहा है। नियम है कि किसी अधिकारी-कर्मचारी को समयमान वेतनमान देने के कारण उच्चतर वेतन बैंड की पात्रता नहीं होगी।
उच्चतर वेतन बैंड केवल पदोन्नति की स्थिति में एवं वेतन पुनरीक्षण नियमों के अनुसार पूर्व वेतन बैंड के अधिकतम पर पहुंचने के बाद तय होगा। लेकिन ऐसे मामलों में जहां भर्ती नियमों में संशोधन के बाद शत - प्रतिशत पदोन्नति के पद को सीधी भर्ती के पद में बदला गया है, वहां उस पद पर प्रथम नियुक्ति की तिथि से समयमान की गणना की जा रही है। शासन ने ऐसे प्रकरण में स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती नियम में संशोधन की तिथि से उस पद पर आठ से दस साल की सेवा पूरी करने पर ही समयमान वेतनमान के पहले और दूसरे उच्चतर वेतनमान (जैसी स्थिति) की पात्रता होगी।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि गलत तरीके से ज्यादा या कम वेतन लेने के कितने केस हैं। किसी कर्मचारी को गलती से हायर बैंड दिया जा रहा तो उसे लोवर बैंड दिया जाएगा। अब तक हायर बैंड के रूप में जितना ज्यादा वेतन ले लिया है उसकी रिकवरी की जाएगी। - एसके चक्रवर्ती, संयुक्त सचिव वित्त
क्लास वन अफसर से लेकर चपरासी तक दायरे में
रिकवरी के इस दायरे में क्लास वन अधिकारी से लेकर चपरासी तक आ रहे हैं क्योंकि इन्हें समयमान वेतनमान की पात्रता है। इस सुविधा से केवल सहायक शिक्षक ही अछूते हैं।
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