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खुलासा: नक्सलियों को मिले म्यांमार और बांग्लादेश से हथियार

9 वर्ष पहले
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रायपुर। एके 47, एसएलआर व अन्य प्रतिबंधित बोर के हथियार व गोलियों के अलावा अत्याधुनिक संचार उपकरणों के लिए नक्सलियों ने म्यांमार और बांग्लादेश के हथियार तस्करों से मजबूत नेटवर्क बना लिया है। इस बात की पुष्टि नक्सलियों की सेंट्रल टेक्निकल कमेटी (सीटीसी) के मुखिया सदानला रामकृष्णा उर्फ डोकरा ने जांच एजेंसियों को दिए बयान में की है। उसके मुताबिक हथियार और उनकी गोलियों की 90 फीसदी सप्लाई इसी तरह के स्रोतों से हो रही है। नागालैंड और असम में सक्रिय उग्रवादी संगठन नक्सलियों को हथियार और विस्फोटकों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। सदानला ने बताया कि सीटीसी की 2007 में हुई बैठक में ही फैसला किया गया था कि बड़े हमले के लिए संगठन को रॉकेट लांचरों के अलावा अत्याधुनिक संचार उपकरणों, हथियारों, गोलियों की जरूरत होगी। इसके लिए तय हुआ था कि नागालैंड और असम में सक्रिय उग्रवादी संगठनों से संपर्क किया जाए। साथ ही बांग्लादेश और म्यांमार के रास्ते हथियार हासिल किए जाएं। इस काम के लिए अजय उर्फ प्रशांत मोटू नामक शीर्ष नक्सली नेता को अधिकृत किया गया। ओडिशा और राजनांदगांव जिले में कुछ महीनों पहले बरामद अत्याधुनिक वायरलेस सेट, जीपीएस इसी चैनल से नक्सलियों के पास पहुंचे थे। बुलेटप्रूफ जैकेट और नाइट विजन दूरबीन की सप्लाई कुछ महीने पहले झारखंड में पकड़ी गई। नागालैंड के उग्रवादी नक्सलियों को इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के इस्तेमाल, पुलिस पर घात लगाकर हमला करने जैसी जंगल युद्ध कलाओं का प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। खुफिया एजेंसियों के अनुसार एक महीने पहले ओडिशा के गोपालपुर इलाके में नागालैंड के एक उग्रवादी को पकड़ा गया था। वह नक्सलियों को विस्फोटकों की ट्रेनिंग देने आया था। दंडकारण्य में एस-3 नाम से मैन्युफैक्चरिंग इकाई हथियारों के विकास और उत्पादन को तेज करने के लिए नक्सलियों ने करीब तीन साल पहले छह राज्यों में टेक्निकल रिसर्च आर्म्स मैन्युफैक्चरिंग (टीआरएएम) यूनिटें बनाई थीं। सब इकाइयों को गुप्त कोड दिए गए हैं। दंडकारण्य में एस-3 के नाम से चल रही इकाई का प्रभारी शीर्ष नक्सली नेता रमन्ना उर्फ किशन है। रमन्ना को सदानला ने हथियार तैयार करने में पारंगत किया। खुद बना रहे थ्री नॉट थ्री की गोलियां देशभर के नक्सलियों के लिए हथियारों की खरीदी और उत्पादन का काम देखने वाले सदानला ने जांच एजेंसियों को बताया कि नक्सलियों ने अपनी हथियार फैक्ट्रियों में 303 और 12 बोर की बंदूकों के लिए कारतूस का उत्पादन अपने स्रोतों से शुरू कर दिया है। पर एके 47 जैसे हथियारों के लिए गोलियों का इंतजाम समस्या थी। चीन की नार्निको कर रही हथियारों की सप्लाई नक्सलियों को म्यांमार और बंगलादेश से हथियार और गोलियां मिलने की बात कई बार सामने आई है। पर इसके पीछे असली चेहरा चीन का है। चीन की नार्निको नामक हथियार फैक्ट्री पिछले कई सालों से इलाके के उग्रवादियों को हथियार और गोलियां सप्लाई कर रही है। सब कुछ जानते हुए भी चीन आंखें बंद किए हुए है। शेषत्नपेज ८ चीन सहित कई देशों की मंशा है कि भारत में अस्थिरता बनी रहे और फोर्स नक्सलियों, उग्रवादियों से जूझती रहे। यही वजह है कि चीन अपने हथियारों को म्यांमार होते हुए उतर पूर्वी राज्यों के उग्रवादियों के पास भेज रहा है। थाईलैंड और कई अन्य देशों में सक्रिय हथियार सौदागर भी इस काम में लगे हैं। बांग्गलादेश से कुछ सालों पहले तक हथियार आ रहे थे पर शेख हसीना के सता में आने के बाद हालात कुछ बदले हैं। छह-सात साल पहले चिटगांव के पास सुरक्षा बलों ने सेना की तीन ब्रिगेड यानी 9 हजार जवानों के लिए जरूरी हथियार और गोलाबारूद जब्त किया था। बंगलादेश ने तो उस समय चुप्पी साध ली पर लंदन से प्रकाशित होने वाली जेएंडके इंटेलिजेंस पत्रिका ने खुलासा किया था कि ये हथियार भारत के उतर पूर्वी राज्यों के उग्रवादियों के लिए भेजे जा रहे थे। प्रकाश सिंह, आंतरिक सुरक्षा विशेषज्ञ एवं पूर्व डीजी बीएसएफ

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