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आरटीओ में टोकन के नाम पर पूरे प्रदेश में करोड़ों के "लक्ष्मी दर्शन' का खेल

7 वर्ष पहले
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रायपुर. आरटीओ में धड़ल्ले से भ्रष्टाचार चल रहा है। धांधली और साठगांठ के इस खेल की सबसे अहम कड़ी है टोकन। इसके बहाने वाहनों को ओवरलोडिंग की खुली छूट मिली हुई है। टोकन की प्रिंटिंग और उसे मार्केट में चलाने के लिए आरटीओ की उड़नदस्ता टीम ढाबों और समितियों का इस्तेमाल कर रही है। इन्हें प्रति टोकन 150 रुपए कमीशन मिल रहा है। कोई भी ट्रांसपोर्टर बिना टोकन के गाड़ी नहीं चला सकता।
अगर टोकन नहीं है तो ओवरलोडिंग के नाम पर 100 रुपए से लेकर 3 लाख तक का जुर्माना वसूला जा रहा है। यह पूरा खेल करोड़ों का है। चालान का पैसा कहां जा रहा है, किसी को नहीं मालूम। क्योंकि मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम ही नहीं। खास बात यह कि वसूली का यह खेल ठेके के गुर्गे कर रहे हैं। यह सब खुद भास्कर टीम ने अपनी आंखों से देखा।
हमारे संवाददाता गुरुवार को दुर्ग, रायगढ़, राजनांदगांव समेत कई शहरों के आरटीओ व उससे जुड़े चेकपोस्ट पर गए। पता चला कि हर संभाग को हर महीने वसूली का टारगेट दिया जा रहा है। आरटीओ की उड़नदस्ता टीम भ्रष्टाचार के इस कारनामे को सुनियोजित ढंग से अंजाम दे रही है। हर वाहन के टोकन के रेट अलग-अलग हैं। उड़नदस्ता टीम के ही दो अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर भ्रष्टाचार के इस टोकन सिस्टम को स्वीकार करते हैं। इस संबंध में हमने जिम्मेदारों से बातचीत की।
परिवहन मंत्री राजेश मूणत से लेकर एडिशनल ट्रांसपोर्ट कमिश्नर एचके राठौर तक ने टोकन सिस्टम होने की बात को सिरे से खारिज कर दिया। बड़ा सवाल ये कि अगर इनकी बात सही है तो इनकी टीम टोकन देखकर ओवरलोडेड वाहनों को पासिंग कैसे दे रही है? क्यों इनके ही अफसर मौके से यह कहते मिल रहे हैं कि हम तो ऊपर से बनी व्यवस्था का बस पालन कर रहे हैं। आरटीओ के एक अफसर तो नाम न छापने की शर्त पर यहां तक कहते हैं कि हर स्तर का अधिकारी और नेता इसमें शामिल हैं। यही वजह है कि उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं।

दुर्ग. अंजोरा बायपास टोल

सुबह 7.30 बजे। टोल के पैसे देने के बाद ट्रक जैसे ही आगे बढ़ा, उनका सामना उड़नदस्ता टीम से। 4-5गाड़ियां सिर्फ इशारा कर निकल गई्ं। फिर आ रही गाड़ियों के ड्राइवर ने टोकन दिखाया। उड़नदस्ता टीम ने कहा-ओके तुम जाओ। सिलसिला चलता रहा। 7:47 मिनट पर एक गाड़ी को रोका। टोकन नहीं था। टीम ने चालान भरने को कहा। ड्राइवर ने किसी से फोन पर उनकी बात कराई। परिवहन दस्ते के गाड़ी से ही टोकन इश्यू हो गया।

रायगढ़. छातामुड़ा बायपास

सुबह 9 बजे। मुंबई-रायपुर मार्ग से रायगढ़ शहर के भीतर आने वाली सड़क पर पहला चौराहा छातामुड़ा बाइपास। 15 वाहनों की कतार। सीजी07के 2494 क्रमांक का वाहन सबसे आगे था। पास ही उड़नदस्ता की गाड़ी। 10.05 बजे ट्रक क्रमांक एपी 31 5307 को प्रहरियों ने रोका। वाहन से एक हेल्पर निकला। फाइल दिखाई। प्रहरियों ने जाने दिया। थोड़ी दूर आगे ड्राइवर से पूछा तो बताया- टोकन चेक कर रहे थे।

राजनांदगांव,पाटेकोहरा
दोपहर 12.55 बजे। दस्तावेज जांच काउंटर के पास। महाराष्ट्र का ट्रक ड्राइवर कागजात लेकर पहुंचा। बोला, कितने का चालान कटेगा? सामने से आवाज आई, 1500 रुपए और 900 का स्टिकर। ड्राइवर ने पांच-पांच सौ के तीन नोट दिए और कहा, स्टिकर नहीं चाहिए। काउंटर में बैठे शख्स ने तीनों नोट वैसे ही वापस कर दिए। वो तो देना ही पड़ेगा, वरना एंट्री नहीं मिलेगी। ड्राइवर ने अपने मालिक से फोन पर बात की और काउंटर में पूरी राशि जमा कराई। इस तरह स्टिकर, टोकन के नाम पर अवैध उगाही आम हो गई है।
कहां-कहां यह धांधली
दुर्ग संभाग : पाटेकोहरा बैरियर, कांकेर स्थित चरामा बार्डर, मंुजालगोंदी चेकपोस्ट, बाफना टोल प्लाजा, जंजगिरी मोड़ पर अघोषित चेक पोस्ट, पुलगांव चौकी।

रायगढ़ : सांगीतराई बाइपास, खरसिया-एडू रोड, पूंजीपथरा-तमनार रोड तिराहा, धरमजयगढ़-बाकारूमा बार्डर, सारंगढ़-सरसींवा रोड पांच स्थान हैं जहां उड़नदस्ता की टीम उगाही करती है।
अफसर बन रहे अंजान
टोकन की बात पूरी तरह गलत है। हमारे सिस्टम का हिस्सा नहीं है।”- एचके राठौर, एडि. ट्रांसपोर्ट कमिश्नर

टोकन सिस्टम हम नहीं चला रहे। इसकी जानकारी मुझे नहीं।”- असीम माथुर, री. ट्रांसपोर्ट इंस्पेक्टर
आरटीओ में टोकन के नाम पर पूरे प्रदेश में कैसे होता है खेल...
जानिए क्या है टोकन सिस्टम

करप्शन की शुरुआत: उड़नदस्ता की टीम टोकन बांटने , प्रिंट करने और कलेक्शन का काम खुद नहीं करती। यह काम हर शहर में कुछ बाहरी समितियों को दिया जाता है। टोकन में कोड होते हैं। जैसे 06 नंबर का मतलब 600 रुपए। इसके अलावा टोकन में महीने और एरिया का भी उल्लेख रहता है। दिखाने पर पासिंग मिल जाती है।
फाइन के डर से टोकन: ओवरलोडिंग करते पाए जाने पर 100 रुपए से 3 लाख तक का जुर्माना संभव। इसलिए टोकन अनिवार्य।
थानों व ट्रैफिक का भी टोकन: आरटीओ के अलावा थानों और ट्रैफिक पुलिस के नाम से भी टोकन बिक रहा है। मतलब ये भी भ्रष्टाचार में शामिल।
ट्रेजरी में जमा नहीं होता: सिर्फ आरटीओ ही ऐसा विभाग है जो जुर्माने की हैंडलिंग कैश में करता है। ट्रेजरी में पैसा जमा करना नहीं पड़ता।