पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Road Raipur, Toronto Bus Rapid Transit, Chhattisgarh News

रायपुर में मिलेगा कनाडा का मजा, बनेगा टोरंटो बस रैपिड ट्रांजिट

8 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

रायपुर। नई राजधानी में विश्व बैंक के अनुदान से बनने वाले बीआरटीएस (बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) को लेकर एनआरडीए ने काम शुरू कर दिया है। इसके पहले चरण में बस स्टैंड बनाने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। बीआरटीएस को अब नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। इसे कनाडा के टोरंटो शहर की तर्ज पर बनाने की दिशा में पहल की जा रही है।

ब्राजील के शहर क्यूबा, साओ पालो और रियो के साथ कनाडा के टोरंटो शहर के बीआरटीएस का अध्ययन करने एनआरडीए की तीन सदस्यीय टीम जा रही है। इसमें छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और केंद्र सरकार के 15 अधिकारी भी शामिल हैं।

एनआरडीए के उपाध्यक्ष एसएस बजाज ने बताया कि टोरंटो को दुनियाभर में बीआरटीएस का मॉडल माना जाता है। इसलिए नई राजधानी में टोरंटो की तर्ज पर ही सिस्टम विकसित किया जाएगा। 10 मई से 15 दिनों के लिए एनआरडीए के अधिकारी ब्राजील और कनाडा के दौरे पर निकलेंगे। वहां सभी मास्टर प्लान का प्रजेंटेशन किया जाएगा।
इसके बाद प्लान को रिवाइज किया जाना है।

अभी बीआरटीएस के अंतर्गत हर बस स्टॉप पर हर पांचवें मिनट में एक बस की उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्लान है। बाद में आबादी के अनुसार बसों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। ट्रांजिट टूर में सभी तरह की केस स्टडी करने के बाद एक फाइनल मास्टर प्लान लागू किया जाएगा।

डेढ़ साल लगेगा शुरू होने में
नई राजधानी में बीआरटीएस शुरू करने में डेढ़ साल का समय लगेगा। इसे तीन चरणों में डेवलप किया जाना है। पहले चरण में बस स्टॉप का निर्माण होगा। इसके बाद सड़कों के साथ पैदल व साइकिल चलने के लिए अलग से पाथवे बनाया जाएगा। यह काम पूरा होने के बाद बसें खरीदी जाएंगी।

नई राजधानी में बसाहट के अनुसार ही बसों की खरीदारी होगी। समय के अनुसार इसकी संख्या बढ़ेगी। गौरतलब है कि, बीआरटीएस को 30 साल तक बढऩे वाली आबादी को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा। यह समय सीमा समाप्त होने से पांच साल पहले ही इसे फिर से जरूरत अनुसार डेवलप किया जाएगा।

यह भी होगा बीआरटीएस में खास
नई राजधानी के बीआरटीएस के अंतर्गत यह तय किया जाएगा कि पांच सौ मीटर की दूरी पर ही एक यात्री को हॉस्पिटल, दुकान, मल्टीप्लेक्स सहित तमाम जरूरत की चीजें मिल सकें। बस से उतरने या बस पकडऩे के लिए उसे अधिक पैदल न चलना पड़े। इस कॉन्सेप्ट के तहत यहां के घनत्व को अधिक रखा गया है।