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सेफ्टी जोन के फेर में फंसा अंडरब्रिज

8 वर्ष पहले
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बिलासपुर. लालखदान अंडरब्रिज के निर्माण में एक नई समस्या आ गई है। ग्रामीण जिस स्थान पर एप्रोच रोड बनवाने की मांग कर रहे हैं, वह रेलवे के सेफ्टी जोन में शामिल है। रेलवे ने इस स्थान पर सड़क बनाने से मना कर दिया है। ऐसे में जिला प्रशासन के पास निजी भूमि के अधिग्रहण का ही रास्ता शेष रह गया है।
लालखदान फाटक पर रोड ओवरब्रिज निर्माण का काम जारी है। इसके कारण सड़क यातायात हद तक बाधित होने लगा है। इसके अलावा रेल लाइन मेंटेनेंस के नाम पर भी फाटक को बंद किया जाने लगा है। इसे लेकर लोगों में रेलवे के खिलाफ भारी आक्रोश है। महमंद, दोमुहानी, देवरीखुर्द के ग्रामीणों ने 22 जनवरी को फाटक पर प्रदर्शन भी किया था। इसी प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन और रेलवे अंडरब्रिज के लिए एप्रोच रोड बनाने पर सहमत हुए। शुक्रवार को रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के अफसर और राजस्व अमला मौका मुआयना करने पहुंचा।
इस समय कांग्रेस कमेटी के जिला प्रतिनिधि अभयनारायण राय, जनपद सदस्य निर्मला पाल, दोमुहानी सरपंच विनायक मौर्य, नागेंद्र राय आदि भी मौजूद रहे। इस त्रिपक्षीय टीम ने एप्रोच रोड निर्माण में आने वाली दिक्कतों को समझा। दरअसल रेल लाइन के उस पार (मस्तूरी की ओर) 150 मीटर लंबी सड़क का निर्माण होना है। इसमें से 50 मीटर एरिया पर जिला प्रशासन ने डब्ल्यूबीएम सड़क का निर्माण करा भी लिया है। अब 100 मीटर एरिया में सड़क का निर्माण होना है। रेलवे के अफसरों ने जांच के बाद बताया कि जहां सड़क बनाने की मांग की जा रही है, वह सेफ्टी जोन में है। दरअसल रेल लाइन से 15 मीटर दूर तक के एरिया को सेफ्टी जोन माना जाता है।
रेलवे ने यहां सड़क बनाने से मना कर दिया। ऐसे में जिला प्रशासन के पास निजी भूमि में रास्ता तैयार करने का विकल्प ही शेष रह गया है। रेलवे इंजीनियरिंग विभाग के अफसर और राजस्व विभाग का अमला, दोनों ही अलग-अलग रिपोर्ट तैयार करेंगे और जिला प्रशासन को सौपेंगे। अंतिम फैसला जिला प्रशासन को लेना है।
गंभीर नहीं है राजस्व अमला
जनता की परेशानियों के प्रति राजस्व अमला का रवैया उदासीन है। इसका प्रमाण शुक्रवार को मिला। दरअसल मौका मुआयना के लिए तहसीलदार देवेंद्र केशरवानी को जाना था, लेकिन उन्होंने महमंद और देवरी खुर्द के पटवारी को भेज दिया। जिला प्रशासन की ओर से पटवारियों ने मौका मुआयना किया।