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24 साल के साइंटिस्ट आदित्य का 'मंगल मिशन' में अहम योगदान, आखिरी कैसे पहुंचे इसरो

7 वर्ष पहले
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रायपुर. भारत का महात्वाकांक्षी मिशन 'मंगल मिशन' बुधवार को सफल हो गया। इसके साथ ही भारत पूरे विश्व में इस सफलता को पाने वाला एकलौता देश बन गया है। भारत के मंगल मिशन को कामयाब बनाने में रायपुर के आर आदित्य (आदित्य रल्लापल्ली) का भी योगदान है। 24 साल के आदित्य 2012 से इसरो के बेंगलुरू केंद्र में साइंटिस्ट हैं। आदित्य ने मंगलयान के लिए सॉफ्टवेयर डिजाइन किए हैं। यूं तो मंगलयान मिशन की सफलता में हजारों लोगों का योगदान रहा है, लेकिन मुख्य रूप से इसमें लगभग 300 कोर साइंटिस्ट की टीम ने काम किया है। इसमें आदित्य भी हैं। वह सॉफ्टवेयर डिजाइनिंग और यान को कंट्रोल करने वाली 14 सदस्यीय टीम के सदस्य हैं। इस टीम ने इंजन के लिए ऑटोमोड में वर्क करने वाला सॉफ्टवेयर डिजाइन किया है। यान को डायरेक्शन देना और कंट्रोल करने के काम की जिम्मेदारी इसी टीम पर थी।
सभी वैज्ञानिक 48 घंटे जागते रहे
आदित्य ने बताया कि 22 से 24 सितंबर सुबह तक इनकी और दूसरी टीम के लगभग सभी वैज्ञानिक जाग रहे थे। सभी को ये चिंता सता रही थी कि इंजन समय पर ऑन हो पाएगा या नहीं। सुबह मंगल ग्रह की कक्षा में यान के प्रवेश होने के बाद ही रिसर्च सेंटर के कुछ वैज्ञानिकों को घर जाकर रेस्ट करने की अनुमति मिली।
आदित्य के 'इसरो' तक पहुंचने का सफर
रायपुर के न्यू राजेंद्र नगर निवासी आदित्य ने इसी शहर से स्कूलिंग करने के बाद त्रिवेंद्रम के आईआईएसटी से स्पेस टेक्नोलॉजी में बी टेक किया। पढ़ाई पूरी होते ही उन्होंने इसरो सेटेलाइट सेंटर में 2012 में साइंटिस्ट के रूप में ज्वाइनिंग ली। स्पेस टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता होने के कारण सेटेलाइट को डायरेक्शन देने वाली टीम में उन्हें शामिल किया गया। आदित्य के पिता आर मुरली रायपुर पीएचई में इंजीनियर हैं। मम्मी आर राम लक्ष्मी एलआईसी में कार्यरत हैं। छोटी बहन अदिति इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है।
आगे की स्लाइड्स में देखिए साइंटिस्ट आदित्य के जीवन से जुड़ी कुछ और तस्वीरें...