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डाउनलोड करेंआरा. जशपुर जिले में झारखंड की सीमा पर ठुठीअंबा गांव में ग्रामीणों का नक्सलियों के खिलाफ अभियान बढ़ता जा रहा है।रोज सुबह से शाम तक अलग-अलग पालियों में कई टोले-पारे के लोग नक्सलियों की खोज में जुटे हुए हैं।
ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर भी एहतियात बरत रहे हैं। गांव में घर की महिलाओं को छोड़ कर ग्रामीण रात को ठुठीअंबा गांव के कई स्थानों पर 25 से 30 के समूह में रात में सो रहे हैं और पहरेदारी कर रहे हैं।
साथ ही एक साथ ग्रामीणों का भोजन बन रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के प्रत्येक ग्रामीण अपने घरों से चावल, दाल और सब्जी लेकर एक स्थान पर जमा करते हैं। गांव के कुछ पुरुषों को गांव में छोड़ देते हैं, जो सार्वजनिक तौर पर उनके लिए भोजन पकाते हैं। गांव की महिलाएं जंगल से पत्ते तोड़कर दोना और पत्तल बनाती हैं।
विकास चाहते हैं ग्रामीण: ठुठीअंबा के ग्रामीण नक्सलियों से इस कदर नाराज हैं कि अब वे उन्हें पकड़ कर ही दम लेने की बात कहते हैं। ग्रामीण कहते हैं कि विकास के सबसे बड़े बाधक नक्सली ही हैं। हम आतंक से मुक्ति चाहते हैं।
कोई काम शुरू होता है नहीं ये आ धमकते हैं और लेवी नहीं मिलने पर काम बंद करवा देते हैं। इससे गांव में विकास कार्य ठप हैं। ग्रामीणों की माने तो उन्होंने आंदोलन 23 जनवरी से शुरू किया है। उनका कहना है कि उनके जैसे पीडि़त गांव के लोगों को जैसे ही इस आंदोलन का पता चल रहा है। वे भी आकर इस अभियान में शामिल होते जा रहे हैं। जरूरत पडऩे पर ग्रामीण पुलिस की भी मदद ले रहे हैं।
आरा क्षेत्र के आसपास ऐसे दर्जनों टोले पारे हैं, जो पिछले एक दशक से नक्सलियों के कोप के शिकार हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि पीएलएफआई का नक्सली सदस्य बुधराम का दस्ता गांव में मारपीट कर रहा था। लड़कियों को उठा ले जाता और हवस का शिकार बनाता रहा। पहले भी इस क्षेत्र के ग्रामीण जागरूक थे लेकिन दुर्गम और पहुंचविहीन होने के कारण यहां पहुंचना मुश्किल था। यहां के ग्रामीण बताते हैं कि इनका आतंक इतना था, कि अब उनके जंगल से मिलने वाली आय भी बंद हो गई है।
आंदोलन का विस्तार : गुरुवार की बैठक में ग्रामीण चर्चा कर ही रहे थे कि बुधराम का दस्ता गांव आ धमका और एक ग्रामीण की साथ जमकर मारपीट की। इससे गुस्साए ग्रामीण एकजुट हो गए और उसे पकडऩे के लिए ग्रामीण पीछे पड़ गए। ग्रामीणों को भारी पड़ता देखकर बुधराम जंगल की ओर भाग निकला।
ग्रामीणों ने बताया कि एक तरफ से पुलिस ने जंगल को घेरा था, दूसरे तरफ से ग्रामीणों का दस्ता घेराबंदी किए हुए था। पर शाम होने का फायदा उठाते हुए बुधराम वहां से भाग निकला। गुस्साए ग्रामीण रोज जंगलों में बुधराम दस्ते के साथ-साथ अन्य नक्सलियों की खोज कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि बुधराम ने लेवी वसूलने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क के काम को बंद कर दिया है। गांव में बनने वाले पुलिया के लिए लेवी की मांग की गई थी। नहीं मिलने पर वह भी बंद कर दिया गया है।
आतंक मुक्त होना चाहते हैं ठुठीअंबा के ग्रामीण
ग्रामीणों ने कहा-नहीं लेंगे दम
ग्रामीण बेहतर जीवन की आस लिए शासन प्रशासन से उम्मीद लगाए हैं कि उनके बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिले। ग्रामीणों ने कहा, आतंक मचाने वालों को पकड़ नहीं लेगें, तब तक दम नहीं लेंगे।
सुबह 8 बजे से सर्चिंग
ग्रामीणों का सर्चिंग अभियान सुबह 8 बजे ही शुरू हो जाता है। ग्रामीण 8 बजे एकत्र हो जाते हैं। उन्हें अलग-अलग टोलियों में बांटा जाता है। प्रत्येक में 75 से 100 पुरुष शामिल होते हैं।
जो अलग-अलग दिशाओं में जंगल और पहाड़ों को खंगालने निकलते हैं।
जंगल के रास्ते जो भी गांव पड़ता है, वहां उनके सूत्र उन्हें सूचना उपलब्ध कराता है और वे उसी दिशा की ओर बढ़ जाते हैं। अब तक 5 से 6 अलग-अलग ग्रुपों में 500 से 600 पुरुष आसपास के 20 से 25 किलोमीटर के जंगल को खंगालने निकल रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि कभी न कभी तो ये नक्सली उन्हें मिलेंगे ही या उनकी खबर लगेगी।
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