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डाउनलोड करेंरायपुर. सावन की झड़ी कलेक्टोरेट के पीछे एक पेड़ पर आशियाना बनाकर बैठे बगुलों के लिए मुसीबत लेकर आई। शुक्रवार शाम करीब चार बजे के करीब यह पेड़ अचानक धराशाई हो गया। इस पेड़ की मजबूती देखकर बगुलों ने इसमें घोसले बना रखे थे। कुछ में अंडे थे, तो कुछ में बगुलों के इतने छोटे बच्चे कि वे उडऩा भी नहीं जानते थे।
पेड़ गिरा तो बहुत से अंडे गिरकर फूट गए। बगुलों के कुछ बच्चे नीचे गिरकर जान गंवा बैठे। जो बच्चे बच गए वे डरे सहमे गिरे हुए पेड़ पर ही दुबक गए। कुछ ही देर में वहां भीड़ जमा हो गई। इनमें से कुछ लोग बगुलों के बच्चों को उठाकर ले जाने लगे।
कुछ बच्चों ने भी उन्हें हाथ में ले लिया। कुछ शरारती बच्चे उन्हें छेडऩे लगे। भास्कर ने सूचना दी, तो वन विभाग के एसडीओ समेत अफसर-कर्मी वहां पहुंचे।
उन्होंने लोगों को ऐसा करने से रोका। बगुले के असहाय बच्चों को गिरे हुए पेड़ से उठाकर बगल से सही सलामत पेड़ पर रख दिया गया ताकि वे महफूज रहें। यह कार्रवाई रात आठ बजे तक चलती रही।सभी फोटो: सुनिल भटकर
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