रायपुर. कोटा के संजीवनी वृद्धाश्रम में शनिवार की शाम निराली थी। विकलांग महेश और रामकली के विवाह में जैसे आश्रम का कोना-कोना जैसे खुशियों से नाच रहा था। 70 बसंत पार कर चुके जो बुजुर्ग चलने के लिए लाठी का सहारा लेते हैं, वे भी चुस्त-दुरुस्त नजर आ रहा थे। नए कपड़े पहने बुजुर्गो को देखकर ऐसा लग रहा था मानो उनके अपने बच्चों की शादी है। शाम को जैसे ही महेश की बारात आश्रम के गेट पर पहुंची बुजुर्ग अपना दुख-दर्द और बीमारी भूलकर बाहर आ गए और थिरकने लगे।
बारात का स्वागत करने के बाद महेश को भीतर लाया गया। आश्रम के आंगन में विवाह का मंडप सजा था। महेश को वहां बिठाने के बाद दुल्हन बनी रामकली को लाया गया। वृद्धाश्रम में रहने वाले संतराम दास और नानकी ने रामकली का कन्यादान किया। वे नई जिम्मेदारी मिलने से गर्व महसूस कर रहे थे।
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