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सोंढूर बांध को पूरा भरने का रास्ता साफ

9 वर्ष पहले
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धमतरी। सोंढूर बांध में डिजाईन लेवल तक पानी भरने का रास्ता सुप्रीम कोर्ट की ग्रीन बेंच ने साफ कर दिया है। बड़े पैमाने पर जंगली इलाका डूब में आने के कारण वन एवं पर्यावरण विभाग ने इस पर आपत्ति लगा रखी थी, फलस्वरूप इस बांध में क्षमता से दो मीटर कम पानी भरा जा रहा था। बीती 5 तारीख को आए सुप्रीम कोर्ट के इस डिसीजन के महत्व का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब सोंढूर बांध की वर्षो से रूकी पड़ी विस्तार परियोजनाओं को फिर से गति मिल सकेगी और नगरी-सिहावा, मगरलोड के साथ ही तिल्दा,भाटापारा क्षेत्र को भी यहां से सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी दिया जा सकेगा। इससे इस बांध से सिंचित होने वाला रकबा काफी अधिक बढ़ जाएगा। सोंढूर बांध 1988 में बनकर तैयार हुआ, जिसकी डिजाईन एफआरएल 472 मीटर और जल ग्रहण क्षमता 7 टीएमसी है। चूंकि इस बांध की डूब में सीतानदी अभ्यारण्य का बड़ा इलाका आ रहा था, अत: वन एवं पर्यावरण विभाग ने यहां डिजाईन लेवल तक पानी भरने पर शुरू से आपत्ति लगाकर एनओसी देने से इंकार कर दिया था, फलस्वरूप यहां एफआरएल से दो मीटर कम 5 मीटर तक ही पानी भरा जा रहा है। आपत्ति के निराकरण के लिए जल संसाधन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली और न्यायालय के निर्देश पर डूब में आने वाले वनों में मुआवजे के रूप में 127 करोड़ रुपए वन विभाग को वैकल्पिक वन विकसित करने के लिए सालों पहले दे दिए। इसके बावजूद यह मामला लंबा खिंच गया, क्योंकि जल्द निपटारा कराने में पूर्ववर्ती अधिकारियों ने अपेक्षित रुचि नहीं ली। वर्तमान कार्यपालन यंत्री वीरेन्द्र तिवारी ने इसकी गंभीरता को समझा और उन्होंने एसई अ. शकील, एसडीओ श्री नायक का सहयोग लेकर आपत्ति निराकरण के लिए गंभीर प्रयास शुरू किए, जिसका परिणाम विभाग के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के रूप में सामने है। श्री तिवारी ने ‘दैनिक भास्कर’ के साथ चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पुष्टि कर कहा कि इसकी कापी उन्हें 13 जुलाई को ही मिली है। उन्होंने बताया कि सारी रूकावट दूर हो चुकी है, अत: अब केन्द्रीय जल आयोग से बांध को पूरा भरने और सालों से अटकी पड़ी विस्तार योजनाओं पर काम करने की स्वीकृति मांगी जाएगी। डिजाईन लेवल तक बांध में पानी भरने से वर्तमान स्थिति के मुकाबले 25 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त पानी मिल सकेगा, जिसका उपयोग सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए किया जा सकेगा। इससे 26 हजार हेक्टेयर से अधिक सिंचाई का रकबा बढ़ने का अनुमान है। अभी सिर्फ नगरी-सिहावा क्षेत्र के 12 हजार 260 हेक्टेयर के साथ ही भाटापारा के कुछ क्षेत्र को ही इस बांध से सिंचाई सुविधा मिल पा रही है। किसानों को मांगना पड़ेगा पानी गंगरेल बांध में अभी जल ग्रहण क्षमता के आधे से ज्यादा पानी उपलब्ध है, इस लिहाज से बांध की सेहत काफी अच्छी मानी जा सकती है। इसके बावजूद अल्प वर्षा से चिंतित किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए तब तक पानी नहीं छोड़ा जाएगा, जब तक वे इसकी मांग विधिवत नहीं करेंगे। श्री तिवारी का कहना है कि सिंचाई के लिए भरपूर पानी दिया जाएगा, लेकिन इसके लिए किसानों को जल उपभोक्ता संस्थाओं के माध्यम से मांग रखनी पड़ेगी और बकाया सिंचाई शुल्क भी पटाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि नगरी-सिहावा क्षेत्र में काफी कम वर्षा के कारण परेशानी बढ़ी है, अत: वहां के किसानों की मांग पर सोंढूर बांध से 100 क्युसेक पानी छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा गंगरेल से रायपुर नगर निगम, भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए 230 क्युसेक पानी छोड़ा जा रहा है।

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