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अब लगेगा सपनों को पंख, आदिवासियों को खेल के लिए मिली जमीन

8 वर्ष पहले
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रायपुर. स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) को स्पेशल एरिया गेम्स (एसएजी) के लिए नया रायपुर विकास प्राधिकरण से 50 एकड़ जमीन मिल गई है। साई इसे विकसित कर अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं और कोच के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी खेल प्रतिभाओं को निखारेगा। इसका फायदा वर्ष 2017 में छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित 37वें नेशनल गेम्स में प्रदेश को मिलेगा।
छत्तीसगढ़ में खुलने वाला एसएजी देश का 21वां सेंटर होगा। साई के अधिकारियों ने बताया कि जमीन मिलने के बाद एसएजी में शामिल किए जाने वाले खेलों और संसाधनों के लिए बजट तैयार करेंगे। देशभर में साई के 20 एसएजी सेंटर हैं, जिनमें 12 से 18 साल तक के 1,885 खिलाड़ी प्रशिक्षण पा रहे हैं। इनमें से 1,683 खिलाड़ी आवासीय योजना में शामिल हैं, जबकि 202 गैरआवासीय के तहत। पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश का एकमात्र सेंटर धार जिले में संचालित है।
साई सेंटर व एसएजी में है अंतर
साई सेंटर में राज्य सरकार मैदान और हॉस्टल सुविधा उपलब्ध करवाती है जबकि एसएजी में वह केवल जमीन देती है, बाकी खर्च साई खुद उठाता है। वर्तमान में राजधानी रायपुर में साई का एक सेंटर चल रहा है, जिसमें सात खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
अब आगे क्या
एसएजी खुलने से राज्य के प्रतिभावान खिलाड़ियों को 28 खेलों में अंतरराष्ट्रीय कोच और उसी स्तर की सुविधाएं मिलेंगी। यहां खिलाड़ियों को डाइट मनी, स्पोर्ट्स किट, आवास, मैदान, प्रशिक्षण, स्कूल फीस और बीमा की सुविधा दी जाएंगी।
रायपुर में शुरू होने वाले एसएजी में कुल 28 खेलों में प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है। देशभर के एसएजी में 23 खेलों को ही शामिल किया गया है। इनमें तीरंदाजी, बैडमिंटन, कयाकिंग-केनोइंग, फुटबॉल, जूडो, वॉलीबॉल, वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग, साइकलिंग, फेंसिंग, जिम्नास्टिक, हैंडबॉल, हॉकी, कबड्डी, कराते, शूटिंग, स्वीमिंग, सेपक तैकरा, ताइक्वांडो, रेसलिंग और वुशू शामिल हैं। जमीन का आवंटन होने के बाद साई तय करेगा कि इसमें और किन पांच खेलों को शामिल किया जाना है।
अब बजट तैयार करेंगे
छत्तीसगढ़ में एसएजी के लिए जमीन हैंडओवर होने के बाद हम इसके लिए बजट तैयार करेंगे। राज्य में वर्ष 2017 में नेशनल गेम्स होने हैं, इसी वजह से सेंटर में 28 गेम्स शामिल करवाने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य नेशनल गेम्स में राज्य को 150 पदक दिलाना है।
आरके नायडू, क्षेत्रीय निदेशक, साई भोपाल