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राजधानी के कुछ वार्डों में धनवर्षा कई अन्य में पांच साल रहा सूखा

7 वर्ष पहले
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रायपुर । पांच साल पहले वार्डों में जिन नेताओं को लोगों ने विकास के नाम पर जिताया और पार्षद बनाया, पांच साल में उन्होंने क्या किया, अब इसका आंकलन शुरू हो गया है। नगर निगम ने शहर के सभी 70 वार्डों में वास्तविक तौर पर पांच साल में 527 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। लेकिन खर्च के मुद्दे पर वार्डों में भारी असंतुलन नजर आ रहा है। दैनिक भास्कर की पड़ताल में पता चला कि जहां भाजपा के पार्षद थे या जो इलाके भाजपा विधायकों के हैं, उनमें सरकारी एजेंसियों ने विकास पर पूरा जोर लगा दिया।

शहर की सरकार यानी शहरी सत्ता को चुनने के लिए राजधानी के 8 लाख से ज्यादा मतदाता 29 दिसंबर को मतदान करेंगे। पांच साल पहले भी इन्हीं मतदाताओं ने शहरी सत्ता के चुनाव में मतदान करके अपने वार्ड के जनप्रतिनिधि का चुनाव किया था। मोहल्ले और कालोनियों के मशहूर और लोकप्रिय चेहरे एक बार फिर से लोगों के बीच पहुंचने की कवायद में जुट गए हैं। भास्कर ने उन चेहरों के काम का आकलन किया जिन्हें पांच साल पहले मोहल्ले, पारे और कालोनियों के लोगों ने इस उम्मीद के साथ जिताया था कि वे हमारे घर के सामने की नाली साफ करवा देंगे, कच्ची सड़क को पक्की करवा देंगे। घर में लगे नल की टोटियों से सुबह और शाम पानी की बूंद नहीं बल्कि धार फूटेगी। लेकिन ये वादे कुछ जगह तो पूरे होते नजर आ रहे हैं, लेकिन ज्यादातर वार्डों में लोग पांच साल पहले जिन समस्याओं से जूझ रहे थे, उन्हें उनसे पूरी तरह राहत नहीं मिल पाई है।
मोवा हुआ टैंकरमुक्त, भनपुरी को मिला पानी

सड्डू, मोवा और दलदल सिवनी इलाके में 400 टैंकर चलते थे। आज इन तीनों वार्ड में टंकियां बनने के बाद एक भी टैंकर से पानी की सप्लाई नहीं होती है। तीन वार्ड में सबसे ज्यादा पानी अंबेडकर वार्ड में लगता था। चूंकि आबादी अधिक थी। मगर अब वहां जरूरत से अधिक पानी मिल रहा है। यही हाल भनपुरी इलाके का भी है। बंजारी माता वार्ड की पार्षद राधिका राव के वार्ड में भी पांच साल में पानी का संकट कम हुआ है।
पश्चिम के 22 वार्डों में अधिकांश सड़कें पक्की

पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में 22 वार्ड हैं, इस लिहाज से इसका इलाका अन्य क्षेत्रों में बड़ा था, इसके बावजूद इसी क्षेत्र में सर्वाधिक कच्ची सड़कों को पक्की बनाया गया। गुढ़ियारी इलाके की अधिकांश पगडंडीनुमा सड़कें पिछले पांच साल में ही पक्की हुईं। इस इलाके में कुछ पानी टंकियां भी बनीं, लेकिन 22 में से 15 से ज्यादा वार्डों में पानी की किल्लत बनी हुई है। इस विधानसभा क्षेत्र के 12 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
जिस वार्ड में भाजपा के पार्षद वहां सबसे ज्यादा खर्च किए पैसे

दैनिक भास्कर ने पड़ताल में पाया कि पांच साल में जिन पांच वार्डों में सबसे ज्यादा पैसे खर्च किए गए, उनमें से सभी में भाजपा के पार्षद थे। हालांकि डीडीनगर के कांग्रेस पार्षद तथा एमआईसी सदस्य ज्ञानेश शर्मा के वार्ड में भी लगभग 24 करोड़ रुपए का काम हुआ, लेकिन इसमें ज्यादा रकम पीलिया फैलने के बाद पाइप लाइनें बदलने तथा सड़कों की मरम्मत में खर्च की गई। इस वार्ड में ज्यादा रकम खर्च होने की बड़ी वजह हाउसिंग बोर्ड कालोनी भी है। अन्यथा यहां इतनी रकम खर्च नहीं हो पाती। जहां तक कम खर्च वाले पांच वार्डों का सवाल है, इनमें भाजपा और कांग्रेस दोनों के पार्षद हैं। राजनीति के जानकारों का दावा है कि इनमें से चार वार्ड रायपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र के हैं। नगर निगम के गठन से चार साल तक इस इलाके के विधायक कांग्रेस के कुलदीप जुनेजा था। सालभर पहले ही भाजपा के श्रीचंद सुंदरानी ने उन्हें हराया है।
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