रायपुर. कबीर नगर में सौतेली मां द्वारा दो मासूम बच्चियों के साथ बुरा सलूक करने का मामला सामने आया है। मां के नाम को दागदार करती हुए महिला ने शादी के बाद से दोनों बच्चियों को इस कदर प्रताड़ित करने लगी कि उनकी पढ़ाई-लिखाई छुड़वा दिया। उन्हें भूखे-प्यासे रखकर दिनभर काम करवाती रही। जब मासूम खाना मांगते या थक जाते तो उनके हाथ-पैर बांधकर शरीर में गर्म चिमटा और चाकू से उन्हें जलाया जाता था। यह दर्दनाक खुलासा तब हुआ जब कबीर नगर क्षेत्र में बच्चियों के घर के आसपास रहने वाले लोगों ने उन्हें बचाने की पहल की। इसके बाद बुधवार की दोपहर चाइल्ड लाइन संस्था के साथ पुलिस की टीम ने कितने दिन से सौतेली मां का सितम सह रही दोनों बच्चियों को आजाद कराया गया। उनकी हालत को देखते हुए उनका इलाज अस्पताल में करवाया जा रहा है।
कबीर नगर के एमआईजी मकान नंबर 172 में रहने वाला कमल हसन मूल रूप से मेरठ का रहने वाला है। वह पेशे से कैटरिंग का काम करता है। उसके साथ घर में उसकी पत्नी अंजली और दो बच्चियां मुस्कान (11) और नाजिया (10) रहती हैं। देखने और सुनने में तो एक खुशहाल परिवार का माहौल लगता है। लेकिन इसके पीछे दर्दनाक कहानी कुछ और ही है। कमल के घर के आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने चाइल्ड लाइन संस्था जो बच्चों के लिए काम करती है से शिकायत कर बताया कि उनकी दोनों बच्चियों के साथ बहुत बुरा सलूक किया जा रहा है। उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें भूखा-प्यासा रखा जा रहा है। उनके शरीर को जला-जलाकर दागदार कर दिया गया है। इसको लेकर सप्ताहभर पहले दी गई सूचना के बाद चाइल्ड लाइन की टीम आमानाका पुलिस को लेकर कबीर नगर में रहने वाले कमल के घर बुधवार की दोपहर तीन बजे पहुंची। वहां पुलिस ने देखा कि घर में कमल की पत्नी के अलावा दोनों बच्चियां मौजूद थी। जब दोनों बच्चियों को घर से बाहर लाया गया है कि देखा गया कि उनके शरीर में कई जगह जलने के दाग दिखाई दिए।
इसके अलावा उनके शरीर में मारपीट के निशान मिले। दोनों बच्चियों से जब कुछ पूछने की कोशिश की गई तो मौके पर मौजूद उसके पिता कमल बीच में बात काटने की कोशिश करने लगा। उसे पुलिसवालों ने चुप कराते हुए जलने और मारपीट के कारण को लेकर दोनों बच्चियों से पूछा तो मुस्कान और नाजिया डरे और सहमे हुए बताया कि अम्मी ने उन्हें जलाया है। इसके बाद उन्होंने आसु बहाते हुए अपना पूरा दर्द बताया। पुलिस की टीम उसके पिता को को हिरासत में लेकर बच्चियों को चाइल्ड लाइन के दफ्तर ले आई। वहां से उन्हें अंबेडकर अस्पताल ले जाया गया। जहां उनका इलाज कराया गया।
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