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सात स्पेशलिस्ट फिर भी चालू नहीं कर रहे सुपर स्पेशलिटी

7 वर्ष पहले
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रायपुर. आंबेडकर अस्पताल में पीडियाट्रिक सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और नेफ्रोलॉजी सहित सात सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टर हैं। इसके बावजूद डीकेएस दाऊ कल्याण सिंग भवन में प्रस्तावित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चालू नहीं किया जा रहा है। पहले हालांकि यही तय किया गया था कि इन विशेषज्ञों की मदद से ही डीकेएस में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चालू किया जाएगा। अचानक प्लान ही बदल दिया गया। इससे स्वास्थ्य विभाग का अमला ही सवालों के दायरे में आ गया है।

दैनिक भास्कर ने आंबेडकर अस्पताल में सेवाएं दे रहे कुछ सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टरों को टटोला। ऑफ द रिकार्ड डाक्टरों ने कहा कि अगर उन्हें पर्याप्त स्टाफ मिले तो सुपर स्पेशलिटी विभाग क्यों नहीं संचालित कर सकते। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि आंबेडकर अस्पताल में अभी भी वे विभाग में मरीजों का इलाज तो कर ही रहे हैं। उनके लिए डीकेएस में इलाज करने में क्या दिक्कत होगी। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को लेकर शासन स्तर पर योजनाएं बन रही हैं, इसलिए विशेषज्ञ खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने आंबेडकर अस्पताल के सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टरों की दो बार बैठक ली है। इसके बावजूद अचानक ही अब उसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनशिप पीपीपी फार्मूले के तहत चलाने की चर्चा सामने आ गई।

सरकार से मदद लेने से चैरिटी ले रहा अस्पताल
एस्कार्ट हार्ट सेंटर को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप(पीपीपी)के तहत चलाया जा रहा है। सरकारी मदद से चल रहे इस अस्पताल में गरीबों को बख्शा नहीं जा रहा है। अस्पताल में संजीवनी कोष के तहत इलाज कराने आने वाले गरीब मरीजों की बिलिंग में डाक्यूमेंटेशन फीस के साथ-साथ चैरिटी तक का पैसा लिया जा रहा है। दैनिक भास्कर के हाथ कुछ गरीब मरीजों के बिल आए। उसमें बिलिंग बिलकुल निजी नर्सिंग होम के जैसी मिली। शासन की ओर से भेजे गए मरीज के साथ किसी भी तरह की रियायत नहीं बरती गई। इसी से स्पष्ट हो रहा है कि एस्कार्ट हार्ट सेंटर में को भी पीपीपी फार्मूले पर चलाने का फार्मूला गरीब मरीजों के हित में नहीं है।

शहर के डीके हॉस्पिटल को निजी हाथों में सौंपने को लेकर छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज में रोष व्याप्त है। बुधवार का समाज के पदाधिकारियों की एक बैठक हुई। दाऊ कल्याण सिंह के दान में दिए गए इस हॉस्पिटल का उद्देश्य प्रदेश की गरीब जनता का सुलभ व सस्ता इलाज मिलना है। लेकिन राज्य शासन द्वारा इसका निजीकरण करना कहीं से भी तर्कसंगत नहीं है। छत्तीसगढ़ी अग्रवाल समाज के केंद्रीय समिति के अध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने कहा कि यदि शासन हॉस्पिटल को चलाने में असमर्थ है तो उसे वापस समाज को दे दिया जाए। समाज इस हॉस्पिटल को बेहतर ढंग से चलाने में सक्षम है। पदाधिकारियों ने पहले स्वास्थ्य मंत्री इसके बाद मुख्यमंत्री से मिलने का निर्णय लिया है।

यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो समाज के लोग आंदोलन के रास्ते पर भी जाएंगे। आंदोलन के साथ ही समाज अब शासन की मनमानी के खिलाफ न्यायालय भी जाने की तैयारी कर रहे हैं। सभी जरूरी दस्तावेजों को जुटाया जा रहा है।
बदलाव से पहले पूछा तक नहीं जाता : समाज के लोगों में इस बात का भी रोष है सैकड़ों एकड़ जमीन दान में दी गई है। लेकिन शासन स्तर पर समाज को तव्वजो नहीं मिलती।

किसी भी जगह परिवर्तन के दौरान उनसे पूछा तक नहीं जाता।
शासन की मनमर्जी से समाज में आक्रोश व्याप्त है। केंद्रीय समिति के सचिव अनुराग अग्रवाल ने बताया कि डीके अस्पताल पहले सिल्वर जुबली हॉस्पिटल के नाम से चलता था। लेकिन नया प्रदेश बनने के बाद समाज की सहमति से ही इसे मंत्रालय बनाया गया था। लेकिन अब इसे पूरी तरह से चिकित्सा सुविधा के तौर पर ही उपयोग किया जाएगा। हॉस्पिटल का निजीकरण होने से गरीब व आम लोगों को इसकी सुविधा नहीं मिलेगी। समाज ऐसा नहीं होने देगा। बैठक में मुख्य रूप से केंद्रीय समिति के कोषाध्यक्ष सीके अग्रवाल, रायपुर यूनिट के संरक्षक साखी गोपाल अग्रवाल, डॉ. विठ्ठल अग्रवाल, आशिष अग्रवाल आदि शामिल रहे।

ये हैं अस्पताल के सुपर स्पेशलिस्ट
विभाग का नाम विशेषज्ञ का नाम
पीडियाट्रिक सर्जरी डा. अमीन मेमन
नेफ्रोलॉजी डा. पुनीत गुप्ता
प्लास्टिक सर्जन डा. दक्षेश शाह
न्यूरो सर्जरी डा. राजीव साहू, डा. विजय कुर्रे,
डा. अमित मुखर्जी
अंको सर्जरी डा. आशुतोष गुप्ता
न्यूरो एनस्थिसिया डा. दीपक सिंह
कार्डियोलॉजी डा. स्मित श्रीवास्तव

सुपर स्पेशलिटी चालू करने यह भी जरूरी
पैथॉलाजी सभी सुविधाओं के साथ।
रेडियोलॉजी की सारी मशीनें,
एक्स- रे से लेकर एमआरआई और सिटी स्कैन।

ऑपरेशन थियेटर- पूरी सुविधाओं के साथ।
अंकोसर्जरी के लिए लीनियर एक्सीरीलेटर।
सभी विभागों के लिए 24 घंटे ड्यूटी देने के लिए पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सें।
बाई पास सर्जरी के लिए- कैथलैब।
सुपर स्पेशलिस्ट डाक्टरों की मदद के लिए जूनियर डाक्टर।