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फोन रखना महिला रेलवे अफसर को पड़ा भारी

8 वर्ष पहले
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रायपुर. अदालत कक्ष में मोबाइल फोन को बंद या साइलेंट मोड में नहीं रखना रेलवे पुलिस की एक महिला अफसर को महंगा पड़ गया। अदालती कार्रवाई के दौरान उसके मोबाइल की घंटी दो बार बजी तो खफा जज ने इसे अवमानना करार दिया। उन्होंने रेलवे एसपी को निर्देश दिए कि महिाल अफसर के सर्विस रजिस्टर में अवमानना दर्ज कर ली जाए।
किसी पुलिस अफसर के खिलाफ जज की त्वरित कार्रवाई का यह पहला मामला है।
न्यायालयीन सूत्रों के अनुसार नारकोटिक्स से संबंधित एक मामले में शासकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) की एएसआई दया कुर्रे को अदालत ने गवाही के लिए बुलाया था। दोपहर करीब 1.30 बजे एनडीपीएस के स्पेशल जज एमडी जगदल्ला की कोर्ट में उनकी गवाही चल रही थी। इसी दौरान पुलिस अधिकारी का मोबाइल बजा। पहली बार में जज ने अफसर को फोन बंद करने के निर्देश दिए, लेकिन अफसर ने ऐसा नहीं किया। थोड़ी देर में मोबाइल फिर बजा, तो जज ने अफसर को कोर्ट में ही फटकार लगाई। रेलवे पुलिस अधीक्षक को भेजे ज्ञापन में उन्होंने एएसआई के इस आचरण को न्यायालय की अवमानना मानते हुए सेवा पुस्तिका में दर्ज करने का निर्देश दिया।
मोबाइल ले जाना बैन
न्यायालय परिसर में कोर्ट के भीतर चालू स्थिति में मोबाइल ले जाना प्रतिबंधित है। कोर्ट के बाहर भी यह निर्देश लिखा रहता है कि कक्ष में आने से पहले मोबाइल साइलेंट या बंद करें। आम लोगों से इस नियम का सख्ती से पालन कराया जाता है।