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छत्तीसगढ़ को मिला ग्यारहवां पद्मश्री

8 वर्ष पहले
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रायपुर. छत्तीसगढ़ी फिल्म कलाकार अनुज शर्मा को मिलाकर प्रदेश को ग्यारहवीं बार पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। इससे पहले दस और दिग्गज प्रतिभाओं को यह सम्मान मिल चुका है। राज्य की प्रतिभाओं ने कई क्षेत्रों में देश के प्रतिष्ठित सम्मान पद्मश्री हासिल किया है। राज्य बनने के बाद अब तक दस बार पद्मश्री सम्मान मिल चुका है। कला के साथ-साथ साहित्य, शिक्षा और मेडिकल क्षेत्र में भी यह सम्मान हासिल हुआ है। इसके अलावा एक ही वर्ष में दो महिलाओं को समाज सेवा के लिए पद्मश्री से नवाजा गया।
इनमें राजनांदगांव की फूलबासन बाई यादव और गुंडरदेही की शमशाद बेगम शामिल हैं। फूलबासन को महिलाओं को स्वरोजगार के लिए स्व सहायता समूहों से जोड़ने के लिए और शमशाद बेगम को महिलाओं की साक्षरता के लिए यह सम्मान दिया गया था। सबसे पहला सम्मान शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. एटी दाबके को 2004 में मिला। इसके बाद शिशु रोग विशेषज्ञ राजनांदगांव के पुखराज बाफना को भी यह सम्मान हासिल हुआ। सूफी गायन के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध भारती बंधुओं को पिछले साल ही पद्मश्री से नवाजा गया था। सबसे ज्यादा चार बार कला के क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धि और योगदान के लिए छत्तीसगढ़ को पद्मश्री हासिल हुआ है।
एक नजर में
नाम क्षेत्र वर्ष
-डॉ. एटी दाबके मेडिसिन 2004
-पूनाराम निषाद कला 2005
-डॉ. महादेव पांडे साहित्य 2007
-जॉन मार्टिन नेल्सन कला 2008
-गोविंदराम निर्मलकर कला 2009
-डॉ. सुरेंद्र दुबे साहित्य 2010
-पुखराज बाफना पीडियाट्रिक्स 2011
-शमशाद बेगम समाज सेवा 2012
-फुलबासन यादव समाज सेवा 2012
-भारती बंधु कला 2013