रायपुर/बिलासपुर. जोन को देश की पहली ऐसी रिलीफ वैन (स्पार्ट) मिली है, जिसके लिए अलग इंजन की जरूरत नहीं होगी। वैन में घायलों को तत्काल राहत देने के लिए एयरकंडीशन ऑपरेशन थियेटर सहित दूसरे उपकरण हैं तो स्टाफ कोच में फुली फर्निश्ड किचन की भी व्यवस्था है। टूल वैन में राहत-बचाव के दौरान जरूरत पड़ने वाले तमाम उपकरण हैं। तीन बोगियों वाली स्पीड सेल्फ प्रोपेल्ड एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन (स्पार्ट) दो दिन पहले ही इंडियन कोच फैक्ट्री चेन्नई से बिलासपुर भेजी गई है।
नई रिलीफ वैन को रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) ने डिजाइन किया है। इंडियन कोच फैक्ट्री चेन्नई में इस पहली वैन को तैयार करने में 5 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसकी खासियत यह है कि इसे दुर्घटनास्थल के लिए रवाना होने में चंद मिनट ही लगेंगे। वैन के पहुंचते ही घायलों को मौके पर इलाज व अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी। वैन को दुर्घटना होने पर पड़ने वाली जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
तीन कोच वाली रिलीफ वैन में दोनों छोर पर इंजन है। इससे यह वैन सूचना मिलते ही मौके के लिए रवाना कर दी जाएगी। इंजन डीजल से चलने वाला है। इससे यह चिंता भी नहीं रहेगी कि मौके पर ओएचई (बिजली तार) तो नहीं टूटा है। वैन की रफ्तार क्षमता 105 किलोमीटर प्रति घंटा है, यानी दूरी तय करने में भी यह काफी तेज है।
..इसलिए पड़ी जरूरत
दुर्घटना होने पर घायल यात्रियों को रहता पहुंचाना भारतीय रेल की पहली जिम्मेदारी है। रेल प्रशासन दुर्घटना से एक घंटे के समय को गोल्डन ऑवर मानता है और कोशिश रहती है कि इस समय में अधिक से अधिक घायलों को मेडिकल सुविधा मिल जाए। पुरानी रिलीफ वैन से यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा था। दरअसल पुरानी वैन में इंजन की सुविधा नहीं है। दुर्घटना की सूचना मिलने पर पहले इंजन की व्यवस्था की जाती है। वैन को एक से दूसरी दिशा में ले जाने के लिए इंजन को दूसरे छोर पर जोड़ने की जरूरत पड़ती है। इसमें भी घंटेभर का समय लगता है। नई रिलीफ वैन में ये दिक्कतें नहीं रहंेगी।
एक और वैन मिलेगी
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने अपने और पड़ोसी जोन के संवेदनशील सेक्शन को ध्यान में रखकर दो स्पॉर्ट की डिमांड की है। रेल मंत्रालय ने इसे स्वीकार भी कर लिया है। एसईसीआर के डिप्टी जनरल मैनेजर (जी.) राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जोन को पहली अत्याधुनिक रिलीफ वैन मिल चुकी है। इसी तरह के दूसरी रिलीफ वैन भी मांगी गई है, जिसके जल्द ही आने की उम्मीद है।
मेडिकल वैन
इंजन के बाद की बोगी सबसे महत्वपूर्ण है, जिसे ‘मेडिकल वैन’ का नाम दिया गया है। इसमें एयरकंडीशन्ड ऑपरेशन थियेटर है। इसके अलावा घायलों को दी जाने वाली प्रारंभिक एवं जरूरी उपचार के लिए तमाम उपकरण भी हैं।
स्टाफ वैन
मेडिकल वैन के पहले वाले कोच को ‘स्टाफ वैन’ का नाम दिया गया है। यहां फुल फर्निश्ड किचन की व्यवस्था की गई है, ताकि राहत-बचाव में जुटे कर्मचारियों को मौके पर भोजन मिल सके।
टूल वैन
तीसरी बोगी ‘टूल वैन’ है। नाम से ही स्पष्ट है कि इसमें वे तमाम उपकरण मौजूद हैं, जो किसी हादसे के दौरान राहत-बचाव और सुधार कार्य के लिए जरूरी हैं। कर्मचारी इस वैन से टूल लेकर काम में जुट जाएंगे।
नई और पुरानी वैन में अंतर
- इंजन जोड़ने की जरूरत नहीं, मौके के लिए तत्काल रवाना होगी।
- 105 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से मौके पर पहुंचेगी।
- अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर में घायलों को तत्काल राहत मिल सकेगी।
- स्टाफ वैन में किचन से मौके पर खाना-नाश्ता बन सकेगा।
- जरूरी उपकरणों वाली टूल वैन से राहत-बचाव में तेजी आएगी।
- आगे बढ़ने के लिए इंजन की जरूरत होती है।
- दिशा बदलने पर दूसरे छोर में इंजन लगाने की जरूरत। टूल वैन नहीं।
- सामान्य सुविधाओं वाली मेडिकल वैन।
- अधिकतम स्पीड 80 किलोमीटर प्रति घंटा।
- खाना-नाश्ता तैयार करने की सुविधा नहीं।
- टूल वैन में राहत-बचाव के अत्याधुनिक उपकरणों की कमी।