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साह‍ित्‍यकार वाजपेयी ने हिंदी को बताया तानाशाह, कहा नहीं हो सकती राष्ट्रभाषा

6 वर्ष पहले
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रायपुर. हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार अशोक वाजपेयी ने हिंदी को तानाशाह भाषा बताया है। तीन दिनी रायपुर साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन शनिवार को उन्होंने कहा कि हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं हो सकती। हिंदी में बड़ा भारी दिग्भ्रम व्याप्त है कि वह राष्ट्रभाषा है। ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि हिंदी राष्ट्रभाषा है। हालांकि, हिंदी भाषी लोग इसके राष्ट्रभाषा होने के लिए महात्मा गांधी का उद्धरण देने के लिए पिल पड़ते हैं। वाजपेयी ने इस दौरान कुछ उदाहरण भी दिए। उन्होंने कहा-कोई भी एक वचन नहीं होता, बहुवचन होता है। हालांकि शुरुआत एक वचन से होती है, फिर वह बहुवचन में बदल जाता है।
एक वचन हमेशा तानाशाह होता है और यही हिंदी भाषा के साथ हो रहा है। किसी एक भाषा को कैसे राष्ट्रभाषा बनाया जा सकता है। हिंदी का राष्ट्रभाषा बनाना उसको तानाशाह बनाना है, जबकि हिंदुस्तान में बहुत भाषाएं बोली और समझी जाती हैं। देश की सभी भाषाएं राष्ट्रभाषाएं हैं और उन सभी का उत्सव मनाया जाना चाहिए। वाजपेयी ने ये बातें भारतीय भाषाएं और भारतीयता विषय पर चर्चा के दौरान कही।
गजानन माधव मुक्तिबोध मंडप का सार

मुक्तिबोध मंडप में शनिवार को हबीब तनवीर का रंगलोक, काव्य पाठ, लोकतंत्र और साहित्य, सुभाष घई से बातचीत, रंगमंच के सितारों से बातचीत और भक्तिकाव्य- समकालीन पाठ की तलाश विषय पर सेशन आयोजित किए गए, जिसमें अतिथियों ने अपने विचार रखे। जहां प्रभाकर श्रोत्रिय बिना किसी भेदभाव के विकास के रूप में आजादी मिलने को सच्चा लोकतंत्र बताया। वहीं नंदकिशोर आचार्य ने कहा कि व्यक्ति की आजादी का सम्मान करना है सच्चा लोकतंत्र है।
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी मंडप का सार

बख्शी मंडप में दूसरे दिन के सेशन में उपन्यास और नया जीवन यथार्थ, साहित्य और कलाओं की अंतर्निभरता, साहित्य की बीसवीं शताब्दी, भारतीय भाषाएं और भारतीयता, नए दौर में पत्रकारिता और छत्तीसगढ़ का नया परिवेश-सहुलियतें और चुनौतियां जैसे गंभीर विषयों पर विद्वानों ने अपने विचार रखे। संजीव बख्शी ने कहा कि मानव जीवन के विकास के लिए कई रास्ते बन रहे हैं। वहीं एक अन्य वक्ता तेजिंदर ने कहा कि हम एक परस्पर विरोधाभाषी समाज में जी रहे हैं।
मुकुटधर पाण्डेय मंडप का सार
छत्तीसगढ़ के आधुनिक साहित्य में नया भावबोध, छत्तीसगढ़ के रंगमंच, छत्तीसगढ़ी की लोक कथाओं का कथा-कथन, साहित्य में लोकप्रियता की खोज, काव्य पाठ और साहित्य और सिनेमा पर आयोजित सेशन में वक्ताओं के विचार सुनने को मिले। हबीब तनवीर मंडप : हबीब तनवीर मंडप में साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन भी इस्माईल लहरी और त्रयम्बक शर्मा ने कार्टूनिंग पर कार्यशाला आयोजित की, जिसमें अतिथियों ने विषय से संबंधित बारीकियों को बखूबी समझाया।

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