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पंचायत चुनावों में हार की वजह वास्तुदोष, फिर बना भाजपा में चर्चा का विषय

6 वर्ष पहले
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रायपुर। नगरीय निकायों और पंचायत चुनावों में कई प्रमुख सीटों पर मिली हार के बाद भाजपा के नए प्रदेश दफ्तर का कथित वास्तुदोष फिर पार्टी में चर्चा का विषय बन गया है। पुराने कार्यालय से नए कार्यालय में शिफ्ट हो चुके संगठन के एक प्रमुख पदाधिकारी इन चर्चाओं के बीच ही वापस पुराने कार्यालय एकात्म परिसर में अपना आशियाना बनाने जा रहे हैं। 7 करोड़ की लागत से बोरिया कला में तैयार किया गया भव्य भाजपा कार्यालय पार्टी को रास नहीं आ रहा है, यह चर्चा पार्टी हल्कों में तेजी से घर कर गई है।

खासकर नगरीय निकाय और पंचायत में हार के बाद यह माना जा रहा है कि वास्तुदोष के कारण ही पार्टी की किरकिरी हो रही है। उसे अशुभ बताने वालों की तादाद बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि संगठन संभालने वाले बड़े नेता ने कह दिया है कि मेरा सामान वापस ले आओ। भाजपा के दूसरे बड़े नेताओं में भी कुशाभाऊ ठाकरे परिसर को लेकर मंथन हो रहा है। यह माना जा रहा है कि पार्टी की बैठकें अब फिर से यहीं करने का सिलसिला भी इसी वजह से शुरू किया गया है।
मालूम हो कि वास्तुदोष को लेकर एक विशेषज्ञ की टिप्‍पणी के बाद घबराई भाजपा ने यहां आने में पहले ही दो साल लगा दिए थे। वास्तुदोष दूर करने सबसे पहले एक दीवार का स्थान बदला। फिर जानकार की सलाह पर ही यहां का मुख्य प्रवेश भी मेन रोड से हटाकर बाजू वाली सड़क की ओर कर दिया गया। पार्टीजनों को लगता है कि इसके बावजूद कुछ रह गया है। बहरहाल इसकी काट ढूंढी जा रही है। तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस मुख्यालय का लोकार्पण किया था। तब बताया गया था कि इसकी लागत करीब सात करोड़ रुपए है। कार्यकर्ताओं ने स्वयं का चंदा करके नौ करोड़ रुपए जमा किए हैं। दैनिक भास्कर ने इस बारे में कई नेताअों और कार्यकर्ताओं से बात की उनका मानना था कि नए कार्यालय में अपनेपन का आभास नहीं होता।
सरकारी दफ्तर जैसा लगता है। बारह से आने वाले कार्यकर्ता व नेता भी एकाध बार घूमने-देखने के नाम से ही कार्यालय पहुंचते हैं फिर इधर का रुख नहीं करते। जबकि पुराने में राजधानी आने पर एक चक्कर जरूर लगा जाते थे। बड़े कार्यालय में भटकते रहते हैं पता नहीं चलता कि कहां जाएंगे तो कौन मिलेगा।