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स्मार्ट कार्ड में जीरो बैलेंस तो घबराएं नहीं, स्वैप करते ही आएंगे 30 हजार

6 वर्ष पहले
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रायपुर. हेल्थ स्मार्ट कार्ड नया नहीं बना और आपके कार्ड का बैलेंस शून्य हो चुका है, तो चिंता की बात नहीं है। जरूरत पड़ने पर किसी भी अस्पताल में कार्ड लेकर चले जाएं। भर्ती होने के बाद जैसे ही उसे अस्पताल के स्मार्ट कार्ड सिस्टम में स्वैप किया जाएगा, कार्ड में 30 हजार का बैलेंस आ जाएगा। उसके बाद इलाज में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी, स्मार्ट कार्ड से फ्री इलाज हो जाएगा।

हेल्थ स्मार्ट कार्ड के नवीनीकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने यही सिस्टम बनाया है। स्मार्ट कार्ड जिन्हें पिछले साल मिला है, नियमानुसार 1 जनवरी को उसका नवीनीकरण होना था। इसके लिए अक्टूबर-नवंबर से कवायद चालू कर दी गई थी। इसी दौरान नए स्मार्ट कार्ड बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। नए कार्ड बनवाने के लिए आवेदन लेकर उसका सर्वे किया गया। इसमें समय गुजर गया और स्मार्ट कार्ड का नवीनीकरण नहीं किया जा सका। लोगों को दिक्कत न हो इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने स्मार्ट कार्ड के स्वत: नवीनीकरण का सिस्टम बनाया। इसके तहत स्मार्ट कार्ड का बैलेंस शून्य ही क्यों नहीं हो गया है, किसी भी अस्पताल में मरीज के भर्ती होने के बाद जैसे ही उसे स्मार्ट कार्ड की मशीन में एंटर किया जाएगा, उसमें 30 हजार का सरकार द्वारा तय किया गया पैकेज अपने आप आ जाएगा।
38 लाख पुराने कार्ड : राज्य में अभी 38 लाख परिवार के हिसाब से इतने ही कार्ड हैं। 31 दिसंबर को 9 प्रमुख जिलों के कार्ड के मान्य रहने की मियाद पूरी हुई और 1 जनवरी से नया पैकेज चालू हुआ। बाकी जिलों में कार्ड की मियाद अभी बाकी है। अफसरों ने बताया कि उन जिलों में भी यही सिस्टम लागू रहेगा।
58 लाख बनाने का लक्ष्य : इस सत्र में करीब 20 लाख यानी कुल 58 लाख कार्ड बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए कागजी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। जिलेवार नाम जुड़वाने वालों का आवेदन कलेक्ट कर दिल्ली भेजा गया था। वहां से लिस्ट आ चुकी है। अब उस लिस्ट के हिसाब से वार्ड वार कैंप लगाकर नए हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनाए जाएंगे।
स्मार्ट कार्ड यानी फ्री इलाज
केंद्र और राज्य शासन ने सभी को इलाज मुहैया कराने के लिए हेल्थ स्मार्ट कार्ड जारी किया है। प्रत्येक कार्ड में 30 हजार का पैकेज तय किया गया है। कार्ड में सभी बीमारियों और सर्जरी के लिए पैकेज तय है। सरकारी और प्राइवेट अस्पताल को इसी पैकेज में उतनी ही फीस पर मरीजों का इलाज करना अनिवार्य है। इसी के अनुसार उनसे अनुबंध किया गया है।