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मनमानी: रोस्टर ताक पर और आपत्तियों की सुनवाई भी नहीं

5 वर्ष पहले
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जिला पंचायत में शुक्रवार को वर्ग-3 से वर्ग-2 में होने वाले प्रमोशन के लिए काउंसिलिंग हुई। इसमें रोस्टर का पालन नहीं होने की बात सामने आई। प्रमोशन लिस्ट में भी इसे साफ देखा जा सकता है। नियमों के मुताबिक अनारक्षित, ओबीसी, एसटी और एससी कोटे की सीटों को आरक्षित रखा गया है। इसके बावजूद जिला पंचायत में इसे ताक में रखकर काउंसिलिंग हुई। इसे लेकर शुक्रवार को हंगामा भी मचा। लेकिन अंदर काउंसिलिंग जारी रही। देर शाम इसे पूरा भी कर लिया गया। यानी शिक्षाकर्मियों की आपत्तियों पर ध्यान नहीं दिया गया। अब शिक्षाकर्मी इसे लेकर जिला प्रशासन से शिकायत करने की तैयारी में है।

मिली जानकारी 274 पदों के लिए काउंसिलिंग हुई। इसमें कला, गणित और विज्ञान विषय को शामिल किया गया है। सुबह जिला पंचायत में काउंसिलिंग शुरू हुई। शिक्षाकर्मियों के बीच रोस्टर पर चर्चा शुरू हो गई। शिक्षाकर्मी संजय राजपूत ने बताया कि सीधी भर्ती की तरह प्रक्रिया अपनाई गई। जैसे मैरिट बेस पर लिस्ट तैयार की जाती है। उसी तरह किसी ब्लाक में 50 पद रिक्त हैं तो एक साथ सभी को वहीं भेज दिया गया। रोस्टर के हिसाब से रिजर्वेशन को ध्यान में रखना था। दोपहर तकरीबन डेढ़ बजे शिक्षाकर्मियों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया, लेकिन सभाकक्ष में कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

जिला पंचायत के सभाकक्ष में हुई शिक्षाकर्मियों की काउंसिलिंग।

इस पर नजर डालें
कला संकाय में 110 शिक्षाकमियों को लिया जाना था। लेकिन इसमें 52 ही लिए गए। इसमें भी सामान्य को 8 और ओबीसी कोटे में 44 शिक्षाकर्मी शामिल हैं। इसके बाद शेष 58 पदों पर एसटी और एससी कोटे को दे दिया। जबकि अन्य जगहों व विषयों पर वे आरक्षण पा रहे हैं। इस तरह रोस्टर के नियमों का पालन नहीं किया गया। यानी अनारक्षित पर भी एसटी-एसटी की काउंसिलिंग हुई। इसके बाद अधिकारी रोस्टर के मुताबिक प्रक्रिया का पूरा करने की बात कर रहे हैं।

जिला पंचायत में काउंसिलिंग के दौरान सभाकक्ष के बाहर शिक्षकों का हंगामा
यह कहता है नियम
रोस्टर के अनुसार अनारक्षित, एसटी, एससी और पिछड़ा वर्ग सभी के लिए पद आरक्षित होते हैं। जैसे पदों के अनुसार 56 फीसदी अनारक्षित-ओबीसी, 32 प्रतिशत एसटी और 12 प्रतिशत एससी कोटे के लिए होता है। इस हिसाब से ही प्रमोशन में सभी कोटे के शिक्षाकर्मियों को स्थान मिलना था। लेकिन आपत्ति के बाद भी अधिकारियों ने कोई स्पष्ट जानकारी शिक्षाकर्मियों को नहीं दी। वहीं दूसरी तरफ पूरे पदों पर काउंसिलिंग कर दी गई।

अध्यक्ष का साइन नहीं
काउंसिलिंग व अन्य विषयों को लेकर 19 जनवरी को जिला पंचायत में सामान्य प्रशासन की बैठक हुई। इसमें जिले के रिक्त पदों की सूची मांगी गई। जो अब तक जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद कार्रवाई विवरण में अध्यक्ष चित्रलेखा वर्मा ने हस्ताक्षर ही नहीं किए हैं। चित्रलेखा ने बताया कि नियमानुसार अध्यक्ष का पहले साइन होना चाहिए। ऐसा हुआ ही नहीं और सीईओ एसए तायल ने किस आधार पर काउंसिलिंग की तारीख तय कर दी। इसलिए यह काउंसिलिंग ही मान्य नहीं है। इस प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग की।

नियमानुसार हुई प्रक्रिया
कांउसिलिंग में नियमों का ध्यान रखा गया है। रोस्टर के अनुसार ही प्रक्रिया पूरी की गई है। अगर किसी को आपत्ति हैं तो उनकी समझ की बात है। उन्हें रोस्टर की जानकारी नहीं होगी। इसमें कहीं कुछ गलत नहीं हुआ है। बीएल कुर्रे, जिला शिक्षा अधिकारी, राजनांदगांव

यहां के पद दिखाए ही नहीं
काउंसिलिंग में मोहला, मानपुर और अंबागढ़ चौकी के रिक्त पदों को दिखाया नहीं गया। जबकि उस इलाके के कई शिक्षाकर्मी काउंसिलिंग में पहुंचे थे। उन्हें छुईखदान और छुरिया ब्लाक में भेजा गया। जबकि वनांचल के गांवों में तकरीबन 200 पद खाली है। उन्हें काउंसिलिंग में दिखा जाता तो वे भी भरे जा सकते थे। बताया गया कि आमतौर पर मैदानी हिस्सों के कर्मचारी वनांचल में ज्वाइन नहीं करते, ऐसे कई उदाहरण जिला प्रशासन के पास मौजूद हैं। इसलिए वनांचल के कर्मचारियों को वहां पदस्थापना दी जा सकती है। इस बात पर भी काफी चर्चा हुई।

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