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वर्ग-तीन के जूनियर शिक्षकों काे सीनियर बताकर प्रमोशन

5 वर्ष पहले
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केस 3
केस 2
केस 1
जिला पंचायत में प्रमोशन के लिए हुई काउंसिलिंग की मनमानी सामने आने लगी है। इसमें वर्ग-3 के जूनियर शिक्षाकर्मियों को सीनियर बताकर प्रमोशन के दायरे में ले लिया गया। वहीं एक शिक्षाकर्मी को नगर पंचायत में पदस्थापना दे दी गई, जबकि नगर पंचायत में प्रमोशन की पदस्थापना का अधिकार जिला पंचायत को है ही नहीं। इस तरह का काम काउंसिलिंग में किया गया। इस कारण इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

किसी अन्य जिले या ब्लॉक से दूसरे स्थान पर आए शिक्षाकर्मियों को नई पदस्थापना के हिसाब से ही सीनियर माना जाएगा। कोई शिक्षाकर्मी दुर्ग से राजनांदगांव 2005 में आया है तो उसकी सीनियारिटी राजनांदगांव जिले में 2005 से आंकी जाएगी, न कि दुर्ग जिले में उसकी ज्वाइनिंग की। काउंसिलिंग में इसे दरकिनार कर दिया गया। नगर पंचायत में पदस्थापना का अधिकार जिला पंचायत को है ही नहीं। मामले में अधिकारियों ने माेहला से आए शिक्षाकर्मी को छुरिया पंचायत ला लिया, जबकि ऐसा नहीं हो सकता।

राजनांदगांव| स्थानीय शिक्षाकर्मियों ने प्रक्रिया का विरोध किया।

नगर पंचायत में ही कर दी पदस्थापना: इसके अलावा काउंसिलिंग में नगर पंचायत में पदस्थापना कर दी गई। बालकृष्ण सेन मोहला में पदस्थ थे। उन्हें प्रमोशन काउंसिलिंग में सीधे छुरिया नगर पंचायत में भेज दिया गया, जबकि जिला पंचायत से नगर पंचायत में पदस्थापना नहीं की जा सकती। अधिकारी इसे नियमों के तहत बता रहे हैं। इधर जिला पंचायत के जनप्रतिनिधि इन मनमानियों को लेकर शिकायत की तैयारी में हैं।

दूसरे जिले से आई, प्रमोशन मिला: बेमेतरा में पदस्थ नीता कुंजाम ने 25 जून 2004 को राजनांदगांव ब्लॉक के ग्राम बैगाटोला में स्थानांतरण करा लिया। इसके बाद से नीता यहीं ड्यूटी कर रही है। प्रमोशन की बारी आई तो उन्हें छुरिया ब्लाक के पिनकापार में पदस्थापना दे दी गई। नीता भी कला संकाय से है। इसलिए सीनियारिटी का पैमाना इस पर भी नहीं दिख रहा है। फिर किस आधार पर प्रमोशन उन्हें दिया गया। यह बड़ा सवाल है।

प्रमोशन के दायरे में लिया: रेशलाल नेताम छुरिया ब्लॉक में पदस्थ थे। 31 जुलाई 2010 को उनका ट्रांसफर राजनांदगांव ब्लाक के ग्राम धामनसरा में किया गया। रेशलाल कला संकाय है। इसलिए 2010 में वरिष्ठता के पैमाने पर भी वह फिट नहीं है। इसके बाद काउंसिलिंग में उन्हें प्रमोशन दे दिया गया। वहीं उनकी पदस्थापना खैरागढ़ ब्लॉक के ग्राम उरई डबरी में कर दी गई। यह किस नियम के तहत किया गया, समझ से परे है।

जिला पंचायत में शुक्रवार को हुई काउंसिलिंग, नियम दरकिनार
ये है पूरा मामला
तकरीबन 10 साल के बाद शिक्षाकर्मी वर्ग-3 से वर्ग-2 में प्रमोशन हुआ। इसके लिए 12 फरवरी को जिला पंचायत में काउंसिलिंग आयोजित की गई। 274 पदों पर काउंसिलिंग को लेकर पहले आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया। इस पर शिक्षाकर्मियों ने आपत्ति की तो अधिकारियों इस पर ध्यान नहीं दिया। अब दूसरे दिन प्रमोशन लिस्ट जारी हुई तो सामने आया कि कई पदस्थापना नियमों को दरकिनार कर की गई। इसलिए पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठता नजर आ रहा है।

13 फरवरी को प्रकाशित खबर

त्रुटि हुई है तो संशोधन कर लिया जाएगा
मैने सूची नहीं देखी है। वरिष्ठता और नगर पंचायत में पदस्थापना को लेकर किसी तरह की त्रुटि हुई तो संशोधन किया जाएगा। शिव अनंत तायल, सीईओ, जिला पंचायत

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