पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • जंगल का दौरा किया नहीं, मुख्यालय में प्लानिंग कर लौट गए डीजी

जंगल का दौरा किया नहीं, मुख्यालय में प्लानिंग कर लौट गए डीजी

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
स्पेशल डीजीपी डीएम अवस्थी सोमवार को शहर के दौरे पर रहे। एसपी दफ्तर के एसी रूम में पुलिस अधिकारियों की बैठक हुई। पिछले एक साल पर नजर डालें तो पुलिस की रणनीति फेल ही साबित हुई है। उस पर कुछ देर मीटिंग में चर्चा हुई। इसके बाद माओवादियों के खिलाफ अब क्या स्ट्रेटजी होगी, इस पर डीजी अवस्थी ने अधिकारियों को बताया।

ये पूरी प्लानिंग एसी कमरे में बैठकर हुई, जबकि नक्सल प्रभावित एरिया की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। वहां पहुंचने के बजाय डीएम अवस्थी सीधे रायपुर के लिए रवाना हो गए। पहले ऐसा कयास लगाया जा रहा था कि अधिकारियों की मीटिंग के बाद नक्सल एरिया का निरीक्षण किया जाएगा। क्योंकि अभी जिले में माओवादियों की चहलकदमी जिले में काफी हो रही है। लगातार माओवादियों का उत्पात भी उसका सबूत है। खासकर साल्हेवारा एरिया में माओवादियों की मौजूदगी को नकारा नहीं जा सकता। इसलिए जवानों की हौसलाफजाई के लिए डीजी के पहुंचेंगे ऐसा विभाग में भी चर्चा थी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अब देखना होगा कि नक्सल फ्रंट पर पुलिस क्या बदलाव लाती है और माओवादियों पर जंगल में कैसा दबाव बनाया जाता हैω

राजनांदगांव. पुलिस के जिला कार्यालय में हुई मीटिंग, अधिकारियों को डीजी ने दिए कई निर्देश

डीजी ने यह निर्देश भी दिए
जंगल में सर्चिंग तेज करने की बात डीजी अवस्थी ने कही। इसके अलावा ग्रामीणों ने बेहतर तालमेल रखने की बात कही। साथ ही ट्राइजंक्शन छग, महाराष्ट्र और बालाघाट के इलाकों में ज्यादा से ज्यादा ज्वाइंट आॅपरेशन करने के निर्देश उन्होंने दी। अवस्थी ने कहा कि जंगलों की लगातार सर्चिंग की जाए। बताया गया कि कंट्रोल रूम की मीटिंग में एसपी प्रशांत अग्रवाल, नक्सल ऑपरेशन एएसपी वायपी सिंह, एएसपी मानपुर कीर्तन राठौर,प्रशिक्षु आईपीएस सूरज कुमार, एसडीओपी अभिषेक वर्मा, गोपीचंद मेश्राम व अन्य मौजूद रहे।

रणनीति इसलिए है फेल
जिले में माओवादियों ने लगातार वारदातें की, इसलिए पुलिस की रणनीति को फेल माना जा रहा है। पुलिस को पिछले एक साल में कोई बड़ी सफलता नहीं मिल पाई है। पुलिस के रिपोर्ट कार्ड में भी यह जाहिर है, पुलिस ने नक्सल एरिया के निर्माण कार्यों को अपनी उपलब्धि गिनाया है। वहीं पल्लेमाड़ी माइंस में उत्पात, मैनेजर की हत्या, गातापारा में छात्र का मर्डर, भोजली-भोजारी में वाहनों को फूंका, भावे में एनकाउंटर में जवान शहीद और फिर औंधी में वाहनों को जलाना। चिरचारी में माओवादियों ने एएसआई को मार दिया। रणनीति बेहतर होती तो उन्हें जंगल से बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिलता।

खबरें और भी हैं...