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दुग्ध उत्पादन: पांच सालों में आत्मनिर्भर बनेगा छत्तीसगढ़

5 वर्ष पहले
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छत्तीसगढ़ को अब दुग्ध उत्पादन में अगले पांच सालों में सरप्लस स्टेट बनाने की प्लानिंग की जा रही है। इस प्लानिंग महिलाओं को आगे लाने का प्रयास किया जा रहा है। प्लानिंग में महिलाओं को 30 फीसदी भागीदारी बढ़ाने की बात कही गई है। इसके लिए राज्य शासन ने अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। इसके लिए सभी कलेक्टरों को आदेश भी जारी कर दिया गया है। जल्द ही जिले स्तर पर इसका काम भी शुरू कर दिया जाएगा।

मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में दुग्ध महासंघ में 57 समितियां हैं। इनमें महिलाओं की संख्या 3017 है। प्रदेश में पहले टास्क फोर्स का गठन किया गया। ताकि दुग्ध उत्पादन में सरप्लस करने का काम किया जा सके। इसके बाद प्लानिंग बनाई गई। फोर्स ने जो अनुशंसा की है, उसके अनुसार महिलाओं को इससे अधिक जोड़ा जा रहा है। क्योंकि ग्रामीण इलाकों में दूध देने वाले पशुओं की देखभाल परिवार के महिलाएं अधिक रहती है। इसलिए महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जा रहा है।

दी जाएगी विशेष रियायत

इसके अलावा महिलाओं को इस कारोबार के लिए विशेष रियायत भी दी जाएगी। यह रियायत कितनी होगी, यह अभी तय किया जाना है। हालांकि आने वाले समय में इस उत्पादन के क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा महिलाएं शामिल होंगी, यह तो तय है।

दूध एकत्र करने के लिए वाहन व अन्य सुविधाएं भी दी जाएंगी
दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने के अलावा इस प्लानिंग में दूध एकत्रीकरण के लिए वाहन, मोबाइल एम्बुलेटरी की भी व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा दूध शीत केंद्र, पशु चिकित्सालय और औषधालय की सुविधा भी होगी। ताकि पशुपालकों को इस काम के लिए कहीं भटकना न पड़े। इस पर भी फोकस करने कहा गया है। वहीं अधोसंरचना के काम भी इस योजना के तहत किए जाएंगे।

राेजगार गारंटी योजना के तहत कराए जाएंगे काम
दुग्ध उत्पादन से संबंधित कामों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत जोड़ा जाएगा। इसमें पशुओं के लिए शेड, यूरीन टैंक व अन्य कामों को स्वीकृति देकर पूरा कराया जाएगा। इसके लिए जिले के सभी इलाकों में प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा। ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस काम से जोड़ा जा सके। इस काम की जिम्मेदारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को दी गई है।

राज्य सरकार ने अलग-अलग विभागों को दी जिम्मेदारी
दुग्ध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा

दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में लोगों को प्रोत्साहित किया जाएगा। निर्देशों के अनुसार बेहतर काम करने की प्लानिंग तैयार की जा रही है। इसका प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा।’’ मुकेश बंसल, कलेक्टर

जिले में 30 हजार लीटर की खपत
राजनांदगांव जिले में डेयरियों की कमी है। देखा जाए तो आधा दर्जन बड़ी डेयरियां की मौजूद है। जबकि दूध की खपत लगातार बढ़ रही है। डेयरी संचालकों की माने तो हर दिन पूरे जिले में 30 हजार लीटर दूध की खपत होती है। इसकी पूर्ति जिले से नहीं हो पाती। इसलिए पैकेट और गोंदिया, रायपुर से दूध की सप्लाई होती है। इसलिए भी प्रदेश में डेयरी उद्योग को बढ़ाया देने के लिए यह प्लानिंग की जा रही है।

फसल क्षति की तर्ज पर मुआवजा
इस प्लानिंग में चरनोई भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की बात भी कही गई है। ताकि पशुपालन के कामों में किसी तरह दिक्कत न आए। इसके अलावा जिस तरह फसल क्षति पर किसानों को मुआवजा उसी तर्ज पर दिया जाएगा। इसके लिए चारा उत्पादन ईकाई की वार्षिक क्षति पर आंकलन किया जाएगा। ताकि पशुपालकों को हर तरह की सुविधा मिल सके। इसके लिए भी प्रशासन को निर्देशित किया गया।

जिले में हर दिन 30 हजार लीटर दूध की खपत हो रही है।

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