मेडिकल अस्पताल की व्यवस्था में सुधार नहीं
जिला अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए एनएसयूआई के प्रदर्शन बाद अधीक्षक डॉ. प्रदीप बेक ने सात दिनों के भीतर एक्शन लेने लिखित आश्वासन दिया, लेकिन पांच दिन बाद स्थिति जस की तस है। मरीजों को गेट से वार्ड तक ले जाने वाला कोई नहीं रहता।
अस्पताल में डॉक्टरों के चैम्बर के बाहर मरीजों के बैठने के लिए सीट की कोई व्यवस्था नहीं है। मरीजों को डॉक्टर के चैम्बर के बाहर घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ता है। इससे नि:शक्त मरीजों को काफी दिक्कत होती है। इसके साथ ही अस्पताल के कैंटिन में भी बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। मरीज के परिजनों को खड़े होकर खाना खाना पड़ता है। इसके साथ ही अस्पताल के वार्ड तो दूर कैंटिन में भी गंदगी की नियमित सफाई नहीं हो पाती है।
अस्पताल के भीतर पार्किंग: अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था की स्थिति बदहाल होने की वजह से लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। अस्पताल के कर्मचारी व डॉक्टर ही गाड़ियों की पार्किंग मनमाने तरीके से करते है। कुछ डॉक्टर व कर्मचारी अपनी गाड़ियों की पार्किंग अस्पताल भवन के अंदर ही करते है। इससे यहां पर आने-जाने वाले मरीजों को काफी दिक्कत होती है। फिर भी अधिकारियों ने कार्रवाई नहीं की।
व्यवस्था बनाने पूरा प्रयास
अस्पताल में व्यवस्था बनाने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। सफाई कर्मचारियों की कमी होने की वजह से थोड़ी दिक्कत हो रही है। फिलहाल पार्किंग व्यवस्था को सुधारने की पहल की जा रही है। डॉ. केके सहारे, अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज
ये अस्पताल की अव्यवस्था
पंजीयन काउंटर की कमी की वजह से मरीजों को घंटों खड़े रहना पड़ता है।
वार्ड बॉय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं होने से परिजन स्ट्रेचर खींचते हैं।
पुरुष मेडिकल-सर्जिकल वार्ड में टायलेट में दरवाजा ही नहीं है।
बताया गया कि अस्पताल में प्रसव वार्ड का शौचालय जाम है। इससे प्रसव वार्ड में माताओं के साथ-साथ बच्चों में भी संक्रमण फैल रहा है।
राजनांदगांव|कैंटिन में न ही सफाई है और न ही बैठने की सुविधा।