बीमा के नाम पर किसानों के कर्ज में जोड़ दिए गए 6 करोड़ 79 लाख
बीमा करने न किसानों से पूछा और न ही बताया, बीमा का नहीं दे रहे लाभ
भास्कर न्यूज|राजनांदगांव
फसल बीमा के नाम पर किसान ठगे जा रहे हैं। फसल का बीमा करने से पहले न ही न उनसे पूछा जा रहा और न ही बताया जा रहा, बल्कि खेती के लिए जब किसान को-ऑपरेटिव बैंक ऋण लेता है तो उसी ऋण की राशि में बीमा का प्रीमियम जोड़ दिया जाता है। बाद में किसान अपना ऋण चुकाता है तो उसे बीमा के नाम पर जोड़ी गई प्रीमियम की राशि भी कर्ज के रूप में चुकानी पड़ती है। कर्ज की तरह प्रीमियम की राशि का भी किसानों को ब्याज देना पड़ता है। हालांकि इस साल भी किसानों को बीमा का लाभ नहीं मिला है।
इस साल खरीफ सीजन में धान राष्ट्रीय बीमा योजना के तहत केन्द्र सरकार की एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ने फसल बीमा किया है। धान फसल की बोनी के दौरान जिले के एक लाख 53 हजार 805 किसानों ने को-ऑपरेटिव बैंक से कर्ज लिया। इन किसानों ने कुल मिलाकर 336 करोड़ 11 लाख रुपए का कर्ज लिया।
कर्ज के ढाई प्रतिशत राशि के अनुसार किसानों के कर्ज में फसल बीमा का प्रीमियम के नाम से 6 करोड़ 79 लाख रुपए और जोड़ दिए हैं। हर साल ऐसा ही किया जाता है। इस साल भी किसानों से प्रीमियम की राशि जबरन ऋण में जोड़ दिए लेकिन उन्हें अब तक बीमा का कोई भी लाभ नहीं मिला है।
कर्ज में जोड़ी जाती है प्रीमियम की राशि
बीमा करने वाली एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी किसानों से संपर्क नहीं करती। वह सीधे बैंकों से संपर्क करती है। बैंक किसानों को कर्ज देते हैं। जब वे कर्ज देते हैं तो खुद ही फसल बीमा का प्रीमियम जोड़ देते हैं। किसानों को पता भी नहीं चलता कि उनके फसल का बीमा हुआ है कि नहीं। इससे काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
केस-2
केस-1
केस-3
हमें किसी भी अधिकारी ने जानकारी ही नहीं दी
ग्राम सांकरा निवासी घनश्याम साहू ने बताया कि उन्हें बीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। वे हर साल की तरह सोसायटी से खाद और कर्ज लिए। जब धान बेचने गए तब 25 सौ रुपए अतिरिक्त कर्ज काटा तब पूछने पर बताया कि बीमा की राशि है। जो हर साल कटता है। लेकिन कभी कोई लाभ तो नहीं मिला। इसकी जानकारी हमें किसी भी तरह से नहीं मिली।
डेढ़ लाख से भी ज्यादा किसानों ने लिया है बैंक से कर्ज
राजनांदगांव। कलेक्टोरेट के सामने कई माह से चल रहा धरना अभी भी जारी है। इसमें जिले के किसान शामिल हो रहे हैं।
जानिए यह कह रहे हैं जिम्मेदार अधिकारी
सब भगवान भरोसे चल रहा
किसानों को सरकार से काफी उम्मीद है। सरकार भी किसानों की कोई मदद नहीं कर रही। उल्टा किसानों से बीमा के नाम पर करोड़ों रुपए वसूली कर रही है। किसी किसान को बीमा का लाभ नहीं मिला है। कितना मिलेगा, मिलेगा भी कि नहीं, कुछ नहीं पता। बैंक वाले बीमा किए और अब कंपनी जानेगी बोल रहे हैं। सुदेश टीकम, अध्यक्ष जिला किसान संघ
मामले में कंपनी ही बताएगी
फसल बीमा से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। यह तो सरकार की योजना है। सरकार की कंपनी ने फसल का बीमा किया है। जिस प्रकार राज्य सरकार 6/4 का अनावारी रिपोर्ट बनाकर किसानों को सूखा राहत देगी, वैसे ही कंपनी भी सर्वे कर बीमा का लाभ देगी। कब देगी ये कंपनी ही बता पाएगी।\\\'\\\' एनके दिल्लीवार, सीईओ, सहकारी बैंक
हमने तो बैंक को बताया था
हमारा किसानों से कोई लेना-देना नहीं है। बैंक वाले किसानों को कर्ज देते हैं और वही बीमा करते हैं। बैंक वाले किसानों को फसल बीमा योजना के बारे में क्यों नहीं बताते वही जानें। हमने तो योजना का प्रचार के लिए बैंकों जानकारी दिए है। बीमा का लाभ मिलने में अभी दो तीन माह का समय लग सकता है। अभी तो सूची नहीं बना है।\\\'\\\' एस पटनायक, रीजनल मैनेजर, इंश्योरेंस कंपनी
एक हजार जोड़े कर्ज में
ग्राम खुटेरी निवासी रमाकांत बंजारे ने बताया हर साल उन्होंने बीमा के नाम पर 300 से 500 रुपए दिए, लेकिन कभी कोई लाभ नहीं मिला। इस लिए इस साल बीमा नहीं कराना चाहा तो बैंक वाले कर्ज देने से मना कर दिया। कर्ज लिया तो खुद ही बीमा कर दिए और एक हजार रुपए काट कर जोड़े हैं कर्ज में।
नहीं मिला बीमा का लाभ
पनेका सोसायटी की डायरेक्टर बुधिया बाई ने बताया कि उनका करीब 10 एकड़ खेती है। इसके लिए करीब 50 हजार रुपए कर्ज ली है। इस साल फसल पूरा चौपट हो गया। एक दाना नहीं हुआ। बाद में पता चला कि फसल का बीमा हुआ है। इसके लिए बैंक ने करीब 15 सौ रुपए उनके कर्ज में जाेड़ दिए है।
किसान 1 लाख 2500 रुपए कर्ज चुकाएंगे
किसानों से बीमा का प्रीमियम कर्ज का ढ़ाई प्रतिशत होता है। जैसे कि कोई किसान बैंक से एक लाख रुपए कर्ज लेता है तो फसल बीमा कंपनी उसके इस कर्ज का ढाई प्रतिशत मतलब कि 2500 रुपए का प्रीमियम लेगी। चूंकि किसान पहले से ही कर्ज लेकर खेती कर रहा है इस लिए कंपनी यह प्रीमियम की राशि उसके एक लाख रुपए कर्ज में जोड़ तेजी है। अब किसानों को 1 लाख 2500 रुपए पूरा कर्ज चुकाएगा।