मक्के की खेती ने बदल दिया नक्सल प्रभावित इलाके के किसानों का जीवन
भास्कर न्यूज|मनोज साहू/मनोज मिश्रेकर
मानपुर से महज दो किलोमीटर दूर खैरकट्टा से कटी पगडंडी पकड़ी तो दोनों तरफ सुनसान जंगल। सन्नाटे को चीरती बाइक की आवाज। मानो पूरा माहौल धुर नक्सल इलाके का परिचय दे रहा हो।
इस दौरान बीच-बीच में 10-12 फिट ऊंचे मक्के के पौधे दिखने लगे। तकरीबन 9 किमी सफर तय करने के बाद एक जगह बाइक रुकी। गांव का नाम बताया चिखलाकसा। देखा तो चारों तरफ मक्का ही मक्का। कोडाल नाले के पास मिले किसान प्यारेलाल ने बताया कि इस नाले के दोनों तरफ तकरीबन 3502 हेक्टेयर में मक्का लगा है। 6-7 साल पहले जहां धान लगाते थे, वहां का हर किसान मक्के की खेती कर लाभ कमा रहा है। जिनके पास साइकिलें नहीं थीं, वे बाइक पर घूम रहे और ट्रैक्टर भी खरीद ली।
क्षेत्र के चिखलाकला निवासी प्यारेलाल हल्बा, भैइसारटोला के आलोक यादव, कनेली के धीराजी हल्बा, शिवराजी हल्बा, अजीत कुमार अंधारे, बसेली के राजूराम गोड़, जोहन सिंह रहीपाल, बारसूल के सुकालू कलार सभी ने इस बदलाव को स्वीकारा। बताया कि पिछले 6 बरसों में मक्के का रकबा बढ़ा है और यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुधरी है। इसकी वजह से बच्चे स्कूल जा पा रहे। उनका जीवन स्तर सुधरा है। यहां के किसान साल में तीन फसल लेते हैं, जिनके पास पर्याप्त साधन नहीं है वे ही दो फसल लेते हैं। हाईब्रिड मक्के की खेती से प्रतिक्विंटल उन्हें 1200 से 1350 रुपए का आर्थिक लाभ मिलता है। इसके अलावा मक्के के पौधे और भूसे मवेशियों के लिए पौष्टिक आहार है। इससे दूध उत्पादन भी बढ़ा है। इसलिए किसानों ने दूध बेचना भी शुरू कर दिया। इससे उनके जीवन में काफी सुधार आया है। बताया गया कि आने वाले समय में रकबा और बढ़ेगा।
एक-दो एकड़ में उत्पादन देख हुए
कृषि विस्तार अधिकारी मानपुर केआर साहू ने बताया कि करीब दशकभर पहले मानपुर क्षेत्र में किसान सिर्फ कोदो, कुलथी, दलहन और धान बोते थे। कृषि विभाग ने किसानों को 1-2 एकड़ में उत्पादन करके दिखा तब किसानों ने रुचि ली। 7 साल पहले मात्र 2 हेक्टेयर में शुरू हुआ मक्के का उत्पादन 3502 हेक्टेयर में किया जा रहा है।
चिखलाकसा में 75 किसान 17 के पास
चिखलाकसा में छोटे-छोटे मिट्टी के कवेलू वाले घर हैं। गिने-चुने घर ही ईंट के दिखे। यहां 75 किसान रहते हैं। इसमें से आज 17 किसानों के पास ट्रैक्टर है। इसके अलावा कई अन्य किसानों के पास थ्रेसर, सिपड्रील मशीन आदि कृषि यंत्र हैं। वे कृषि विभाग से संपर्क कर आदिवासी किसानों के लिए बनी योजना का लाभ ले रहे हैं।
आधा दशक पहले जहां धान लगाते थे वहां अब मक्के की खेती
मानपुर क्षेत्र में खुलेगा मक्का आधारित उद्योग
मानपुर के किसानों का हौसला देख शासन ने मक्का आधारित उद्योग के लिए एमओयू हस्ताक्षर कर लिया है। मानपुर के पाना बरस से लेकर फड़की, कोहका से बसेली, सहपालकुर से सहपालखुर्द तक, कंदाड़ी से मुरझर, बेलगांव, नानदवाही, कनेली, सहपाल, भसेली, सुरसेकला, खुर्द, कोंडाल नदी का दोनों ओर से नेड़गांव, हीरा, कहगाव, कोंदाबोली, कोंडे आदि क्षेत्र में खेती हो रही है।
एक पेड़ से कम से कम 10 से 20 मक्का होता
खेतों में 12 फीट ऊंचे मक्के का फसल लगा है। आरएल मुलेरिया ने बताया कि मक्के की लंबाई 10 से 12 इंच है। एक पेड़ में कम से कम 10 और अधिकतम 20 मक्का फलता है। एक मक्का का वजन लगभग 250 ग्राम है। इसमें 600 से 750 मोटे दाने होते हैं और 18 से 20 दानों की लड़ी होती है। उन्होंने बताया कि बाजार में कम से कम 12 से 13 सौ रुपए क्विंटल में बिकते हैं।
प्रति एकड़ 30 से 35 किलो होता है
मैंने तो चार एकड़ में मक्का लगाया है। सात साल से इसी की खेती कर रहा हूं। प्रति एकड़ 30 से 35 किलो उत्पादन लेता हूं। पहले साइकिल से आना-जाना किया करता था। अब दो बाइक हैं और एक ट्रैक्टर भी ले रखा है। मेरा नाती मानपुर में पढ़ रहा है और दूसरा बीए फाइनल में है।\\\'\\\' धीरज हल्बा, कनेली
मेरे पास खेत नहीं, रेगहा लेकर बोया
मेरे पास तो खेत ही नहीं है। जानवर चराता हूं। मक्के से फायदा होता देख इस साल दो एकड़ जमीन रेगहा (लीज) ले ली है। उत्पादन अच्छा रहा तो कम से कम 50 हजार रुपए मिलेंगे। इससे बच्चों की पढ़ाई के लिए रुपए जमा करुंगा और स्कूल जाने के लिए साइकिल भी खरीदूंगा। आलोक यादव, भैंसारटोला कनेली
धूमधाम से की बेटियों की शादी
मेरे पास 6 एकड़ जमीन है। पहले इसमें धान बोता था। रेतीली मिट्टी और खरपतवार के कारण फसल नहीं होती थी। कुलथी और उड़द लगाए पर फायदा नहीं मिला। मक्के के बारे में जानकारी मिली। 7 साल से मक्के की खेती कर रहा हूं। इसी की बदौलत 3 बेटियों की शादी धूमधाम से किया।’’ प्यारेलाल हल्बा, चिखलाकसा
इन जिलों में खेती
(हेक्टेयर में)
क्षेत्र में ऐसे बढ़ा मक्के का रकबा
4850
राजनांदगांव
4550
जगदलपुर
13610
गरियाबंद
15001
कांकेर
15150
कोंडागांव
3205
2015
3095
2014
3120
2013
2205
2012
1500
2011
राजनांदगांव। वनांचल क्षेत्र के ग्राम चिखलाकसा के खेतों में इस तरह मक्के की खेती ने ग्रामीणों की तकदीर पूरी तरह से बदल दी है।