अमिशा बनी बास्केटबॉल की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
मात्र 12 साल की अमिशा गायकवाड़ अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी बन गई है। इस उम्र में बच्चे जहां खुद से सड़क पार नहीं कर सकते ऐसे कम उम्र में अमिशा ने एडिलेड ऑस्ट्रेलिया में आयोजित पेसिफिक बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भाग लिया।
सिर्फ यही नहीं अब तक वह तीन राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेल चुकी है। इसमें उसने एक गोल्ड और एक ब्रांज मैडल भी जीता है। दस साल की उम्र में वह अपना पहला स्कूल नेशनल गेम राजस्थान में खेली। वहां उसने अपने बेहतर प्रतिभा से ब्रांज मैडल जीता। यह उसकी जीत की शुरुआत थी। फिलहाल अमिशा डीपीएस की छात्रा है। वहां उसे नि:शुल्क एडमिशन दिया गया है। बिलासपुर के बृहस्पति बाजार चांटापारा में रहने वाली अमिषा राजनांदगांव के साई में ट्रेनिंग ले रही है। अमिशा के पिता भूपेंद्र होटल में काम करते हैं। वहीं मां दूसरों के घरों में खाना पकाने का काम करती है। उसकी एक बड़ी बहन भी है, जो कक्षा 10 वीं में पढ़ती है।
माता-पिता को लगता था कि उनका कोई बेटा नहीं है, लेकिन जब वह अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनी। आस्ट्रेलिया से खेलकर लौटी और नेशनल स्कूल गेम में गोल्ड मैडल जीता तो माता-पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।
जुनून के साथ की मेहनत तब जाकर मिली सफलता
अमिशा ने जिद और जुनून से जो मुकाम हासिल किया है, वह बेहद गर्व की बात है। अमिशा डीपीएस में निशुल्क पढ़ रही है और बॉस्केटबॉल की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी है। सांई ट्रेनिंग सेंटर में मैं ही उसे प्रशिक्षण देता हूं। अमिशा का खेल के प्रति लगन सराहनीय है। प्राचार्य पी वासुदेव राव, जिला बास्केटबॉल संघ के आनंद सिंह, खेल अधिकारी अश्वीन राय और सुशील जानी का भी सहयोग रहा है।\\\'\\\' के राजेश्वर राव, इंटरनेशनल व साई के प्रमुख कोच
सब जूनियर स्पर्धा पांडिचेरी में जीत लिया गोल्ड मेडल
पांडिचेरी में 2 से 8 फरवरी तक सब जूनियर राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता हुई। इस प्रतियोगिता में उसकी की टीम ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसमें उन्हें स्वर्ण पदक मिला। इसके अलावा गोटन राजस्थान में आयोजित सब जूनियर शालेय राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में कांस्य पदक, सोनीपत में आयोजित सीबीएसई राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में भाग ले चुकी है। राज्य स्तरीय व क्लस्टर बास्केटबॉल में कई स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक जीती है।
बिलासपुर की अमिशा फिलहाल राजनांदगांव के साई सेंटर में ट्रेनिंग ली रही है
अब मम्मी और पापा का सपना करूंगी पूरा
अमिशा कहती है मैं अपने माता-पिता का नाम रोशन करूंगी। उनका हर सपना पूरा करुंगी। मैं कभी ट्रेन में बैठी नहीं थी, सिर्फ टीवी में ट्रेन देखी थी लेकिन जब उसका सांई में चयन हुआ तब वह पहली बार ट्रेन में बैठी। ट्रेनिंग के बाद 2015 जब ऑस्ट्रेलिया के लिए चयन हुआ तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जब प्लेन देखी तो खूब मजा आया, लेकिन बैठने पर डर लगा।
राजनांदगांव। ट्रॉफी के साथ अमिशा।
खेल का जज्बा