आलीखूंटा और मेढ़ा की रेत खदानों में वसूल रहे पांच गुना अवैध रॉयल्टी
मेढ़ा और आरगांव पंचायत के आश्रित गांव आलीखूंटा में रेत रॉयल्टी 120 रुपए के स्थान पर पांच गुना अधिक लगभग 650 रुपए वसूली जा रही है। वहीं लोडिंग के लिए लेबर चार्ज 800 रुपए फिक्स कर दिए गए हैं। इसके चलते शहर में एक टिप्पर रेत की कीमत 6000 रुपए तक है। हालांकि सरकारी खजाने में 20 रुपए प्रति घन मीटर के हिसाब से ही राशि जमा हो रही। चूंकि पर्ची ही इतने की दी जा रही। खदानें तो पंचायतों के हवाले हैं, लेकिन वहां की सत्ता ठेकेदार संभाल रहे। रेत की बढ़ती कीमत को देख मंगलवार को भास्कर टीम खदानों में पहुंची। वहां का आंखों देखा हाल ऐसा रहा।
स्पॉट पर ये िमला
120 रुपए की जगह 650 रुपए की वसूली, लोडिंग के लिए लेबर चार्ज 800 रुपए भी फिक्स
राजनांदगांव| आलीखूंटा में नई रेत खदान शुरू करने जेसीबी से बनाया जा रहा रैंप।
हड़पी जा रही ग्रामीण मजदूरों की आधी राशि
मजदूरों की मानें तो ठेकेदार उनसे 800 रुपए में सौदा जरूर करवाते हैं, लेकिन उन्हें केवल 400 रुपए ही मिलता है। यानी उनके हिस्से की आधी राशि भी ठेकेदार हड़प रहे हैं। यानी इससे भी लाखों रुपए की उगाही की जा रही है। इस पर भी कार्रवाई की जरुरत है।
इसलिए बढ़ गई रेत की कीमत
मटेरियल सप्लायर ओम सिन्हा ने बताया कि मेढ़ा में उन्हें 550 रुपए रॉयल्टी व 800 रुपए लेबर चार्ज देना पड़ता है। 1300 देने के बाद डीजल का खर्च अलग। इसलिए रेत की कीमत बढ़ी है। इससे अच्छा है कि धमतरी से रेत लाई जाए।
जरूर होगी कार्रवाई
रॉयल्टी के नाम पर अवैध वसूली बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रेत के दाम पहले से ही तय किए गए हैं। मेढ़ा और आलीखूंटा के रेत खदानों के बारे में आपसे पता चला। इसे मैं दिखवाता हूं और ऐसा है तो कार्रवाई जरूर होगी। -मुकेश बंसल, कलेक्टर
कलेक्टर की नहीं सुन रहे
तकरीबन 6 माह पहले कलेक्टर मुकेश बंसल ने रेत की बढ़ती कीमत पर अंकुश लगाने के लिए 2500 से 2900 रुपए रेट फिक्स किए थे। इसे लेकर विभाग को भी सख्त निर्देश दिए गए थे। लेकिन इसके बावजूद अब न पंचायतों ने इस पर ध्यान दिया और न खनिज विभाग ने सख्ती दिखाई।
सरपंच ने कहा, मनोज साहू से कर लो बात
वहां का रेत खदान कौन चला रहा हैω?
मनोज साहू।
वहां तो निर्धारित रेट से ज्यादा रॉयल्टी वसूली जा रहीω?
आप मनोज साहू से बात कर लो।
मैं मनोज साहू से क्यों बात करुंω सरपंच तो आप होω एक टिप्पर की रॉयल्टी कितनी होती हैω आप बताओω?
मैं अभी ग्रामसभा में हूं। बाद में बात करुंगा।
आप बात टाल रहे हैंω?
मैं ग्रामसभा में हूं… (फोन काट दिया।)
ठेकेदार: आपके पास कितने टिप्पर हैंω?
रिपोर्टर: दो तो हैं ही, मैं चार-पांच गाड़ियां जुगाड़ कर लूंगा।
ठेकेदार: तो ठीक है। आप कल सुबह दो टिप्पर भेज दीजिए। रात में फिर बाकी गाड़ियां भेजना। जेसीबी की तरफ इशारा करते हुए… मशीन लगी हुई है। रात का रिस्क मेरा। रिस्क मेरा है।
रिपोर्टर: गांव वाले आब्जेक्शन नहीं करेंगेω?
ठेकेदार: गांव वाले आब्जेक्शन करते तो मशीन यहां तक आती क्याω मैं। आपको दो रॉयल्टी दूंगा। ऐसा नहीं कि एक ही रॉयल्टी पर्ची में दो बार चक्कर लगाना पड़े। हां, खनिज वाले रोकेंगे तो आपको पता ही है क्या करना हैω बता देना गाड़ी खराब हो गई थी। बाकी इस धंधे में हैं तो जानते ही हैं इनसे कैसे निपटना है।
रिपोर्टर: हां… सो तो है। लोडिंग का कितना लगेगाω
ठेकेदार: आप खैरागढ़ पहुंचाकर कितना ले रहे होω
रिपोर्टर: 6000 रुपए।
ठेकेदार: तो ठीक है आप मुझे 1800 रुपए देना, लोडिंग-रॉयल्टी सब मिलाकर। और अपने करीबियों को भी बता सकते हैं। अभी रैंप बन रहा है। एक नंबर का माल निकलेगा यहां से। बात लीक न होने पाए।
रिपोर्टर के सामने ठेकेदार ने ऐसे खोले कई राज
आलीखूंटा रेत खदान में समोसे का मजा लेते बैठे पांच लोगों में से एक ने अपना नाम मनोज साहू बताया और दूसरे का मुकेश शेंडे। पूरी तस्दीक करने के बाद मनोज, भास्कर के रिपोर्टर को वहां से कुछ दूर लेकर गया और सौदे की बात की। इस बातचीत में समझ आ जाएगा कि रेत माफिया को विभागीय अफसरों का बिल्कुल भी डर नहीं।
मेढ़ा खदान: सुबह 9.40 बजे। खदान पर सात ट्रैक्टरों में रेत भरी जा रही है। वहीं खड़े राजेश नाम के व्यक्ति ने पूछने पर बताया कि वैसे तो ट्रैक्टर में रेत ले जाने के लिए रॉयल्टी 60 रुपए होनी चाहिए, लेकिन 300 रुपए ले रहे। टिप्पर में 550 रुपए लिया। लेबर चार्ज अलग। दूर बैठे पर्ची काट रहे मणिराम कीमत पूछी तो इतना ही बताया। पर्ची में सरकारी रेट लिखा था।
आलीखूंटा खदान: सुबह 10.53 बजे। जैसे ही खदान पहुंचे तो देखा की जेसीबी से रैंप बनाया जा रहा। नया खदान चालू करने की तैयारी। वहीं गपशप लगा रहे लोगों के पास जाने पर पता चला खदान में रुतबा उन्हीं का है। रिपोर्टर ने सप्लायर बनकर बात की। रॉयल्टी पूछी। सामने वाले ने कहा, 650 रुपए। लेबर चार्ज पूछने पर बोले, उन्हीं से बात कर लो। मौके पर 11 ट्रकें लोड हो रही थीं। मजदूर से पूछा, लेबर चार्ज क्या लोगेω जवाब मिला 800 रुपए। लौटने पर खुलासे हुए।
6 माह में 48 लाख अवैध रॉयल्टी
एक टिप्पर से लेना चाहिए- 120 रुपए
खदान ठेकेदार वसूल रहे- 650 रुपए
अधिक रायलटी- 650-120= 530
रोजाना 50 टिप्पर- तो 530x50= 26, 500 रुपए
एक माह में 30 दिन का- 26,500x30=7,95,000 रुपए
6 माह में अवैध कमाई- 7,95,000x6= 47 लाख 70 हजार रुपए
(नोट- इसमें लेबर चार्ज अधिक लेकर बचाए गए रुपए शामिल नहीं।)
10:53 बजे
9:40 बजे