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अस्पतालों में पड़ी मिली सीरिंज, ग्लूकोज बॉटल और ओटी के कचरे भी फैले मिले

5 वर्ष पहले
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अस्पताल में सफाई व्यवस्था के निरीक्षण के लिए पर्यावरण विभाग की टीम पूरे जिले के निजी और शासकीय अस्पतालों की सफाई व्यवस्था की जांच कर ही है। इसके लिए पर्यावरण की टीम पूरे जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों की जांच कर रही है। इसके साथ ही अस्पताल से निकलने वाली कचरे जैसे सिरिंज, ग्लूकोज बोतल, निडिल, कॉटन पट्टी और ऑपरेशन थिएटर से निकलने वाली गंदगी काे नष्ट करने की जानकारी भी दी जा रही है।

बताया गया कि टीम ने डोंगरगढ़, घुमका, छुरिया आदि अस्पतालों का निरीक्षण किया। इन अस्पतालों की सफाई व्यवस्था की जांच रिपोर्ट एनजीटी (नेशलन ग्रीन ट्रिब्यूल पर्यावरण कोर्ट) को सौंपी जाएगी। इसके लिए पर्यावरण विभाग को 14 फरवरी तक का समय दिया गया है। एनजीटी कोर्ट के आदेश के बाद इन अस्पतालों पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल अभी जांच टीम ने इन अस्पतालों की फाइनल रिपोर्ट तैयार नहीं की है।

शहर के नर्सिंग होम वाले खुली जगह पर फेंकते हैं कचरा: शहर में स्थित निजी अस्पताल और नर्सिंग होम वाले अस्पताल से निकलने वाले कचरे को खुल स्थान पर फेंक देते हैं। वहीं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल से निकलने वाली सिरिंज, ग्लूकोज बोतल, निडिल व आॅपरेशन के समय निकलने वाली गंदगी को खुले स्थान नहीं फेंक सकते। एक जगह पर गड्ढा कर डाला जाता है, इससे आसपास संक्रमण न फैले। सरकारी और निजी अस्पतालों की सफाई के लिए प्रति बेड लगभग 200 रुपए निगम प्रशासन के पास जमा करना पड़ता है।

समय-समय पर जांच
एनजीटी कोर्ट के आदेश के अनुसार इस प्रकार की जांच समय-समय पर की जाती है। इसमें अस्पताल की सफाई व्यवस्था की स्थिति की जांच भी की जाती है। जांच के बाद रिपोर्ट को एनजीटी कोर्ट को भेजा जाएगा। अजय गेंड्रे, रीजनल अधिकारी पर्यावरण विभाग

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