पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • अस्पताल में निजी एंबुलेंस की पार्किंग

अस्पताल में निजी एंबुलेंस की पार्किंग

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
बुधवार को एडीएम और एएसपी ने अस्पताल पहुंचकर बिना रजिस्ट्रेशन और बिना सुविधाओं के चल रहे एंबुलेंस जब्त किए। पुलिस ने फाइन बनाया और छोड़ दिया। दूसरे दिन गुरुवार को स्थिति जस की तस दिखी। हालांकि गाड़ियों की संख्या कम हो गई। इधर आरटीओ के पास जिले में संचालित निजी एंबुलेंस की फिटनेस की कोई जानकारी नही है। पूरे जिले में 27 निजी एंबुलेंस संचालित है, लेकिन इसमें से कितने एंबुलेंस के पास फिटनेस प्रमाण पत्र है। इसकी जानकारी आरटीओ विभाग के पास भी नहीं है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि कार्यालय में जो एंबुलेंस फिटनेस प्रमाण पत्र के लिए आते हैं उन्हीं की जांच की जाती है।

जिला अस्पताल सह मेडिकल कॉलेज में बुधवार का एडीएम संजय अग्रवाल और एएसपी शशिमोहन सिंह ने अस्पताल परिसर के सौ मीटर के भीतर खड़े निजी एंबुलेंस की जांच की गई। जांच के दौरान इन एंबुलेंस में न ही ऑक्सीजन सिलेंडर मिला और न ही स्ट्रेचर। इसके बाद सभी एंबुलेंस को जब्त कर थाना भेज दिया गया।

सिर्फ चार एंबुलेंस पर फाइन: जिला अस्पताल में पांच निजी एंबुलेंस की जांच कर थाना भेजा गया था, लेकिन थाना में सिर्फ चार एंबुलेंस का ही फाइन किया गया गया है। जिला अस्पताल से पांच एंबुलेंस को थाना भेजा गया था। इसमें सीजी 07 एम 5553 वाहन चालक शैलेंद्र कुमार पर धारा 117, 177 के तहत 200 रुपए, सीजी 08 जेडजी 4011 महेंद्र देवांगन पर धारा 117,177, 146, 196 के तहत 500 रुपए, सीजी 07 एम 2540 कैलाश ओमप्रकाश पर धारा 117, 177 के तहत 200 रुपए और सीजी 08 जेडजी 0235 मोहम्मद शकील पर धारा 117, 177, 146, 194 के तहत 500 रुपए का फाइन कर छोड़ दिया गया। वहीं इसमें सीजी 08 5190 विनय मेश्राम की एंबुलेंस फाइन नहीं किया गया है।

इस तरह से हो रहा है एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एंबुलेंस के नाम से गाड़ी लेने पर उसका रजिस्ट्रेशन हो जाता है। इसके बाद विभाग इसमें प्राथमिक उपचार बॉक्स, स्ट्रेचर और ऑक्सीजन सिलेंडर की जांच कर एंबुलेंस को परमिट दे दिया जाता है। इसके बाद न ही आरटीओ विभाग इसकी जांच करता है और न ही स्वास्थ्य विभाग। अगर सड़क पर एंबुलेंस पकड़ा जाए तो इस पर फाइन कर छोड़ दिया जाता है। ज्यादातर चेकिंग में एंबुलेंस को नहीं रोका जाता, जिसका फायदा निजी एंबुलेंस संचालक उठा रहे हैं।

समझाइश के बावजूद भी नहीं सुधर रही व्यवस्था
जिला अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था बनाए रखने के लिए ठेकेदार को समझाइश दी गई थी। इसके बावजूद अस्पताल में पार्किंग व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। अस्पताल में गुरुवार को भी अस्पताल के मेन गेट पर गाड़ियों की पार्किंग की जा रही है। इसके साथ ही अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी अब भी अस्पताल के अंदर ही अपनी गाड़ियों की पार्किंग कर रहे हैं। जिस पर अस्पताल प्रबंधक द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया जा रहा है।

राजनांदगांव| समझाइश के बावजूद अस्पताल परिसर से नहींं हटी एंबुलेंस।

जानिए क्या कह रहे हैं जिम्मेदार अधिकारी
विभाग के पास जो एंबुलेंस फिटनेस जांच के लिए आता है। उसी की जांच की जाती है, जो गाड़ी नहीं आती है, उसकी जांच नहीं करते। अब्दुल गनी खान, परिवहन विभाग अधिकारी

जो भी अस्पताल परिसर में एंबुलेंस रखेंगे, उन पर कार्रवाई करेंगे। निजी एंबुलेंस वालों को हिदायत दी गई है कि मिनिमम रिक्वायरमेंट के साथ एंबुलेंस चलाएं। शशिमोहन सिंह, एएसपी

खबरें और भी हैं...