रायगढ़। दो लोगों ने माइनिंग विभाग के अधिकारी, बाबू और सुपरवाइजर पर पैसे लेकर काम करने का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत खनिज सचिव के नाम डीएम मुकेश बंसल को ज्ञापन सौंप कर की है। साथ ही शिकायतकर्ताओं द्वारा तत्काल इसकी जांच कर निलंबित करने की मांग की है। वहीं इस मामले में दो दिन उस वक्त नाटकीय मोड़ गया।
इसके साथ ही एक गुमनाम व्यक्ति ने खुद को बड़ी कंपनी का ठेकेदार बताते हुए कलेक्टर को पत्र लिखा है, उसने कहा है कि खनिज सचिव को शिकायत भेजने वाला व्यक्ति उसके साथ ही काम करता है और उसने गलत शिकायत की है। उसने सचिव को भेजी शिकायत वापस लेने की बात भी कही है। हालांकि कलेक्टर ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एडीएम को मामले की जांच करने का आदेश दिया है।
भेंट नहीं चढ़ाई तो गायब कर दी फाइल- शिकायत दो व्यक्तियों के द्वारा की गई है। इसमें एक व्यक्ति ने छह बिंदुओं पर शिकायत की है। पहला शिकायतकर्ता रायगढ़ निवासी पीएल रानाडे है जिसने आरोप लगाए गए हैं कि एक माह पहले पुष्पा मिनरल्स की डोलोमाइट भंडारण के लाइसेंस संबंधी आवेदन वाली फाइल कलेक्टर से विधिवत अनुमति के बाद खनिज विभाग भेजी गई। यहां फाइल गुम हो गई। आरोप है कि फाइल तैयार करने वाले बाबू को मनचाही भेंट नहीं दी गई, जिससे नाराज लिपिक ने फाइल छिपा दी। इस मामले में माइनिंग आफिसर ने तो लिपिक को कोई नोटिस दिया और ही कार्रवाई की। शिकायतकर्ता ने खनि अधिकारी शिवशंकर नाग पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है। उसने कहा है कि विभाग के लोगों की मनमानी के कारण पीड़ित को एक महीने तक केवल भटकना पड़ा बल्कि दस्तावेजों की छाया प्रति मांग कर पुन फाइल कलेक्टर के समक्ष अनुमोदन के लिए भेजना पड़ा। दो लोगों द्वारा शिकायत भेजने के बाद एक व्यक्ति ने खुद को बड़ी कंपनी को ठेकेदार बताते हुए कलेक्टर को भेजे गए एक पत्र में कहा है कि जिन लोगों ने खनिज विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत की है वे लोग उनके साथी हैं और उन्होंने जो आरोप लगाए हैं वे सही नहीं हैं। उसने शिकायत वापस लिए जाने की भी बात कही है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर मुकेश बंसल ने अतिरिक्त कलेक्टर श्याम धावड़े से मामले की जांच करने के लिए कहा है।
^लगाए गए आरोप गलत है। हम जांच के लिए तैयार हैं। जांच में सारी बात सामने जाएगी। शिवशंकर नाग, माइनिंगअफसर
फाइल ओके कराने देनी पड़ती है रिश्वत : इसके साथ ही दूसरे शिकायतकर्ता एमएम युनकर रायगढ़ ने अाठ बिंदुओं की शिकायत की है। इसमें उसने आरोप लगाया गया है कि खनिज अधिकारी श्री नाग द्वारा भारी मात्रा में फाइलों को अवैधानिक तरीके से स्वीकृति देकर अवैध वसूली कर रहे हैं। शिकायतकर्ता ने विभाग के बड़े बाबू (सीनियर क्लर्क) पर रिश्वत लेकर ही फाइल आगे बढ़ाने का आरोप लगाया है।
उसने आरोप लगाया है कि विभाग के सुपरवाइजर सुनील दत्त शर्मा की पोस्टिंग टिमरलगा बेरियर में है पर वहां ड्यूटी कर वह खनि अधिकारी के लिए उगाही करता है। विभाग में प्रत्येक फाइल पर राशि तय की गई है जिसके नहीं मिलने पर फाइल आगे नहीं बढ़ती है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कोयला माइंस कंपनियों के प्रतिनिधि देर शाम दफ्तर में बैठते हैं ओर दस्तावेज में हेरफेर की जाती है। खनि अधिकारी सुपरवाइजर के अलावा खनिज निरीक्षकों पर भी अवैध उगाही का आरोप लगाया गया है। माइनिंग विभाग में लीजधारकों की फाइल दस्तावेजों को बाहरी लोगों द्वारा अनाधिकारिक तौर पर देखने और कहीं भी रखने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने इन शिकायतों की जांच करने के लिए खनिज सचिव को आवेदन भेजा है और कलेक्टर से जांच कराने की मांग की है।
जिन दो लाेगों ने शिकायत की है उन दोनों ने ही अपना पता रायगढ़ बताया है। वहीं जिसके द्वारा उक्त शिकायत पर ध्यान नहीं देने उसे खारिज कर देने की मांग की गई है। उसने स्वयं को एक कंपनी में ठेकेदार बताया है लेकिन अपने नाम तक का उल्लेख नहीं किया। लिहाजा माइनिंग विभाग के अफसरों पर यह उंगली उठ रही है कि कही विभाग के अफसरों ने ही शिकायत वापस लेने का आवेदन कलेक्टर को तो नहीं दिया।
शिकायत करने वाले कोई और वापस लेने वाला कोई और क्यों...
विभाग के ही कर्मचारी की हो सकती है करतूत : जोशिकायत माइनिंग अफसरों के खिलाफ की गई है। इसमें विभाग के ही किसी कर्मचारी का हाथ होने की भी बात सामने रही है। हालांकि अफसर, बाबू सुपरवाइजर पर लगाए गए आरोप की सत्यता जांच उपरांत ही सामने आएगी।
एक्सक्लूसिव भास्कर : खनिज विभाग के विरुद्ध पहले की शिकायत फिर वापस ली ।